Kailash Mansarovar Yatra News: उत्तराखंड से संचालित पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ रविवार को टनकपुर से हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदा पर्यटक आवास गृह, से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और सभी श्रद्धालुओं की सफल यात्रा की कामना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक छोलिया नृत्य से स्वागत किया गया तथा पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं का रुद्राक्ष की माला एवं भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया और उनसे आत्मीय संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही किसी श्रद्धालु को इस पवित्र यात्रा का अवसर प्राप्त होता है। यात्रा के दौरान आने वाली प्रत्येक चुनौती का सामना श्रद्धा और धैर्य के साथ करना चाहिए, क्योंकि शिव में अटूट विश्वास ही सभी कठिनाइयों को सरल बना देता है।
उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत क्षेत्रों के लिए विकास और समृद्धि का माध्यम भी है। यह यात्रा सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवन से देशभर के लोगों को जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीद कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देशभर में प्राचीन मंदिरों का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी की सुखद एवं सफल यात्रा की प्रार्थना की।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भी राज्य सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की। सातवीं बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु श्री अनिल कुमार जैन सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए बेहतर प्रबंध किए गए हैं।
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शनिवार सायंकाल टनकपुर पहुंचे प्रथम दल का देवभूमि की परंपरा के अनुरूप छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं।
शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रथम दल में चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष एवं 15 महिला श्रद्धालु हैं। दल में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के श्रद्धालु सम्मिलित हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

दल के साथ तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार चिकित्सक के रूप में शामिल हैं। राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल दल के सबसे वरिष्ठ तीर्थयात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं। यह यात्रा सभी आयु वर्ग के लोगों की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है। इससे सीमांत जनपद चम्पावत को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिली है तथा स्थानीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन, होटल व्यवसाय एवं रोजगार के अवसरों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिल रहा है।
हर-हर महादेव एवं बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान टनकपुर में प्रथम दल के प्रस्थान के साथ ही पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि सत्कार की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।
ऐतिहासिक कैलाश मानसरोवर यात्रा
सनातन धर्म और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना के सबसे बड़े केंद्र कैलाश मानसरोवर यात्रा का आधिकारिक आगाज़ हो चुका है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाए जाने के साथ ही देश भर के शिव भक्तों में भारी उत्साह है। विदेश मंत्रालय द्वारा कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ के माध्यम से चुने गए तीर्थयात्रियों, लिपुलेख और नाथुला दर्रे की नई सड़क व्यवस्था, चीन (तिब्बत) के कड़े नियमों तथा सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर आधारित इस विशेष न्यूज़ आर्टिकल में जानिए कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की पूरी जमीनी हकीकत।
कैलाश पर्वत और अलौकिक मानसरोवर झील की पावन यात्रा का शंखनाद
विश्व के सबसे प्राचीन और अलौकिक आध्यात्मिक स्थलों में शुमार भगवान शिव के पवित्र निवास स्थान कैलाश पर्वत और अलौकिक मानसरोवर झील की पावन यात्रा का शंखनाद हो चुका है। देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले चंपावत के टनकपुर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच तीर्थयात्रियों के पहले आधिकारिक जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वर्ष की यात्रा को लेकर देश भर के शिव भक्तों में एक अलग ही उमंग और उत्साह देखने को मिल रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि देश की 1.4 अरब आबादी में से केवल कुछ चुनिंदा भाग्यशाली मेधावियों को ही साक्षात महादेव के द्वार पर शीश नवाने का यह दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने सभी यात्रियों की सुखद, सुगम और सुरक्षित यात्रा की कामना करते हुए कहा कि यह तीर्थयात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की सांस्कृतिक अखंडता, राष्ट्रीय सद्भाव और सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास का एक बहुत बड़ा और मजबूत स्तंभ है।

इस वर्ष विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा को अत्यधिक पारदर्शी, आधुनिक और सुगम बनाने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की देखरेख में कम्प्यूटरीकृत ड्रॉ के माध्यम से देश भर से करीब एक हजार भाग्यशाली श्रद्धालुओं का चयन किया गया है, जिन्हें कुल 20 अलग-अलग जत्थों (बैचों) में विभाजित कर तिब्बत (चीन) भेजा जा रहा है। इस बार की यात्रा की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक राहत यह है कि भारत सरकार के सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों तक सड़कों का जाल बिछा दिए जाने के कारण पुराने कठिन और हफ्तों लंबे पैदल ट्रैकिंग मार्गों को पूरी तरह से सुगम मोटर मार्गों में तब्दील कर दिया गया है। इससे अब यात्रियों को पहाड़ों के बीच बेहद कम पैदल चलना पड़ेगा, जिससे बुजुर्ग और शारीरिक रूप से मध्यम क्षमता वाले श्रद्धालु भी आसानी से बाबा भोलेनाथ के साक्षात दर्शन कर सकेंगे।








