Uttarakhand SIR news In Hindi: उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के संबंध में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने सचिवालय में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में ‘अनकलेक्टेड श्रेणी’ के 8.39 लाख मतदाताओं के घर-घर सत्यापन, फार्म डिजिटाइजेशन की प्रगति, ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन और दावों व आपत्तियों के निस्तारण की पूरी समय-सीमा (टाइमलाइन) पर विस्तृत चर्चा की गई। जानिए उत्तराखंड मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 की पूरी जमीनी रिपोर्ट।
उत्तराखंड में लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (वोटर लिस्ट रिवीजन) कार्यक्रम के संबंध में बुधवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। प्रदेश के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय परिसर में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची के शुद्धिकरण पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों से ‘अनकलेक्टेड श्रेणी’ (Uncollected Category) में आने वाले मतदाताओं के घर-घर जाकर किए जा रहे भौतिक सत्यापन अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने की पुरजोर अपील की।
बैठक के एजेंडे और तकनीकी प्रगति को साझा करते हुए अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि (Eligibility Date) को मुख्य आधार मानते हुए वर्तमान में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत बीते 8 जून से शुरू होकर आगामी 7 जुलाई तक पूरे प्रदेश में गणना पत्रों के घर-घर वितरण और उनके शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य तेजी से पूर्ण किया जाना है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को जमीनी आंकड़ों से अवगत कराते हुए उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में कुल 79 लाख 60 हजार 762 पंजीकृत मतदाताओं के सापेक्ष 70 लाख 98 हजार 501 मतदाताओं के फॉर्म को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस पुनरीक्षण अभियान के सबसे महत्वपूर्ण पहलू यानी ‘अनकलेक्टेड श्रेणी’ के वोटरों का बिंदुवार विवरण भी बैठक में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में कुल 8 लाख 39 हजार 486 मतदाता ऐसे हैं जो तकनीकी व व्यावहारिक रूप से ”अनकलेक्टेड श्रेणी” के दायरे में शामिल हैं। मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाने के लिए इस श्रेणी का बारीक विश्लेषण किया गया है, जिसके अन्तर्गत राज्य में 1 लाख 23 हजार 836 मतदाता मृत पाए गए हैं, जबकि 4 लाख 77 हजार 148 मतदाता ऐसे हैं जो अपने मूल स्थान को छोड़कर स्थाई रुप से कहीं और शिफ्ट (विस्थापित) हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 61 हजार 764 मतदाता पहले से ही अन्य सूचियों में पंजीकृत हैं, 1 लाख 68 हजार 259 मतदाता लंबे समय से अपने क्षेत्रों से अनुपस्थित चल रहे हैं और 8 हजार 479 मतदाता अन्य विविध तकनीकी कारणों से इस विशेष श्रेणी का हिस्सा बने हैं। इन सभी को शामिल करते हुए अब तक कुल 79 लाख 45 हजार 658 मतदाताओं के डेटा को डिजिटाइजेशन के दायरे में ला दिया गया है।
चुनाव आयोग की ओर से आगे की विधिक और प्रशासनिक समय-सीमा (टाइमलाइन) को स्पष्ट करते हुए डॉ. जोगदंडे ने बताया कि आगामी 14 जुलाई 2026 को पूरे प्रदेश में एकीकृत ‘ड्राफ्ट रोल’ (प्रारूप मतदाता सूची) का आधिकारिक प्रकाशन कर दिया जाएगा। जनता और राजनीतिक दलों की सहूलियत के लिए 14 जुलाई से लेकर 13 अगस्त 2026 के बीच पूरे एक महीने का समय दिया गया है, जिसमें कोई भी नागरिक या दल सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के संबंध में अपने वैध दावे एवं आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद 14 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक नोटिस की वैधानिक अवधि और प्राप्त होने वाले सभी दावों व आपत्तियों का विभागीय स्तर पर पूरी तरह से विधिक निस्तारण किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं और फिल्टरेशन के पूरे होने के बाद, अंततः 15 सितंबर 2026 को उत्तराखंड की ‘अंतिम मतदाता सूची’ (Final Electoral Roll) का भव्य और आधिकारिक प्रकाशन कर दिया जाएगा, जो आने वाले चुनावों का मुख्य आधार बनेगी।

समीक्षा के अंतिम सत्र में, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी को रीढ़ की हड्डी बताते हुए उनसे एसआईआर प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर सहयोग की अपील की। उन्होंने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य के प्रत्येक पोलिंग बूथ पर अनिवार्य रूप से अपने शत-प्रतिशत ‘बूथ लेवल एजेंट्स’ (BLA) की नियुक्ति सुनिश्चित करें, ताकि जमीनी स्तर पर कोई विसंगति न रहे। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डेटा साझा किया कि वर्तमान में उत्तराखण्ड में कुल 11 हजार 733 पोलिंग बूथ (मतदान केंद्र) स्थापित हैं, जिनके सापेक्ष सजगता दिखाते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अब तक कुल 23 हजार 102 बीएलए (BLA) की मुस्तैदी से तैनाती की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन और राजनीतिक दलों के इस साझा प्रयास से उत्तराखंड की वोटर लिस्ट पूरे देश में सबसे शुद्ध और आदर्श बनकर उभरेगी।

गौर हो कि अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ0 विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में 1 जुलाई 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। 8 जून से 7 जुलाई तक प्रदेश में गणना पत्रों के वितरण और डिजिटाइज का कार्य पूर्ण होना है। उन्होंने राजनैतिक दलों को अवगत कराया कि प्रदेश में 79 लाख 60 हजार 762 मतदाताओं के सापेक्ष 70 लाख 98 हजार 501 मतदाताओं के फार्म डिजिटाइज कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 8 लाख 39 हजार 486 मतदाता ”अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। जिसके अन्तर्गत 1 लाख 23 हजार 836 मृत, 4 लाख 77 हजार 148 स्थाई रुप से शिफ्ट, 61764 पहले से पंजीकृत,1 लाख 68 हजार 259 अनुपस्थित और 8479 मतदाता अन्य कारणों से ”अनकलेक्टेड श्रेणी” में शामिल हैं। इस प्रकार कुल 79 लाख 45 हजार 658 मतदताओं को डिजिटाइज कर दिया गया है।







