Uttarakhand Fire Safety Audit News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाए।
लखनऊ हादसे में गई 15 की जान
गौर हो कि लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में 15 लोगों की मौत के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी कोचिंग सेंटरों, होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों के निरीक्षण के आदेश दिए हैं ताकि सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। पुलिस, अग्निशमन विभाग और जिला अधिकारियों ने राज्य भर के कोचिंग संस्थानों और होटलों पर छापेमारी की है। ऐसे में अब उत्तराखण्ड सरकार भी इसको लेकर सख्त होती नजर आ रही है।
प्रदेश में अगर किसी भी तरह की लापरवाही पाई गई तो प्रशासन और सरकार की और से कार्रवाई की जाएगी। गौर हो कि अक्सर इस तरह की घटनाओं के बाद इन लापरवाहियों के बारे में जानकारी उजागर होती है। जिसको लेकर अब सरकार ने इस मुद्दे को लेकर गंभीर होने की बात कही है। जिसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त हिदायते दी है ताकि अगर किसी भी तरह की लापरवाही मिले तो उस पर कार्रवाई हो सके।
फायर सेफ्टी ऑडिट क्या है
फायर सेफ्टी ऑडिट किसी भी इमारत, परिसर या औद्योगिक इकाई का एक गहन और व्यवस्थित मूल्यांकन होता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना होता है कि उस विशेष स्थान पर आग लगने की कितनी आशंका है और यदि किसी कारणवश आग लग जाए, तो उससे निपटने के लिए वहां क्या तैयारियां हैं। इस प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा विशेषज्ञ इमारत के पूरे ढांचे, वहां मौजूद बिजली के उपकरणों, ज्वलनशील पदार्थों के रख-रखाव और आपातकालीन निकास मार्गों की बारीकी से जांच करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो यह किसी भवन की अग्नि सुरक्षा का एक विस्तृत हेल्थ चेकअप है, जो संभावित खतरों को समय रहते पहचानकर उन्हें दूर करने का सुझाव देता है।
Lucknow coaching centre fire News: लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग का तांडव, 15 लोगों की मौत
सुरक्षा और जीवन की रक्षा के लिए इसकी अनिवार्यता
आग की दुर्घटनाएं न केवल करोड़ों रुपये की संपत्ति को खाक कर देती हैं, बल्कि कई मासूम जिंदगियों को भी लील लेती हैं। फायर सेफ्टी ऑडिट इसलिए जरूरी है क्योंकि यह दुर्घटना होने से पहले ही उसके कारणों को खत्म करने में मदद करता है। किसी भी बहुमंजिला इमारत, अस्पताल, स्कूल या मॉल में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी होती है। ऐसे स्थानों पर यदि अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) खराब हों या आपातकालीन द्वार बंद हों, तो आपदा के समय भगदड़ मच सकती है। ऑडिट के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी सुरक्षा उपकरण हर समय चालू स्थिति में रहें, जिससे न केवल मानवीय जीवन सुरक्षित रहता है बल्कि व्यापार और संपत्ति को होने वाले भारी नुकसान से भी बचा जा सकता है।
कानूनी बाध्यता और बीमा संबंधी लाभ
आधुनिक नियमों के अनुसार व्यावसायिक और सार्वजनिक इमारतों के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट करवाना एक कानूनी आवश्यकता बन चुका है। भारत में राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) और विभिन्न राज्यों के अग्नि शमन सेवा अधिनियमों के तहत समय-समय पर ऑडिट कराना अनिवार्य है। यदि कोई संस्थान इसका पालन नहीं करता है, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ सकता है या उसका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। इसके अलावा, बीमा कंपनियों के दृष्टिकोण से भी यह बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकांश बीमा कंपनियां किसी भी अप्रिय घटना के बाद क्लेम पास करने से पहले यह देखती हैं कि क्या इमारत का फायर ऑडिट नियमित रूप से हुआ था। एक वैध ऑडिट रिपोर्ट होने पर बीमा प्रीमियम में भी छूट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया
इस ऑडिट को करवाने और सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए सबसे पहले किसी मान्यता प्राप्त या सरकार द्वारा प्रमाणित फायर सेफ्टी कंसलटेंट या एजेंसी से संपर्क करना होता है। यह विशेषज्ञ टीम आपके परिसर का दौरा करती है और एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार करती है, जिसमें कमियों और सुधारों का जिक्र होता है। इसके बाद, भवन मालिक को उन सभी कमियों को दूर करना होता है, जैसे नए अग्निशामक यंत्र लगाना, स्प्रिंकलर सिस्टम को ठीक करना और निकास मार्गों को साफ करना। सुधार कार्य पूरे होने के बाद, स्थानीय अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) में आवेदन सबमिट किया जाता है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) या उनके प्रतिनिधि परिसर का अंतिम निरीक्षण करते हैं, और सब कुछ मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) यानी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त करना और सुधार कार्य
कंसलटेंट की रिपोर्ट के आधार पर आपको अपनी इमारत में जरूरी सुधार करने होते हैं। इसमें खराब पड़े फायर एक्सटिंग्विशर को बदलना या रीफिल कराना, स्प्रिंकलर और फायर अलार्म सिस्टम को चालू करना, रास्तों से रुकावटें हटाना और साइनबोर्ड (Exit Signs) लगाना शामिल है। इसके साथ ही, वहां काम करने वाले स्टाफ को इन उपकरणों को चलाने की बेसिक ट्रेनिंग (Mock Drill) भी दी जाती है।
सरकारी पोर्टल पर आवेदन और अंतिम एनओसी प्राप्त करना
जब सभी कमियां दूर हो जाती हैं, तब आपको अपने राज्य के अग्निशमन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे उत्तराखंड में Uttarakhand Fire Service या संबंधित राज्य के सिंगल विंडो पोर्टल) पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ बिल्डिंग का मैप, कंसलटेंट की रिपोर्ट और सुधारों की तस्वीरें अपलोड करनी होती हैं। इसके बाद मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) या उनकी टीम आपके परिसर का फाइनल मुआयना करने आती है। सब कुछ नियमों के मुताबिक पाए जाने पर विभाग द्वारा आधिकारिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया जाता है।







