Uttarakhand SIR News: उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाया है। बीएलओ ड्यूटी के बहाने विभागीय कामकाज प्रभावित होने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए रोजाना कम से कम एक घंटा केंद्र पर विभागीय काम निपटाने को अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही अगस्त 2026 के अंत तक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के 3211 रिक्त पदों पर शत-प्रतिशत नियुक्तियां पूरी करने और बच्चों के आवश्यक पहचान दस्तावेज जुलाई अंत तक बनाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। जानिए इस प्रशासनिक समीक्षा की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को धरातल पर मजबूती से लागू करने और प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने के लिए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या पूरी तरह से सख्त तेवर में नजर आ रही हैं। विभागीय कामकाज में लापरवाही और केंद्र पोषित योजनाओं की सुस्त रफ्तार को लेकर उन्होंने अधिकारियों की जमकर क्लास ली है। अक्सर यह देखा जाता है कि विभिन्न अतिरिक्त ड्यूटियों के बहाने विभागीय काम को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। कैबिनेट मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान इस बात पर गहरी नाराजगी और आपत्ति जताई कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और अन्य चुनावी या सर्वेक्षण कार्यों में व्यस्त होने का बहाना बनाकर आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य विभागीय कामकाज प्रभावित किया जा रहा है। इस ढर्रे को तुरंत बदलते हुए उन्होंने एक बेहद कड़ा और नीतिगत निर्देश जारी किया है। नए आदेश के तहत अब प्रदेश की प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए यह पूरी तरह अनिवार्य होगा कि वह बीएलओ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ हर दिन कम से कम एक घंटा अनिवार्य रूप से अपने मूल आंगनबाड़ी केंद्र पर मौजूद रहकर विभाग से जुड़े जरूरी कामकाज और डेटा एंट्री को निपटाएंगी ताकि बच्चों और माताओं से जुड़ी योजनाएं प्रभावित न हों।
सचिवालय या विधानसभा परिसर स्थित सभागार में आयोजित इस अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने विभाग के आला अधिकारियों और वर्चुअली जुड़े जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ एक-एक योजना की धरातलीय प्रगति को परखा। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को वास्तविकता का अहसास कराते हुए कहा कि हमारे विभाग की अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत या आंशिक रूप से वित्तपोषित (फंडेड) हैं। इन सभी योजनाओं की प्रगति की दिल्ली से रोजाना ऑनलाइन मॉनिटरिंग और कड़ा मूल्यांकन किया जाता है। यदि हमारे स्तर पर डेटा फीडिंग में थोड़ी सी भी लापरवाही, देरी या मानवीय चूक की गई, तो केंद्र सरकार से उत्तराखंड को मिलने वाला आगामी बजट और वित्तीय सहायता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। केंद्र से बजट अटकने का सीधा असर राज्य की गरीब महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर पर पड़ेगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी गंभीरता को देखते हुए उन्होंने विभागीय सचिव को सख्त निर्देश दिए कि वे तुरंत सभी जिलाधिकारियों (DMs) को एक कड़ा शासकीय पत्र लिखें, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपने मूल विभागीय दायित्वों से विमुख न हों और रोजाना एक घंटा केंद्र के प्रशासनिक काम को दें।

बैठक के संपन्न होने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने राज्य के युवाओं और रोजगार की तलाश कर रही महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खुशखबरी साझा की। उन्होंने बताया कि विभाग ने लंबे समय से लंबित चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की बंपर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञप्ति पहले ही जारी कर दी है। भर्ती प्रक्रिया की समय-सीमा तय करते हुए उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में कार्यकत्रियों के 438 रिक्त पदों और सहायिकाओं के भारी-भरकम 2773 रिक्त पदों सहित कुल 3211 पदों पर आगामी अगस्त माह के अंत तक शत-प्रतिशत नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पूरी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, त्रुटिहीन और समयबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाए। अगस्त के अंत में इन नियुक्तियों के मुकम्मल होते ही उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार आंगनबाड़ी केंद्रों के भीतर इन दोनों ही महत्वपूर्ण संवर्गों के पदों पर शत-प्रतिशत तैनाती पूरी हो जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की देखभाल और पोषण वितरण की व्यवस्था पूरी तरह से सुदृढ़ हो जाएगी।
इस उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री ने प्रदेश के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छोटे बच्चों के आवश्यक पहचान दस्तावेज जैसे कि आधार कार्ड और अपार आईडी (APAAR ID) के निर्माण की बेहद धीमी रफ्तार और कम संख्या पर भी गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस तकनीकी ढिलाई के लिए मैदानी और पर्वतीय जिलों के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वर्चुअल माध्यम से जुड़े राज्य के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों (DPOs) को उन्होंने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे मिशन मोड में अभियान चलाकर आगामी जुलाई माह के अंत तक प्रत्येक पंजीकृत बच्चे का आधार कार्ड और विशिष्ट अपार आईडी कार्ड बनाना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि इस निर्धारित समय-सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा नहीं हुआ और किसी भी बच्चे का दस्तावेज अधूरा पाया गया, तो संबंधित क्षेत्र के जिला प्रोबेशन अधिकारी के खिलाफ कठोर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी।
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बच्चों के सर्वांगीण स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर कड़ाई से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले नौनिहालों का शारीरिक विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं, इसे जांचने के लिए सभी केंद्रों पर नियमित रूप से बच्चों का वजन और उनकी लंबाई नापी जानी चाहिए। इस शारीरिक माप के आंकड़ों को केंद्र सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी ‘पोषण ट्रैकर एप’ पर प्रतिदिन बिना किसी नागा के फीड किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य आपूर्ति और परिवहन से जुड़े अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य के अंतिम छोर पर स्थित दूरस्थ पर्वतीय केंद्रों पर भी गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए भेजी जाने वाली पुष्टाहार और पोषण सामग्री समय से पहले पहुंचनी चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
संवाद के अंतिम चरण में, कैबिनेट मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की भौतिक स्थिति और वहां की बुनियादी सुविधाओं की कायाकल्प करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभाग के अभियंताओं और जिलाधिकारियों को संयुक्त रूप से निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के बैठने के लिए बेहतर स्थान के साथ-साथ बिजली की निर्बाध आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, आधुनिक व साफ-सुथरे शौचालय तथा पौष्टिक भोजन पकाने के लिए सुरक्षित किचन (रसोई घर) की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जब हमारे केंद्र बुनियादी सुविधाओं से संपन्न और खुशहाल होंगे, तभी नौनिहालों का शारीरिक और मानसिक विकास सही दिशा में हो सकेगा और तभी हम एक स्वस्थ और समर्थ उत्तराखंड के सपने को साकार कर सकेंगे।








