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Raghav Chadha joins BJP News: राघव चड्ढा ने ‘झाड़ू’ छोड़ थामा ‘कमल’, 7 सांसदों के साथ भाजपा में हुए शामिल

On: July 3, 2026 5:23 PM
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Raghav Chadha joins BJP News: राघव चड्ढा ने 'झाड़ू' छोड़ थामा 'कमल', 7 सांसदों के साथ भाजपा में हुए शामिल
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Raghav Chadha joins BJP News: देश की राजधानी में शुक्रवार को एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने भारतीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे युवा और प्रभावशाली चेहरों में से एक, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। चड्ढा अकेले नहीं गए, बल्कि उन्होंने राज्यसभा में ‘आप’ के कुल सांसदों के दो-तिहाई हिस्से (7 सांसदों) के साथ भाजपा में विलय का ऐलान किया, जिससे उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की तलवार भी नहीं लटकेगी।

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Photo- Raghav Chadha Joins BJP

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा धमाका

शुक्रवार दोपहर दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने अपने इस बड़े फैसले की जानकारी दी। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। चड्ढा ने भावुक लेकिन कड़े शब्दों में कहा:

“जिस विचारधारा और मूल्यों के लिए हमने इस पार्टी (AAP) का निर्माण किया था, आज वह पार्टी अपने उन मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। अब वहां केवल व्यक्ति विशेष की राजनीति रह गई है। मैंने हमेशा जनता की आवाज उठाई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन में मुझे भारत का उज्ज्वल भविष्य दिखाई दे रहा है।”

संवैधानिक प्रावधानों का चतुराई से उपयोग

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा ने यह कदम बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत उठाया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 11 सांसद थे। चड्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों (जिनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, और संभावित रूप से स्वाति मालीवाल व हरभजन सिंह के नाम भी चर्चा में हैं) ने भाजपा में विलय की घोषणा की है। संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य एक साथ टूटते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। इस तरह राघव चड्ढा ने न केवल अपनी राज्यसभा सीट सुरक्षित रखी, बल्कि केजरीवाल सरकार को केंद्र में एक बड़ा झटका भी दिया।

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Photo- AAP as Raghav Chadha, 6 others quit to join BJP

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केजरीवाल के ‘हनुमान’ से ‘बागी’ तक का सफर

कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे राघव चड्ढा का ‘आप’ से मोहभंग होना रातों-रात नहीं हुआ। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर तनातनी की खबरें आ रही थीं। विशेष रूप से जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था, तब उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई थी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में भी कहा था, “मैं घायल हूँ, इसलिए घातक हूँ।” आज उनके इस बयान का मतलब पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो गया है।

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Raghav Chadha joins BJP 

आम आदमी पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट?

पंजाब में बड़ी जीत और दिल्ली में मजबूत पकड़ रखने वाली आम आदमी पार्टी के लिए यह पिछले एक दशक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। राघव चड्ढा न केवल एक रणनीतिकार थे, बल्कि वह पार्टी का वैश्विक चेहरा भी थे। उनके जाने से न केवल पार्टी के सांगठनिक ढांचे को चोट पहुँची है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी गहरा असर पड़ा है। बीजेपी में शामिल होने के बाद अब चड्ढा को केंद्र सरकार या पार्टी संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

बीजेपी का बढ़ता कुनबा

बीजेपी के लिए यह एक बड़ी जीत है। पार्टी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने राघव चड्ढा का स्वागत करते हुए कहा कि युवा और शिक्षित नेताओं का बीजेपी में आना यह दर्शाता है कि देश की युवा शक्ति प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प के साथ है। चड्ढा का सीए (CA) बैकग्राउंड और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उनकी पढ़ाई उन्हें भाजपा के लिए एक बौद्धिक संपत्ति बनाती है।

आप के साथ थे कभी राघव चड्ढा

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के जीवन और उनके अब तक के राजनीतिक सफर पर एक विस्तृत रिपोर्ट। जानिए कैसे एक पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा, दिल्ली से लेकर पंजाब चुनाव तक में बड़ी भूमिका निभाई और देश के सबसे कम उम्र के सांसदों में शुमार हुए।

भारतीय राजनीति के समकालीन परिदृश्य में जब भी युवा, पढ़े-लिखें और प्रखर वक्ताओं का जिक्र होता है, तो आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम अग्रिम पंक्ति में आता है। राघव चड्ढा न केवल अपनी पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं, बल्कि वे संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में भी अपनी तीखी और तर्कपूर्ण बहस के लिए जाने जाते हैं। बहुत कम समय में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने वाले राघव चड्ढा का सफर कॉर्पोरेट जगत के शांत कमरों से शुरू होकर देश की संसद के गलियारों तक पहुंचता है, जो आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है।

राघव चड्ढा का जन्म 11 नवंबर 1988 को देश की राजधानी नई दिल्ली में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकटेश्वर कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। राघव पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से सीए की डिग्री हासिल की और इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से ‘एग्जीक्यूटिव मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन’ का कोर्स भी किया। राजनीति में आने से पहले वे देश-विदेश की कई नामी-गिरामी वित्तीय और कंसल्टेंसी फर्मों में एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जहां उनका करियर बेहद शानदार चल रहा था।

राघव चड्ढा के जीवन और करियर में सबसे बड़ा यू-टर्न साल 2011 में आया, जब देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का ऐतिहासिक आंदोलन शुरू हुआ। एक सजग और पढ़े-लिखे युवा के तौर पर राघव इस आंदोलन से गहराई से जुड़ गए। जब साल 2012 में अरविंद केजरीवाल ने ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की स्थापना की, तो राघव चड्ढा इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल हो गए। पार्टी ने उनके पेशेवर ज्ञान और आर्थिक समझ को देखते हुए उन्हें बेहद कम उम्र में ही ड्राफ्टिंग कमेटी का हिस्सा बना दिया, जहाँ उन्होंने दिल्ली लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद राघव चड्ढा का राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा। आम आदमी पार्टी ने उनकी काबिलियत, अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं पर मजबूत पकड़ और शांत स्वभाव को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी। टीवी डिबेट्स में अपनी तार्किक और शालीन बयानबाजी से उन्होंने बहुत जल्द देश भर के दर्शकों का दिल जीत लिया। साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें राजेंद्र नगर सीट से चुनावी मैदान में उतारा, जहाँ उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया, जहाँ उन्होंने दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए कई जमीनी काम किए।

राघव चड्ढा के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा और कामयाबी साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में देखने को मिली। पार्टी ने उन्हें पंजाब का सह-प्रभारी बनाकर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। राघव ने पंजाब के कोने-कोने में जाकर जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया और पार्टी की नीतियों का प्रचार किया। जब चुनाव के नतीजे आए, तो आम आदमी पार्टी ने पंजाब में प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक जीत के रणनीतिकार के रूप में राघव चड्ढा का कद राजनीति में बहुत बड़ा हो गया।

पंजाब में मिली इस बंपर सफलता के पुरस्कार स्वरूप आम आदमी पार्टी ने मार्च 2022 में राघव चड्ढा को पंजाब कोटे से राज्यसभा के लिए नामित किया। जब उन्होंने उच्च सदन की सदस्यता ग्रहण की, तो वे मात्र 33 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा राज्यसभा सांसद बन गए। संसद के भीतर उन्होंने लगातार देश और विशेषकर पंजाब व दिल्ली के अधिकारों की आवाज को प्रमुखता से उठाया है। आज राघव चड्ढा केवल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय रणनीतिकार ही नहीं हैं, बल्कि वे देश के युवा राजनेताओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं, जो यह साबित करता है कि साफ नीति और उच्च शिक्षा के दम पर देश की राजनीति की दिशा को बदला जा सकता है। लेकिन अब उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है।

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