Char Dham Yatra Pilgrims Death Tolls Mdano News: देवभूमि उत्तराखंड में चल रही विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। यात्रा शुरू हुए अभी मात्र 25 दिन ही बीते हैं, लेकिन मौतों का आंकड़ा डराने लगा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 40 श्रद्धालुओं की अलग-अलग धामों में मृत्यु हो चुकी है। इनमें सबसे भयावह स्थिति बाबा केदारनाथ के धाम में देखी जा रही है, जहां अकेले 22 श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में भी मृतकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह स्थिति एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता और बढ़ती भीड़ इस चुनौती को और कठिन बना सकती है।
केदारनाथ धाम में मौतों का सर्वाधिक तांडव
केदारनाथ धाम की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य धामों की तुलना में काफी कठिन हैं। समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है। अब तक हुई 22 मौतों में से अधिकांश का कारण ‘कार्डियक अरेस्ट’ या दिल का दौरा पड़ना बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केदारनाथ की चढ़ाई अत्यधिक खड़ी है और कम समय में अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के कारण यात्रियों का शरीर वहां के वातावरण के अनुकूल (Acclimatize) नहीं हो पाता। इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप बढ़ जाता है और हृदय पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। मरने वालों में ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल हैं, जो पहले से ही किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे थे।
बद्रीनाथ और यमुनोत्री-गंगोत्री का भी हाल बेहाल
आंकड़ों पर गौर करें तो बद्रीनाथ धाम में अब तक 7 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई है, जबकि यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में भी कुल मिलाकर 11 लोगों की जान गई है। यमुनोत्री मार्ग पर भी चढ़ाई काफी कठिन है और संकरे रास्तों पर भीड़ के दबाव के कारण यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। प्रशासन ने हालांकि जगह-जगह ऑक्सीजन बूथ और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी संख्या के सामने ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई बार गंभीर स्थिति में मरीज को एयरलिफ्ट करने की नौबत आती है, लेकिन खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवाएं बाधित होने से समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है।
हाई एल्टीट्यूड और स्वास्थ्य परीक्षण की अनदेखी
चारधाम यात्रा में होने वाली इन मौतों के पीछे एक मुख्य कारण यात्रियों द्वारा अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करना है। कई श्रद्धालु बिना किसी डॉक्टरी सलाह या प्री-मेडिकल चेकअप के यात्रा पर निकल पड़ते हैं। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने बार-बार अपील की है कि जिन लोगों को हृदय रोग, मधुमेह या सांस की बीमारी है, वे पूरी सावधानी बरतें। पहाड़ों पर ‘हाई एल्टीट्यूड सिकनेस’ एक गंभीर समस्या है। जब कोई व्यक्ति अचानक मैदानी इलाकों से 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर पहुंचता है, तो उसके फेफड़ों में पानी भरने (HAPE) या मस्तिष्क में सूजन (HACE) की संभावना बढ़ जाती है। 25 दिनों के भीतर 40 मौतों का होना यह दर्शाता है कि यात्रियों के बीच जागरूकता की भारी कमी है।
प्रशासन की तैयारियां और स्वास्थ्य विभाग का बचाव
बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशालय ने गाइडलाइन्स को और सख्त कर दिया है। अब यात्रा मार्गों पर रैंडम स्वास्थ्य जांच की जा रही है और 55 साल से अधिक उम्र के यात्रियों की विशेष निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि सरकार ने इस बार पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की है, लेकिन कई बार श्रद्धालु अपनी बीमारी को छुपाकर यात्रा शुरू कर देते हैं। प्रशासन ने अब ऋषिकेश और हरिद्वार के एंट्री पॉइंट्स पर ही यात्रियों को जागरूक करने के लिए विशेष काउंटर स्थापित किए हैं। साथ ही, धामों में पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता को दोगुना कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुरक्षा और स्वास्थ्य सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, चारधाम यात्रा को केवल धार्मिक पर्यटन के रूप में नहीं बल्कि एक कठिन ट्रेकिंग के रूप में देखा जाना चाहिए। यात्रा पर जाने से पहले कम से कम एक महीने तक नियमित टहलना या योग करना आवश्यक है। यात्रा के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें और जितना हो सके धीरे-धीरे चढ़ाई करें। यदि रास्ते में थोड़ा भी सिरदर्द, चक्कर आना या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो तुरंत पास के मेडिकल रिलीफ सेंटर पर रिपोर्ट करें। साथ ही, शराब या कैफीन युक्त पदार्थों के सेवन से बचें क्योंकि ये शरीर को निर्जलित (Dehydrate) करते हैं। प्रशासन की सलाह है कि ‘फिट रहने पर ही यात्रा करें’ (Travel only if fit) के मंत्र को गंभीरता से लें।

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और आस्था का केंद्र है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। 25 दिनों में 40 मौतों का आंकड़ा एक अलार्म बेल की तरह है। आने वाले जून के महीने में जब भीड़ अपने चरम पर होगी, तब स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ेगा। सरकार को न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा, बल्कि यात्रियों के पंजीकरण के समय उनके स्वास्थ्य प्रमाणपत्र को अनिवार्य बनाने जैसे कड़े कदम उठाने पर भी विचार करना चाहिए। देवभूमि की यह यात्रा मंगलमय तभी होगी जब हर श्रद्धालु अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनेगा और प्रशासन सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं करेगा।







