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Uttarakhand Badrinath News: बद्रीनाथ धाम के कपाट कल सुबह 6:15 बजे खुलेंगे, 20 कुंतल फूलों से सजा धाम, CM धामी पहुँचे बद्रीनाथ

On: April 23, 2026 4:05 AM
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Uttarakhand Badrinath News: बद्रीनाथ धाम के कपाट कल सुबह 6:15 बजे खुलेंगे, 20 कुंतल फूलों से सजा धाम, CM धामी पहुँचे बद्रीनाथ
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Uttarakhand Badrinath News: गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब चारधाम यात्रा के अंतिम पड़ाव, बद्रीनाथ धाम के कपाट भी कल यानी 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार शाम को ही बद्रीनाथ धाम पहुँच चुके हैं। धाम पहुँचने पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, बीकेटीसी के सीईओ विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने उनका भव्य स्वागत किया।

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Photo – badrinath temple opening X

फूलों से महका ‘भू-वैकुंठ’

कपाट खुलने की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को लगभग 20 कुंतल फूलों से सजाया गया है, जिससे धाम की आभा देखते ही बन रही है। प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, आवास और भोजन के व्यापक इंतजाम किए हैं।

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photo मुख्यमंत्री शाम को बद्रीनाथ धाम पहुंचे

सुरक्षा और ट्रैफिक के लिए ‘बाइक सेक्टर’ प्लान

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

  • यातायात प्रबंधन: बद्रीनाथ मार्ग पर ट्रैफिक सुचारु रखने के लिए 12 विशेष बाइक सेक्टर बनाए गए हैं।
  • निगरानी: ये टीमें हर 15 किलोमीटर के दायरे में तैनात रहेंगी ताकि किसी भी जाम या आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

कल सुबह होगी पहली पूजा

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के अनुसार, कपाट खुलने की धार्मिक प्रक्रियाएँ शुरू हो चुकी हैं। तिमुण्डिया मेला, गरुड़ छाड़ और शंकराचार्य की डोली के प्रस्थान के बाद अब भक्तों को कल सुबह का इंतजार है। 23 अप्रैल को प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान बद्रीनाथ के कपाट खोल दिए जाएंगे।

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photo Shri Badarinath Dham

बद्रीनाथ धाम: धरती का बैकुंठ जहाँ स्वयं भगवान विष्णु करते हैं निवास

उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र ‘चार धामों’ में से एक है। हिमालय की गोद में नर और नारायण नामक दो पर्वतों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे “भू-वैकुंठ” (धरती का स्वर्ग) भी कहा जाता है।

1. पौराणिक इतिहास और नाम की उत्पत्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु इस स्थान पर कठोर तपस्या कर रहे थे। तपस्या के दौरान जब वे हिमपात और कड़ी धूप से घिरे थे, तब माता लक्ष्मी ने ‘बदरी’ (बेर) के पेड़ का रूप धारण कर उन्हें छाया प्रदान की। भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और कहा कि “आज से मुझे आपके साथ ‘बदरी के नाथ’ यानी बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा।”

एक अन्य मान्यता के अनुसार, यहाँ आदि गुरु शंकराचार्य ने नारद कुंड से भगवान विष्णु की शालिग्राम से बनी चतुर्भुज मूर्ति निकाली थी और उसे मंदिर में स्थापित किया था।

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2. मंदिर की वास्तुकला और स्वरूप

बद्रीनाथ मंदिर की वास्तुकला शंकुधारी शैली की है। मंदिर के तीन मुख्य भाग हैं:

  • गर्भगृह: जहाँ भगवान बद्रीनाथ की एक मीटर ऊँची काले पत्थर (शालिग्राम) की प्रतिमा है। इसमें भगवान ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं।
  • दर्शन मंडप: जहाँ भक्त पूजा-अर्चना करते हैं।
  • सभा मंडप: जहाँ श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

मंदिर के ठीक नीचे तप्त कुंड स्थित है। यह प्राकृतिक गर्म पानी का सोता है, जहाँ कड़ाके की ठंड में भी पानी गर्म रहता है। मान्यता है कि दर्शन से पहले यहाँ स्नान करना अनिवार्य है।


3. चारधाम यात्रा का महत्व

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख धामों (बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम) में बद्रीनाथ सबसे उत्तर में स्थित है। यह ‘छोटा चारधाम’ (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) का भी अंतिम पड़ाव माना जाता है। कहा जाता है कि—

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photo Shri Badarinath Dham

“जो जाए बदरी, वो ना आए ओदरी” (अर्थात् जो बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे दोबारा माता के गर्भ में नहीं आना पड़ता, उसे मोक्ष मिल जाता है।)


4. कपाट खुलने और बंद होने का समय

अत्यधिक बर्फबारी के कारण बद्रीनाथ धाम के कपाट साल में केवल 6 महीने (अप्रैल/मई से अक्टूबर/नवंबर तक) ही खुलते हैं।

  • शीतकाल: जब कपाट बंद होते हैं, तब भगवान की उत्सव मूर्ति को ‘जोशीमठ’ के नृसिंह मंदिर में लाया जाता है, जहाँ छह महीने उनकी पूजा होती है।
  • अखंड ज्योति: कपाट बंद होते समय मंदिर में एक घी का दीपक जलाया जाता है, जो छह महीने बाद कपाट खुलने पर भी जलता हुआ मिलता है।
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5. प्रमुख दर्शनीय स्थल (आस-पास)

  • माणा गाँव: भारत का पहला गाँव (पहले इसे आखिरी गाँव कहा जाता था), जो मंदिर से केवल 3 किमी दूर है।
  • व्यास गुफा: जहाँ माना जाता है कि महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना की थी।
  • वसुधारा जलप्रपात: एक अत्यंत सुंदर झरना जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका पानी पापियों के शरीर पर नहीं गिरता।
  • नीलकंठ पर्वत: जिसे ‘हिमालय का गढ़वाल रत्न’ कहा जाता है।

कैसे पहुँचें?

  • सड़क मार्ग: ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून से बद्रीनाथ के लिए बसें और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जौली ग्रांट (देहरादून) है। यहाँ से हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन योगनगरी ऋषिकेश और हरिद्वार हैं।

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