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Earthquake News: उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके

On: June 27, 2026 6:24 PM
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Earthquake News: उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके
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Earthquake News: उत्तर भारत के बड़े हिस्से समेत दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में शनिवार शाम को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में आए 6.2 तीव्रता के इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र जमीन से 215 किलोमीटर की गहराई में था। जानिए इस भूकंप के वैज्ञानिक कारणों और उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में मची अफरा-तफरी की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।

शनिवार की ढलती शाम को उत्तर भारत के एक विशाल भूभाग में उस समय अचानक अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब दिल्ली-एनसीआर सहित पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में धरती तेज गति से डोल उठी। भारतीय समयानुसार (IST) शाम ठीक 7 बजकर 04 मिनट पर आए इस शक्तिशाली भूकंप के झटकों ने लोगों को हिलाकर रख दिया। गगनचुंबी इमारतों और बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों में रहने वाले लोगों को जब अपने पंखे, झूमर और घरेलू सामान तेजी से हिलते हुए दिखाई दिए, तो वे अपनी जान बचाने के लिए सीढ़ियों के रास्ते तुरंत खुले मैदानों और सड़कों की ओर भाग खड़े हुए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बेहद शक्तिशाली भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 6.2 मापी गई है, जिसका केंद्र भारत की सीमाओं से दूर पड़ोसी देश अफगानिस्तान के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में स्थित था।

भूकंप विज्ञानियों से प्राप्त सटीक तकनीकी और भौगोलिक आंकड़ों के अनुसार, इस बड़े भूकंपीय झटके का मुख्य केंद्र अक्षांश 36.442° उत्तर (36.442°N) तथा देशांतर 70.672° पूर्व (70.672°E) पर स्थित था, जो कि उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान में हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत आने वाले जुर्म शहर से लगभग 43 किलोमीटर दक्षिण का इलाका है। इस भूकंप की सबसे बड़ी और राहत देने वाली विशेषता इसकी गहराई रही। पृथ्वी की सतह से नीचे इसका हाइपोसेंटर (Focus) लगभग 215 किलोमीटर की अत्यधिक गहराई में स्थित था। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘डीप-फोकस अर्थक्वेक’ यानी गहरी परत का भूकंप कहा जाता है। यही मुख्य वजह है कि 6.2 जैसी विनाशकारी तीव्रता होने के बावजूद, इसके केंद्र बिंदु और भारत के मैदानी इलाकों में सतह पर कोई बड़ा जान-माल का नुकसान या इमारतों के ढहने जैसी दुखद संरचनात्मक तबाही की खबर सामने नहीं आई। हालांकि, इतनी अधिक गहराई के कारण ही भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves) हजारों किलोमीटर दूर तक फैल गईं और पूरे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को हिलाकर रख दिया।

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भूकंप के इन झटकों का सबसे व्यापक और तात्कालिक असर देश की राजधानी नई दिल्ली और उसके आस-पास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में देखने को मिला। शनिवार की शाम होने के कारण बड़ी संख्या में लोग बाजारों, मॉल और अपने घरों में सप्ताहांत (वीकेंड) मना रहे थे। अचानक जमीन हिलने के कारण बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट को तुरंत रोक दिया गया और सुरक्षा गार्डों की मदद से लोगों को सुरक्षित खुले स्थानों पर एकत्र किया गया। कुछ ही मिनटों के भीतर समूचा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप लोगों के अनुभवों, वीडियो और घबराहट भरे संदेशों से पूरी तरह से पट गया। दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ चंडीगढ़ ट्राईसिटी, जिसमें पंचकूला और मोहाली भी शामिल हैं, वहां भी झटके काफी लंबे समय यानी लगभग पांच से आठ सेकंड तक महसूस किए गए। ऊंची सोसायटियों में रहने वाले निवासियों ने बताया कि भूकंप की तरंगें इतनी स्पष्ट थीं कि बेड और सोफे पर बैठे लोगों को चक्कर आने जैसा अनुभव होने लगा था।


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पंजाब और हरियाणा के मैदानी जिलों जैसे लुधियाना, जालंधर, अंबाला और रोहतक में भी इस कंपन का व्यापक असर देखा गया। सीमावर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय जिलों में, जो पहले से ही संवेदनशील भूकंपीय जोन में आते हैं, वहां इस झटके ने लोगों को पुराने भयानक भूकंपों की याद दिलाकर डरा दिया। श्रीनगर, उधमपुर, शिमला और कांगड़ा घाटी में भी लोग घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह रही कि आपदा प्रबंधन विभागों (NDMA) और स्थानीय प्रशासनों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए सभी जिलों के पुलिस कप्तानों और प्रशासनिक अमले को अलर्ट पर डाल दिया। शुरुआती ग्राउंड रिपोर्ट और त्वरित निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली क्योंकि कहीं से भी किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या किसी बड़े पुल, बांध अथवा मकान के क्षतिग्रस्त होने की कोई सूचना दर्ज नहीं की गई है।

भू-वैज्ञानिकों और सीस्मोलॉजिस्ट्स के अनुसार, अफगानिस्तान का यह हिंदूकुश क्षेत्र दुनिया के सबसे खतरनाक और भूकंप के प्रति संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। यह क्षेत्र सीधे तौर पर भारतीय टेक्टोनिक प्लेट (Indian Plate) और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट (Eurasian Plate) के महा-टकराव की सीमा पर स्थित है। भारतीय प्लेट लगातार उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बहुत धीमी गति से यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘सबडक्शन’ कहा जाता है। इस निरंतर घर्षण और टकराव के कारण जमीन के भीतर एक भारी मात्रा में ऊर्जा जमा होती रहती है, जो समय-समय पर अचानक फाल्ट लाइनों के टूटने से भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर निकलती है। इसी भू-गर्भीय हलचल का नतीजा था कि शनिवार की शाम उत्तर भारत की धरती अचानक थरथरा उठी। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांत रहें, क्योंकि इतने गहरे भूकंपों के बाद बड़े और विनाशकारी आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आने की संभावना बहुत कम होती है।

भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय सही जानकारी और तुरंत लिया गया फैसला जान बचा सकता है।

1. भूकंप के दौरान (जब झटके महसूस हो रहे हों)

यदि आप इमारत के अंदर हैं, तो सबसे सुरक्षित तरीका है “Drop, Cover and Hold On” (झुकें, ढकें और पकड़ें):

  • Drop (झुकें): तुरंत अपने हाथों और घुटनों के बल जमीन पर बैठ जाएं। इससे आप गिरने से बचेंगे।
  • Cover (ढकें): किसी मजबूत मेज, डेस्क या भारी फर्नीचर के नीचे छिप जाएं ताकि सिर और गर्दन पर मलबा न गिरे। अगर आस-पास कोई मेज न हो, तो अपने हाथों से सिर को ढक लें और कमरे के किसी अंदरूनी कोने में बैठ जाएं।
  • Hold On (पकड़ें): जब तक झटके रुक न जाएं, उस फर्नीचर को मजबूती से पकड़े रहें।

इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें: भूकंप के समय बिजली कट सकती है और आप लिफ्ट में फंस सकते हैं। हमेशा सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करें।
  • खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें: कांच की खिड़कियों, अलमारी, भारी तस्वीरों या झूमर से दूर रहें, क्योंकि इनके गिरने से चोट लग सकती है।
  • बाहर भागने में जल्दबाजी न करें: अगर आप किसी बहुमंजिला इमारत में हैं, तो झटके रुकने से पहले बाहर भागना खतरनाक हो सकता है। मलबे का गिरना अक्सर इमारतों के बाहर ही ज्यादा होता है।

यदि आप बाहर (खुले में) हैं:

  • इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों, होर्डिंग्स और बिजली के खंभों व तारों से दूर किसी खुले स्थान पर चले जाएं।
  • जमीन पर बैठ जाएं और झटके रुकने का इंतजार करें।

2. भूकंप के बाद (झटके रुकने पर)

  • भवन से बाहर निकलें: झटके पूरी तरह रुकने के बाद सुरक्षित रूप से सीढ़ियों से इमारत से बाहर आएं।
  • आफ्टरशॉक्स (Aftershocks) के लिए तैयार रहें: मुख्य भूकंप के बाद भी छोटे झटके आ सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें।
  • गैस और बिजली की जांच करें: यदि आपको गैस लीक की गंध आए, तो तुरंत मुख्य वाल्व बंद कर दें। माचिस या मोमबत्ती न जलाएं, क्योंकि गैस लीक होने पर आग लग सकती है। टॉर्च का इस्तेमाल करें।
  • अफवाहों से बचें: रेडियो, टीवी या आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से केवल प्रामाणिक खबरों पर ही भरोसा करें।

3. पहले से क्या तैयारी रखें?

  • आपातकालीन किट (Emergency Kit): एक बैग में कुछ दिनों का पीने का पानी, सूखा भोजन, फर्स्ट-एड बॉक्स, टॉर्च, एक्स्ट्रा बैटरी, जरूरी दस्तावेज और कुछ पैसे तैयार रखें।
  • फर्नीचर को फिक्स करें: घर की भारी अलमारियों और शीशों को दीवारों के साथ मजबूती से फिक्स करवाएं ताकि वे भूकंप में गिरे नहीं।
  • सेफ स्पॉट (Safe Spot) पहचानें: परिवार के सभी सदस्यों को पता होना चाहिए कि घर के अंदर सबसे सुरक्षित जगह (जैसे मजबूत मेज के नीचे) कौन सी है।
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