Badrinath Dham Opening 2026 News: आज 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे, वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं। कड़ाके की ठंड और -4°C तापमान के बावजूद, हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। 149 दिनों के अंतराल के बाद जब गर्भगृह के द्वार खुले, तो हर तरफ ‘जय बद्री विशाल’ के जयकारे गूंज उठे।

इस वर्ष की सबसे बड़ी खबर यह रही कि कपाट खुलने के बाद भगवान को ओढ़ाया गया ‘घृत कंबल’ (घी में भिगोया हुआ कंबल) 6 महीने बाद भी घी से लबालब मिला, जिसे भविष्य के लिए एक अत्यंत शुभ संकेत माना जा रहा है।
ब्रह्म मुहूर्त में खुले द्वार, अखंड ज्योति के हुए दर्शन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार सुबह 6:15 बजे बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य द्वार (सिंह द्वार) को भक्तों के लिए खोल दिया गया। सेना के बैंड की धुनों और तीर्थ पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही थी। मंदिर को क्विंटल फूलों से सजाया गया है। कपाट खुलने के साथ ही सबसे पहले भक्तों ने उस अखंड ज्योति के दर्शन किए, जो कपाट बंद होने के समय जलाई गई थी और जो पिछले 6 महीनों से निरंतर प्रज्वलित थी।

घृत कंबल का चमत्कार: देश के लिए शुभ संकेत
बद्रीनाथ धाम में कपाट खुलने के समय सबसे अधिक प्रतीक्षा ‘घृत कंबल’ की होती है। परंपरा के अनुसार, शीतकाल में जब कपाट बंद किए जाते हैं, तो भगवान की मूर्ति को घी में भिगोया हुआ एक विशेष ऊनी कंबल ओढ़ाया जाता है। यह कंबल भारत के आखिरी गांव ‘माणा’ की कुंवारी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं द्वारा एक ही दिन में तैयार किया जाता है।
धार्मिक मान्यता: मान्यता है कि यदि कपाट खुलने पर यह कंबल घी से तर-बतर मिलता है, तो वह वर्ष देश के लिए खुशहाली, अच्छी बारिश और समृद्धि लेकर आता है। आज जब मुख्य पुजारी (रावल) ने भगवान के विग्रह से कंबल हटाया, तो वह घी से पूरी तरह लबालब था। पुरोहितों के अनुसार, 6 महीने तक बर्फबारी और भीषण ठंड के बावजूद घी का न सूखना भगवान बद्री विशाल की असीम कृपा और भविष्य की सुख-शांति का प्रतीक है।

-4°C तापमान और भक्तों की अटूट श्रद्धा
बद्रीनाथ में इस समय हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। सुबह का तापमान -4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है। इसके बावजूद, देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। श्रद्धालु रात से ही कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

चारधाम यात्रा 2026 के नए नियम
इस साल प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए कुछ कड़े कदम उठाए हैं:
- मोबाइल पर प्रतिबंध: मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल ले जाने और रील बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है ताकि आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे।
- हेल्थ स्क्रीनिंग: 55 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है।
- स्मार्ट पंजीकरण: बिना ऑनलाइन पंजीकरण के किसी भी यात्री को ऋषिकेश से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रशासनिक तैयारियां, चौड़ी सड़कें और नए घाट तैयार
चमोली के जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन ने बताया कि बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत यात्रियों की सुविधा के लिए चौड़ी सड़कें और नए घाट तैयार किए गए हैं। अलकनंदा के तट पर स्थित इस धाम में श्रद्धालुओं के लिए रुकने और चिकित्सा की विशेष व्यवस्था की गई है।

भगवान नारायण की विधिवत पूजा-अर्चना
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अब पूरी तरह गति पकड़ चुकी है। यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ के द्वार पहले ही खुल चुके हैं। अगले छह महीनों तक ‘भू-वैकुंठ’ में भगवान नारायण की विधिवत पूजा-अर्चना होगी, जिसमें लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है।

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