Dehradun DM Surprise Inspection News: देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार रात ठीक 8:00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आईसीयू में बंद पड़े एसी, खाली स्टॉक रजिस्टर, फटे कंबल और गंदगी के अंबार पर गहरी नाराजगी जताते हुए डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एक लावारिस मरणासन्न मरीज के लिए देवदूत बनते हुए उन्होंने मौके पर ही उसकी जान बचाई और सीएमओ-सीएमएस की संयुक्त जांच समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है। जानिए इस पूरी ग्राउंड जीरो रिपोर्ट को।

जिलाधिकारी ने अचानक किया औचक निरीक्षण
देहरादून जनपद के सरकारी महकमों और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए लगातार धरातल पर उतरने वाले जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का एक बार फिर बेहद सख्त और मानवीय चेहरा सामने आया है। बुधवार की रात ठीक 8:00 बजे जब आम तौर पर सरकारी दफ्तर और अस्पतालों का प्रशासनिक अमला ढीला पड़ जाता है, तभी जिलाधिकारी ने अचानक जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) कर डाला। बिना किसी पूर्व सूचना के आधी रात को हुए इस औचक निरीक्षण से पूरे अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के भीतर वीआईपी दावों के विपरीत लापरवाही, गंदगी और घोर अव्यवस्थाओं की एक के बाद एक कई परतें खुलती चली गईं। इस बेहद बदतर और गैर-जिम्मेदाराना स्थिति पर भारी नाराजगी और आक्रोश व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने व्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) की एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित कर तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब अस्पताल की जमीनी हकीकत परखने के लिए सबसे पहले जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू (ICU) वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली और अमानवीय थी। जिस आईसीयू में गंभीर मरीजों के लिए तापमान नियंत्रित और स्वच्छ हवा अनिवार्य होती है, वहां मानक के विपरीत एयर कंडीशन (AC) पूरी तरह बंद पड़ा था। जून-जुलाई की इस भीषण उमस और सफोकेशन (घुटन) के कारण आईसीयू में वेंटिलेटर और बेड पर लेटे हुए लाचार मरीज बेहाल थे और पसीने से तर-बतर थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि मरीजों के परिजनों और स्टाफ द्वारा अस्पताल के पीआरओ (PRO) को कई बार कहने के बाद भी एसी को चालू कराने की जहमत नहीं उठाई गई थी। इस संवेदनहीनता को देखते हुए डीएम डॉ. आशीष चौहान का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही पीआरओ के खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए और इस पूरी ढिलाई पर सीएमएस से स्पष्टीकरण मांगा। अव्यवस्था यहीं नहीं रुकी; जब जिलाधिकारी ने सरकारी दावों को परखने के लिए आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर की जांच की, तो उसमें बीती 29 जून से जीवन रक्षक दवाओं का कोई विवरण दर्ज नहीं था। पूछताछ करने पर पता चला कि वार्ड की सिस्टर इंचार्ज बिना किसी पूर्व सूचना के आकस्मिक अवकाश पर गायब थीं और कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां और फर्जीवाड़ा पाया गया।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के अन्य हिस्सों जैसे बाल रोग कक्ष, पुरुष वार्ड, महिला वार्ड और सर्जरी वार्डों का हाल भी बेहद बदतर और दयनीय मिला। पुरुष वार्ड का निरीक्षण करते समय जिलाधिकारी की नजर लीवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज पर पड़ी, जिसे अस्पताल का स्टाफ जबरन हायर सेंटर रेफर करने की तैयारी कर रहा था। ड्यूटी डॉक्टर के पर्चे और मरीज की फाइलों की जांच करने पर डीएम ने पाया कि इस मरीज का इलाज इसी अस्पताल में बहुत आसानी से हो सकता था और उसे रेफर करने की कोई चिकित्सीय आवश्यकता नहीं थी। इस तरह अनावश्यक रूप से मरीजों को रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति पर जिलाधिकारी ने डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई और सख्त आपत्ति दर्ज की। इसी वार्ड में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब गंभीर मरीजों को ओढ़ने के लिए फटी-पुराने और बदबूदार कंबल दिए गए थे। इस पर डीएम ने अस्पताल की मैटर्न को तलब कर उनसे तत्काल लिखित स्पष्टीकरण मांगने और अस्पताल के सभी फटे व पुराने कंबलों को इसी वक्त कंडम (उपयोग से बाहर) घोषित करने का कड़ा आदेश सुनाया।
अस्पताल के भीतर स्वच्छता अभियान और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की भी जमकर धज्जियां उड़ी हुई पाई गईं। अस्पताल की मुख्य लिफ्ट में चारों तरफ गुटखे और पान की पीक थूकी हुई थी और भयंकर गंदगी पसरी थी। सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस लिफ्ट में सीसीटीवी (CCTV) कैमरा तक नहीं लगाया गया था, जिससे रात के समय महिला मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। इसके बाद जब जिलाधिकारी महिला शौचालय की तरफ बढ़े, तो वहां की अजीबोगरीब व्यवस्था देखकर वे दंग रह गए। महिला शौचालय के भीतर पुरुषों का यूरिनल पॉट लगा हुआ था, जिसे देखकर जिलाधिकारी ने अस्पताल के इंजीनियरिंग और प्रशासनिक तंत्र की सूझबूझ और इस घोर लापरवाही पर गहरी नाराजगी और शर्म व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
इस पूरे निरीक्षण के दौरान सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत और रक्षक बनकर पहुंचे। वार्ड के एक कोने में एक लावारिस मरीज बेहद नाजुक और मरणासन्न हालत में पड़ा हुआ था। अस्पताल के आधुनिक उपकरणों ने बताया कि उसका शुगर लेवल गिरकर 40 से भी कम हो चुका था, जो कि मेडिकल साइंस में किसी भी व्यक्ति के कोमा में जाने या मौत होने के लिए काफी है। इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद वार्ड के किसी भी डॉक्टर या नर्स ने उसकी सुध लेने की कोशिश नहीं की थी। मरीज के बेड के पास गंदगी का अंबार लगा हुआ था और मक्खियां भिनभिना रही थीं, जबकि पुरानी बासी खाने की प्लेटें वहीं सड़ रही थीं। जिलाधिकारी ने बिना वक्त गंवाए अपनी सक्रियता दिखाई और मौके पर मौजूद डॉक्टरों को निर्देश देकर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़वाई, जिससे उस लावारिस मरीज की जान समय रहते बचाई जा सकी। जिलाधिकारी के आने और प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही, डीएम के वार्ड में कदम रखने से महज पांच मिनट पहले पूरे अस्पताल में आनन-फानन में गीला पोछा लगाया जा रहा था ताकि कमियों को छिपाया जा सके, जिसे डीएम ने रंगे हाथों पकड़ लिया।
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कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों, प्रशासनिक ढिलाई और व्यवस्थागत खामियों को चौबीस घंटे के भीतर दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाली गरीब जनता के स्वास्थ्य और उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी दोबारा ढिलाई मिलने पर सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इस औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं वार्डों में भर्ती सामान्य और गंभीर मरीजों के बेड के पास जाकर उनसे सीधे बातचीत की, उनका कुशलक्षेम जाना और अस्पताल से मिल रही मुफ्त दवाओं व भोजन की सुविधाओं का निष्पक्ष फीडबैक भी लिया। इस पूरे हाई-वोल्टेज निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और सुरक्षाकर्मी पूरे समय सहमे हुए मौजूद रहे।
(For more news apart from Surprise inspection: DM furious over the poor condition of Coronation Hospital, strict instructions to improve the arrangements Latest News in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)







