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Uttrakhand News: मुख्य सचिव ने की पीएम द्वारा शिलान्यास किए प्रोजेक्ट्स की समीक्षा, गतिमान प्रोजेक्ट्स की जांची प्रगति

On: June 30, 2026 4:12 PM
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Uttrakhand News: मुख्य सचिव ने की पीएम द्वारा शिलान्यास किए प्रोजेक्ट्स की समीक्षा, गतिमान प्रोजेक्ट्स की जांची प्रगति
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Uttrakhand News In Hindi: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास की गई 40 गतिमान बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा की। जागेश्वर धाम, महासू देवता हनोल, लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना, देहरादून सीवरेज सिस्टम और पीएमजीएसवाई की सड़कों-पुलों को मानसून के दौरान लगातार मॉनिटरिंग कर इस वर्ष के अंत तक पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जानिए उत्तराखंड के विकास की रफ्तार पर आधारित यह पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

उत्तराखंड के विकास को एक नई और अभूतपूर्व गति देने के लिए राज्य प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्र सरकार के विशेष सहयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत प्रदेश में चल रहे बड़े बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी सिलसिले में उत्तराखंड के नवनियुक्त मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को राजधानी देहरादून स्थित सचिवालय परिसर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किए गए विभिन्न ऐतिहासिक और रणनीतिक प्रोजेक्ट्स की धरातलीय प्रगति की समीक्षा करना था। मुख्य सचिव ने राज्य के भीतर वर्तमान में गतिमान सभी 40 बड़ी महा-परियोजनाओं के कार्यों की विभागवार और बिंदुवार विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लेट-लतीफी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी अधिकारी पूरी जवाबदेही के साथ काम करें।

सचिवालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा, शहरी विकास, पेयजल और पर्यटन जैसे तमाम बड़े विभागों के शासन स्तर के सचिव और विभागाध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी संबंधित सचिवों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि वे केवल मुख्यालय में बैठकर रिपोर्ट न लें, बल्कि इन सभी 40 प्रोजेक्ट्स की स्वयं नियमित और जमीनी स्तर पर समीक्षा करें। इसके साथ ही, उन्होंने पारदर्शिता और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए सभी परियोजनाओं की साप्ताहिक और पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट को नियमित रूप से निर्धारित सरकारी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रोजेक्ट की प्रगति को पोर्टल पर अपडेट करते समय इस बात का विशेष और स्पष्ट उल्लेख किया जाए कि परियोजना के पूर्ण होने की वास्तविक और संशोधित तिथि क्या है। उन्होंने विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि चूंकि इस वर्ष के अंत में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे होने वाले हैं, इसलिए आगामी मानसून सीजन की व्यावहारिक कठिनाइयों और भारी बारिश की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अभी से लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि मौसम की वजह से विकास की रफ्तार पर कोई ब्रेक न लगे।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजने वाले पर्यटन प्रोजेक्ट्स पर मुख्य सचिव का विशेष फोकस रहा। उन्होंने पर्यटन विभाग के अंतर्गत आने वाले जौनसार-बावर क्षेत्र के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक ‘महासू देवता मंदिर हनोल’ में चल रहे समग्र बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण कार्यों तथा कुमाऊं मंडल के ऐतिहासिक ‘जागेश्वर धाम मंदिर’ से संबंधित कायाकल्प के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन दोनों ही आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए इन प्रोजेक्ट्स की प्रतिदिन के आधार पर विभागीय स्तर पर समीक्षा की जाए और निर्धारित की गई समय-सीमा (डेडलाइन) के भीतर ही सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराया जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजधानी के नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए शहरी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित हो रहे देहरादून शहर के व्यापक जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और जल निकासी (ड्रैनेज) प्रणाली के विकास कार्यों को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर चल रहे इस खुदाई के काम से जनता को परेशानी न हो, इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और रूट डायवर्जन का सही पालन कराया जाए।

राज्य की आर्थिक और औद्योगिक रीढ़ माने जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ऊर्जा विभाग के आला अधिकारियों को कई बड़े प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने यमुना नदी पर बनने वाली देश की बेहद महत्वाकांक्षी ‘लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना’ (300 मेगावाट) के निर्माण कार्यों की गति को बढ़ाने को कहा, जो राज्य के लिए बिजली और पानी का एक बड़ा स्रोत बनेगी। इसके साथ ही, उन्होंने सीमांत क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले 220 केवी बनबसा सबस्टेशन (100 एमवीए) और उससे जुड़ी लंबी ट्रांसमिशन लाइनों के काम में तेजी लाने की हिदायत दी। मुख्य सचिव ने चमोली जिले में निर्माणाधीन 400 केवी पिपलकोटी स्विचिंग सबस्टेशन और टिहरी गढ़वाल जिले के घनसाली में बन रहे 220 केवी घनसाली सबस्टेशन के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने बिजली विभाग के अफसरों से कहा कि तय टाइमलाइन के अनुरूप यदि कहीं फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन भूमि स्वीकृति) या निजी व सरकारी भूमि हस्तांतरण से संबंधित मामले लंबित हैं, तो शासन स्तर और कोर्ट के स्तर पर उनकी लगातार प्रभावी पैरवी (फॉलोअप) की जाए और फाइलों को अटकने न दिया जाए।

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बैठक के अंतिम चरण में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को एक बेहद व्यावहारिक रणनीति अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य लगभग पूरा होने की कगार पर है या जो अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं, ऐसे प्रोजेक्ट्स को विभाग सबसे पहली प्राथमिकता पर लेते हुए फिनिशिंग टच दें और उन्हें शीघ्र चालू कराएं ताकि जनता को उनका लाभ तुरंत मिलना शुरू हो सके। उदाहरण के रूप में उन्होंने राज्य के सभी 13 जनपदों के ग्रामीण इलाकों के लिए संचालित हो रही 73 बड़ी पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं का जिक्र किया, जो हर घर जल मिशन का हिस्सा हैं। इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही 133 ग्रामीण सड़कों, जिनका 96 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, और 151 महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण कार्य को, जो 97 प्रतिशत तक मुकम्मल हो चुके हैं, इसी महीने के भीतर शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत उधमसिंहनगर जनपद में चल रहे नदी पुनर्जीवन और घाट निर्माण के कार्यों (98 प्रतिशत पूर्ण) को भी तुरंत अंतिम रूप देने को कहा। मुख्य सचिव ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के इन विजनरी प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में सबसे बड़ा और युगांतकारी कदम साबित होगा।

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