Women’s ODI World Cup News In Hindi: महिला विश्व कप में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एलिसा हीली ने विशाखापत्तनम के मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ 77 गेंदों में 113* रनों की तूफानी शतकीय पारी खेलकर इतिहास रच दिया है। वे विश्व कप इतिहास में लगातार दो शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। फोबे लिचफील्ड के साथ 202 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी और अलाना किंग की कसी हुई गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 10 विकेट से धमाकेदार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया है।
महिला विश्व कप के रोमांचक सफर में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और दिग्गज सलामी बल्लेबाज एलिसा हीली ने अपनी अविश्वसनीय और प्रचंड फॉर्म को जारी रखते हुए विश्व क्रिकेट इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। विशाखापत्तनम के वाईएस राजशेखर रेड्डी क्रिकेट स्टेडियम की खूबसूरत पिच पर खेले गए एक महत्वपूर्ण मुकाबले में, कंगारू कप्तान ने बांग्लादेशी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए महज 77 गेंदों पर 113 रनों की एक बेहद आक्रामक और नाबाद शतकीय पारी खेली। हीली के इस विध्वंसक शतक की बदौलत गत चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बांग्लादेश पर 10 विकेट से एक बेहद एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की है। यह पारी उसी मैदान पर भारत के खिलाफ खेली गई उनकी 142 रनों की ऐतिहासिक पारी के ठीक बाद आई है। इस करिश्माई प्रदर्शन के साथ ही एलिसा हीली महिला विश्व कप के पूरे इतिहास में लगातार दो मैचों में दो शतक जड़ने वाली दुनिया की सबसे पहली क्रिकेटर बन गई हैं, जिसने उन्हें महानता के एक बिल्कुल नए शिखर पर पहुंचा दिया है।
इस मुकाबले में कप्तान एलिसा हीली का यह नाबाद शतक उनकी युवा और बेहद प्रतिभाशाली सलामी जोड़ीदार फ़ोबे लिचफ़ील्ड के साथ हुई रिकॉर्ड तोड़ 202 रनों की अटूट ओपनिंग साझेदारी का एक मुख्य हिस्सा था। लिचफील्ड ने भी कप्तान का बखूबी साथ निभाते हुए मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स लगाए और अपनी टीम के लिए नाबाद 84 रनों का एक बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन दोनों खब्बू और दाएं हाथ के बल्लेबाजों के बीच हुई इस महा-साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया को महिला विश्व कप के इतिहास में बिना कोई विकेट खोए अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल करने का एक नया कीर्तिमान स्थापित करने में मदद की। इसके साथ ही यह जादुई आंकड़ा महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ODI) क्रिकेट के इतिहास में रनों का पीछा करते हुए बिना किसी नुकसान के हासिल की गई दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी भी बन गई है। इस धमाकेदार और एकतरफा जीत ने ऑस्ट्रेलिया को न केवल नेट रन रेट में भारी फायदा पहुंचाया है, बल्कि वे अंक तालिका में अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर काबिज हो गए हैं और इसके साथ ही उन्होंने सेमीफाइनल में अपनी जगह पूरी तरह से पक्की कर ली है।
इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश की टीम को विशाखापत्तनम की पिच पर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की कसी हुई लाइन और लेंथ के सामने रन बनाने के लिए शुरुआत से ही काफी संघर्ष करना पड़ा। बांग्लादेश की स्टार बल्लेबाज शोभना मोस्टरी ने एक छोर संभालते हुए जुझारू खेल दिखाया और अपनी टीम के लिए नाबाद 66 रनों की एक बेहद सराहनीय पारी खेली, लेकिन उनके इस प्रयास के बावजूद टीम कभी भी मैच में वांछित गति और लय हासिल नहीं कर सकी। ऑस्ट्रेलिया की फिरकी गेंदबाज अलाना किंग की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण ने मेहमान टीम को निर्धारित ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर महज 198 रनों के मामूली स्कोर पर रोक दिया। अलाना किंग ने अपने 10 ओवरों के बेहद कड़े और किफायती स्पेल में चार ओवर मेडन फेंकते हुए केवल 18 रन खर्च किए और दो सबसे महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जिसके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बाद में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ के सम्मान से नवाजा गया। उनके अलावा टीम की चतुर लेग स्पिनर जॉर्जिया वेयरहैम ने भी उनका बखूबी साथ निभाते हुए अपने सात ओवरों के कोटे में केवल 22 रन देकर 2 महत्वपूर्ण सफलताएं अर्जित कीं।
हालांकि, इस बड़ी और ऐतिहासिक जीत के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए सब कुछ पूरी तरह से सही और मुकम्मल नहीं कहा जा सकता। कुल मिलाकर एक बेहद मजबूत और कसी हुई गेंदबाजी प्रदर्शन के बावजूद, इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया का क्षेत्ररक्षण (फील्डिंग) उनके अपने स्थापित विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप बिल्कुल भी नहीं रहा। अमूमन मैदान पर चीते जैसी फुर्ती दिखाने वाली कंगारू टीम ने इस मैच के दौरान कुल छह कैच छोड़े, जो किसी भी बड़ी टीम के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने एक बेहद करीबी और महत्वपूर्ण एलबीडब्ल्यू (LBW) की अपील पर रिव्यू न लेकर एक बड़ा मौका भी गंवा दिया। ऑस्ट्रेलियाई टीम की इस सुस्त फील्डिंग और ढीली गेंदबाजी का फायदा उठाकर बांग्लादेश ने मैच के आखिरी तीन ओवरों में ताबड़तोड़ 28 रन बटोरे, जिनमें से ज्यादातर रन शोभना मोस्टरी की आक्रामक और साहसिक बल्लेबाजी के खाते में गए। हालांकि, बांग्लादेश का कुल स्कोर इतना कम था कि इन मानवीय चूकों और कमियों ने अंततः मैच के अंतिम परिणाम पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डाला।
जब ऑस्ट्रेलिया की टीम 199 रनों के इस लक्ष्य का पीछा करने मैदान पर उतरी, तो कप्तान एलिसा हीली और फ़ोबे लिचफील्ड ने शुरू से ही बांग्लादेशी गेंदबाजों पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। दोनों ही बल्लेबाजों ने मैदान पर कदम रखते ही अपने आक्रामक इरादे साफ कर दिए थे, जिसके चलते पहले पावरप्ले (शुरुआती 10 ओवर) के खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया ने बिना किसी नुकसान के 78 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया था। हीली ने विशेष रूप से ऑफ साइड के क्षेत्र में कई खूबसूरत और कड़क बाउंड्री लगाईं, जिसे देख स्टेडियम में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। दोनों ओपनर्स ने पूरे मैच के दौरान अपनी रन बनाने की गति और लय को एक पल के लिए भी धीमा नहीं होने दिया और कई ओवर शेष रहते ही अपनी टीम को एक ऐतिहासिक और यादगार जीत दिला दी, जिसने विपक्षी टीमों के खेमे में अभी से खौफ पैदा कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया के लिए सब कुछ सही नहीं है
कुल मिलाकर मज़बूत गेंदबाज़ी के बावजूद, ऑस्ट्रेलिया का क्षेत्ररक्षण उतना अच्छा नहीं रहा। उन्होंने छह कैच छोड़े, एक अहम अपील भी गंवाई, और आखिरी तीन ओवरों में 28 रन दिए, जिनमें से ज़्यादातर मोस्टरी की आक्रामक बल्लेबाज़ी की भेंट चढ़ गए। हालाँकि, इन कमियों ने अंततः परिणाम को प्रभावित नहीं किया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए, हीली और लिचफील्ड ने तेज़ी से रन बनाए और पहले पावरप्ले के अंत तक बिना किसी नुकसान के 78 रन बना लिए। दोनों बल्लेबाज़ों ने ज़बरदस्त इरादे दिखाए, हीली ने ऑफ़ साइड में कई खूबसूरत बाउंड्री लगाईं। दोनों ने पूरे समय अपनी लय बनाए रखी और ज़्यादा ओवर रहते जीत पक्की कर दी।
इस शानदार जीत से टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया की स्थिति और मजबूत हो गई है, क्योंकि अब वे अगले मैच में इंग्लैंड से भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
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