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Rudraprayag JCB News: केदारघाटी में मंदाकिनी का तांडव, नदी में फंसी JCB

On: July 4, 2026 4:33 PM
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Rudraprayag JCB News: केदारघाटी में मंदाकिनी का तांडव, नदी में फंसी JCB
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Rudraprayag JCB News: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग स्थित केदारघाटी में शनिवार को अचानक मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से गंगानगर क्षेत्र में एक जेसीबी और उसके दो कर्मचारी नदी के तेज बहाव के बीचों-बीच फंस गए। सिंगोली-भटवारी जल विद्युत परियोजना के कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने और ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के कारण यह आपातकालीन स्थिति पैदा हुई। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से एक बेहद कड़े और साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देकर दोनों जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जानिए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

उत्तराखंड में मानसून की आमद के साथ ही पहाड़ी नदियां और उफनते नाले आम जनजीवन के साथ-साथ धरातल पर काम कर रहे श्रमिकों के लिए भी अग्निपरीक्षा साबित होने लगे हैं। देवभूमि के रुद्रप्रयाग जनपद के अंतर्गत आने वाली केदारघाटी से शनिवार को एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया, जहां पहाड़ों में हो रही मूसलाधार बारिश और जल विद्युत परियोजना के बैराज से अचानक छोड़े गए पानी के चलते मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया। इस अचानक आए जलस्तर के उफान के कारण नदी के बीचों-बीच काम कर रही एक भारी-भरकम जेसीबी मशीन और उसे संचालित कर रहे दो कर्मचारी देखते ही देखते पानी के तेज और जानलेवा बहाव के चक्रव्यूह में फंस गए। चारों तरफ से घिर चुके पानी के बीच टापू पर तब्दील हो चुकी जेसीबी पर सवार इन दोनों कर्मचारियों की सांसें अटक गईं। घटना की भनक लगते ही पूरे इलाके में चीख-पुकार और हड़कंप मच गया। इसके बाद मौके पर पहुंचे एसडीआरएफ (SDRF) और जल पुलिस के जांबाजों ने बिना एक पल गंवाए उफनती नदी की लहरों को चुनौती देते हुए एक बेहद हैरतअंगेज और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया और दोनों जिंदगियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर खींच निकाला।

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photo- रुद्रप्रयाग मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से जेसीबी फंस गया

इस पूरे रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में पिछले चौबीस घंटों से लगातार हो रही भारी और मूसलाधार बारिश रही। शनिवार को केदारनाथ संभाग और उसके आस-पास के कैचमेंट एरिया में अत्यधिक पानी बरसने के कारण नदियों का जलस्तर पहले से ही उफान पर था। इसी बीच, केदारघाटी में संचालित सिंगोली-भटवारी जल विद्युत परियोजना के प्रबंधन द्वारा तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए ‘कुंड बैराज’ के फाटकों को खोलकर अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर छोड़ दिया गया। बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छूटते ही मंदाकिनी नदी का जलस्तर कुछ ही मिनटों के भीतर कई फीट ऊपर उठ गया और नदी की शांत दिख रही लहरें उफनती हुई लहरों में बदल गईं। दुर्भाग्यवश, ठीक इसी समय गंगानगर क्षेत्र के पास मंदाकिनी नदी के तटीय हिस्से और बीच की धारा में एक जेसीबी मशीन विकासात्मक कार्यों या मलबा हटाने के काम में जुटी हुई थी। नदी का बहाव इतनी तेजी से बढ़ा कि जेसीबी के चालक और उसके सहयोगी को पीछे हटने या सुरक्षित किनारे पर आने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते उनकी विशालकाय मशीन पानी के भयानक और तेज वेग के बीच फंसी नजर आने लगी।

नदी की मुख्य धारा के बीच मूसलाधार बारिश और उफनते पानी के बीच दो इंसानी जिंदगियों के फंसे होने की यह बेहद संवेदनशील और डरा देने वाली सूचना शनिवार, 4 जुलाई को रुद्रप्रयाग स्थित ‘जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र’ (कंट्रोल रूम) को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और आपदा प्रबंधन की गाइडलाइन के तहत बिना एक सेकंड का भी वक्त जाया किए वायरलेस सेटों को सक्रिय कर दिया। प्रशासन ने तुरंत घटना स्थल के सबसे नजदीकी बेस पर तैनात राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), स्थानीय जल पुलिस (फ्लड रेस्क्यू टीम) तथा अगस्त्यमुनि नगर पंचायत के प्रशासनिक अधिकारियों व गोताखोरों की संयुक्त टीम को आवश्यक लाइफ जैकेट, रस्सियों और राफ्टिंग बोट के साथ तत्काल मौके के लिए रवाना कर दिया।

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जब रेस्क्यू टीमें गंगानगर क्षेत्र में मंदाकिनी नदी के तट पर पहुंचीं, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। नदी की मटमैली और प्रचंड लहरें जेसीबी के टायरों को पार करते हुए उसके केबिन तक पहुंचने को बेताब दिख रही थीं और पानी की भीषण गूंज के बीच मशीन पर फंसे दोनों युवक डरे-सहमे मदद की गुहार लगा रहे थे। किनारों पर स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा थी, जो लाचार होकर भगवान केदारनाथ से उनकी कुशलता की प्रार्थना कर रही थी। नदी का बहाव इतना तेज था कि सामान्य रूप से पानी में उतरना सीधे मौत को दावत देने जैसा था। ऐसे में एसडीआरएफ के कमांडो और जल पुलिस के कुशल तैराकों ने अपनी वैज्ञानिक सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय दिया।

बचाव दल के जांबाजों ने सबसे पहले नदी के इस पार से उस पार तक एक बेहद मजबूत और विशेष ‘हाई-लाइन रेस्क्यू रोप’ (राफ्टिंग रस्सी) को बांधकर एक पक्का सुरक्षा घेरा तैयार किया। इसके बाद, उफनते पानी के थपेड़ों के बीच एक जांबाज जवान लाइफ जैकेट पहनकर और रस्सी के सहारे सूझबूझ से कदम आगे बढ़ाते हुए बीच धारा में फंसी जेसीबी तक पहुंचने में कामयाब रहा। उसने सबसे पहले जेसीबी के केबिन में डरे हुए बैठे चालक और उसके सहयोगी को ढाँढस बंधाया और उन्हें पानी के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए तुरंत हाई-क्वालिटी लाइफ जैकेट पहनाईं। इसके बाद, अत्यंत सावधानी बरतते हुए एक-एक कर दोनों कर्मचारियों को जीवन रक्षक रस्सियों और हार्नेस के सहारे बांधा गया और किनारे पर मौजूद रेस्क्यू टीम के अन्य सदस्यों ने अपनी पूरी ताकत से रस्सियों को खींचते हुए दोनों को नदी के उस काल बन चुके तेज बहाव के बीच से निकालकर सुरक्षित और सूखे स्थान पर पहुंचा दिया।

सुरक्षित किनारे पर कदम रखते ही दोनों कर्मचारियों की आंखों से आंसू छलक पड़े और उन्होंने अपनी जान बचाने वाले एसडीआरएफ और जल पुलिस के जवानों का हाथ जोड़कर नम आंखों से आभार व्यक्त किया। जिला प्रशासन और नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के अधिकारियों ने तुरंत दोनों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया, जहां वे पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित पाए गए। इस बेहद सफल और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन की खबर जैसे ही रुद्रप्रयाग मुख्यालय और शासन तक पहुंची, वरिष्ठ अधिकारियों ने रेस्क्यू टीम के अदम्य साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन आपसी तालमेल (टीमवर्क) की खुले दिल से सराहना की। जिला प्रशासन ने इस घटना के बाद एक बार फिर केदारघाटी और मंदाकिनी व अलकनंदा नदियों के तटों पर काम करने वाली सभी निर्माणदायी संस्थाओं, ठेकेदारों और मजदूरों को सख्त हिदायत जारी की है कि वे मानसून के इस दौर में मौसम विभाग की चेतावनियों और बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी के अलर्ट को कतई हल्के में न लें। नदी के भीतर या उसके बेहद नजदीक किसी भी मशीनरी को उतारने से पहले सुरक्षा के सभी मानकों का शत-प्रतिशत पालन किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति या जनहानि के खतरे को पूरी तरह से रोका जा सके।

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