Raghav Chadha joins BJP News: देश की राजधानी में शुक्रवार को एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने भारतीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे युवा और प्रभावशाली चेहरों में से एक, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चड्ढा अकेले नहीं गए, बल्कि उन्होंने राज्यसभा में ‘आप’ के कुल सांसदों के दो-तिहाई हिस्से (7 सांसदों) के साथ भाजपा में विलय का ऐलान किया, जिससे उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की तलवार भी नहीं लटकेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा धमाका
शुक्रवार दोपहर दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने अपने इस बड़े फैसले की जानकारी दी। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। चड्ढा ने भावुक लेकिन कड़े शब्दों में कहा:
“जिस विचारधारा और मूल्यों के लिए हमने इस पार्टी (AAP) का निर्माण किया था, आज वह पार्टी अपने उन मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। अब वहां केवल व्यक्ति विशेष की राजनीति रह गई है। मैंने हमेशा जनता की आवाज उठाई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन में मुझे भारत का उज्ज्वल भविष्य दिखाई दे रहा है।”
संवैधानिक प्रावधानों का चतुराई से उपयोग
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा ने यह कदम बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत उठाया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 11 सांसद थे। चड्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों (जिनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, और संभावित रूप से स्वाति मालीवाल व हरभजन सिंह के नाम भी चर्चा में हैं) ने भाजपा में विलय की घोषणा की है। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ टूटते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। इस तरह राघव चड्ढा ने न केवल अपनी राज्यसभा सीट सुरक्षित रखी, बल्कि केजरीवाल सरकार को केंद्र में एक बड़ा झटका भी दिया।

केजरीवाल के ‘हनुमान’ से ‘बागी’ तक का सफर
कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे राघव चड्ढा का ‘आप’ से मोहभंग होना रातों-रात नहीं हुआ। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर तनातनी की खबरें आ रही थीं। विशेष रूप से जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था, तब उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई थी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में भी कहा था, “मैं घायल हूँ, इसलिए घातक हूँ।” आज उनके इस बयान का मतलब पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो गया है।

आम आदमी पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट?
पंजाब में बड़ी जीत और दिल्ली में मजबूत पकड़ रखने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह पिछले एक दशक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। राघव चड्ढा न केवल एक रणनीतिकार थे, बल्कि वह पार्टी का वैश्विक चेहरा भी थे। उनके जाने से न केवल पार्टी के सांगठनिक ढांचे को चोट पहुँची है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी गहरा असर पड़ा है। बीजेपी में शामिल होने के बाद अब चड्ढा को केंद्र सरकार या पार्टी संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
बीजेपी का बढ़ता कुनबा
बीजेपी के लिए यह एक बड़ी जीत है। पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने राघव चड्ढा का स्वागत करते हुए कहा कि युवा और शिक्षित नेताओं का बीजेपी में आना यह दर्शाता है कि देश की युवा शक्ति प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प के साथ है। चड्ढा का सीए (CA) बैकग्राउंड और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उनकी पढ़ाई उन्हें भाजपा के लिए एक बौद्धिक संपत्ति बनाती है।












