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Udhampur Terrorist Encounter: सुरक्षाबलों ने गुफा में छिपे जैश के टॉप कमांडर समेत दो आतंकियों को किया ढेर

On: June 27, 2026 6:46 PM
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Udhampur Terrorist Encounter News: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दो खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया है।
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Udhampur Terrorist Encounter News: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दो खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ जिले के बसंतगढ़ स्थित जाफर जंगल (Jophar Forest) इलाके में हुई, जो लगभग 20 घंटों से अधिक समय तक चली। मारे गए आतंकियों में जैश का एक शीर्ष कमांडर रूबानी उर्फ अबू मविया भी शामिल है, जो पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय था और कई आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जाता था।

ऑपरेशन ‘किया’ (Operation Kiya): 20 घंटे का रणनीतिक संघर्ष

भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) ने इस संयुक्त अभियान को ‘ऑपरेशन किया’ नाम दिया था।

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  • घेराबंदी और संपर्क: खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षाबलों ने मंगलवार दोपहर करीब 4 बजे जाफर जंगल के दुर्गम इलाके को घेर लिया था। जैसे ही जवान आतंकियों के करीब पहुंचे, एक प्राकृतिक गुफा में छिपे आतंकियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी।
  • आधुनिक तकनीक का उपयोग: घने जंगल और गुफा की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सेना ने पैराट्रूपर्स, डॉग स्क्वॉड और आधुनिक सर्विलांस ड्रोन का इस्तेमाल किया। ड्रोन की मदद से आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया।
  • सर्जिकल स्ट्राइक जैसा प्रहार: बुधवार दोपहर सुरक्षाबलों ने गुफा पर अंतिम प्रहार किया। इस दौरान कई शक्तिशाली धमाके सुने गए। सेना ने गुफा के मुहाने और उसके अंदर छिपे दोनों आतंकियों को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी कर दिया।

आतंकियों के पास से मिला हथियारों का जखीरा

मारे गए आतंकियों के कब्जे से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं। बरामद सामान में शामिल हैं:

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  1. एक M4 कार्बाइन राइफल (अमेरिकी निर्मित)।
  2. एक AK-47 असॉल्ट राइफल।
  3. भारी मात्रा में कारतूस और संचार उपकरण।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इन आतंकियों का खात्मा इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि ये आतंकी उधमपुर के ऊपरी इलाकों में अपनी पैठ जमाने की कोशिश कर रहे थे।

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इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी

हालांकि ऑपरेशन ‘किया’ आधिकारिक रूप से संपन्न हो गया है, लेकिन सुरक्षा बल कोई ढील नहीं बरत रहे हैं। बसंतगढ़ और आसपास के जंगली इलाकों में अभी भी कॉम्बिंग ऑपरेशन (सर्च ऑपरेशन) जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई अन्य आतंकी या उनका मददगार क्षेत्र में छिपा न हो। इसके साथ ही, पड़ोसी जिले किश्तवाड़ में भी एक अलग एनकाउंटर (ऑपरेशन त्रिशी-I) की खबरें हैं, जहां एक अन्य आतंकी को ढेर किया गया है।

आतंकवादियों के साथ मुठभेड़

उधमपुर में हुई यह कार्रवाई दर्शाती है कि भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच आपसी समन्वय (Inter-agency coordination) अब तक के सबसे मजबूत स्तर पर है। दुर्गम गुफाओं और घने जंगलों को ढाल बनाने वाले आतंकवादियों के लिए यह मुठभेड़ एक स्पष्ट संदेश है कि उनकी हर साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के बसंतगढ़ स्थित जाफर जंगल में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दो खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए हैं। इनमें कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड और टॉप कमांडर रूबानी उर्फ अबू मविया भी शामिल है। जानिए 20 घंटे से अधिक समय तक चले इस बड़े सैन्य ऑपरेशन की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत भारतीय सुरक्षाबलों को एक बार फिर बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। केंद्र शासित प्रदेश के उधमपुर (Udhampur) जिले के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्र बसंतगढ़ में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के एक संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के दो खूंखार पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया है। बसंतगढ़ के घने जाफर जंगल (Jophar Forest) इलाके में हुई यह मुठभेड़ बेहद भीषण और रणनीतिक रही, जो लगभग बीस (20) घंटों से भी अधिक समय तक लगातार चलती रही। इस सफल सैन्य ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद का एक बेहद वांछित और शीर्ष कमांडर रूबानी उर्फ अबू मविया भी शामिल है। रूबानी पिछले कई वर्षों से जम्मू संभाग के इस पर्वतीय बेल्ट में सक्रिय था और सुरक्षाबलों व स्थानीय नागरिकों पर हुए कई बड़े हमलों का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता था।

सैन्य सूत्रों से प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को जाफर जंगल के अत्यधिक घने और संकरे पहाड़ी क्षेत्र में कुछ संदिग्ध हथियारबंद आतंकवादियों के छिपे होने के पुख्ता और सटीक खुफिया इनपुट मिले थे। इस सूचना पर बिना कोई समय गंवाए सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने पूरे वन क्षेत्र की घेराबंदी कर एक बड़ा संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खुद को चारों ओर से घिरता देख और सुरक्षाबलों का घेरा सख्त होता देख, घने पेड़ों की ओट में छिपे बैठे आतंकवादियों ने स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलाबारी शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद यह सर्च ऑपरेशन एक भीषण मुठभेड़ में तब्दील हो गया।

जाफर जंगल की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। घने पेड़, ऊंचे-नीचे पहाड़ और लगातार खराब होते मौसम के कारण ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आ रही थीं, लेकिन भारतीय जांबाजों ने रात के अंधेरे में भी अत्याधुनिक नाइट विजन उपकरणों और ड्रोन कैमरों की मदद से आतंकियों की हर हरकत पर पैनी नजर बनाए रखी। आखिरकार, बीस घंटे से अधिक समय तक चले इस कड़े मुकाबले में सुरक्षाबलों ने सधे हुए निशाने के साथ दोनों पाकिस्तानी आतंकियों को सदा के लिए शांत कर दिया। मारे गए आतंकियों के कब्जे से भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान, जिनमें अत्याधुनिक अमेरिकी एम-4 कार्बाइन राइफल, एके-47 राइफलें, भारी संख्या में जिंदा कारतूस, चीनी ग्रेनेड, जीपीएस सिस्टम और पाकिस्तानी मुद्रा बरामद हुई है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टॉप कमांडर रूबानी उर्फ अबू मविया का मारा जाना जैश-ए-मोहम्मद और सीमा पार बैठे उनके आकाओं के लिए एक बहुत बड़ा और कमर तोड़ने वाला झटका है। रूबानी न केवल स्थानीय युवाओं को गुमराह कर आतंक के रास्ते पर धकेलने का काम कर रहा था, बल्कि वह हाल के दिनों में जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ कर आए नए आतंकियों के समूहों को पनाह और रसद पहुंचाने वाले नेटवर्क का मुख्य संचालक भी था। उसकी मौत से उधमपुर, कठुआ और डोडा के पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद पूरी घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद कर दिया गया है और आस-पास के क्षेत्रों में एहतियातन तलाशी अभियान अभी भी जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को जड़ से खत्म किया जा सके।

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