Congress President Ganesh Godiyal said the attack News: उत्तराखंड की राजनीति में इस समय भूचाल आ गया है। गदरपुर से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पाण्डेय द्वारा अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को लिखी गई पाण्डेय की चिट्ठी के सार्वजनिक होने के बाद, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तीखे प्रहार किए हैं।

विधायक अरविंद पाण्डेय के गंभीर आरोप: क्या है चिट्ठी का सच?
भाजपा विधायक अरविंद पाण्डेय ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई एक गोपनीय चिट्ठी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में उल्लेखित मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- फर्जी मुकदमे: पाण्डेय का आरोप है कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ राजनीतिक द्वेष के चलते बाजपुर थाने में फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
- 420 का मामला: विधायक के परिवार के सदस्यों पर धारा 420 के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसे उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया है।
- धमकी का आरोप: चिट्ठी में दावा किया गया है कि एसएसपी के माध्यम से उनके पुत्र को धमकाया जा रहा है।
- जान का खतरा: उन्होंने विवादास्पद पात्र सुखदेव सिंह नामधारी का जिक्र करते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है।
- निष्ठा का हवाला: खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का पूर्व प्रचारक बताते हुए उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस का वार: गणेश गोदियाल ने उठाए तीखे सवाल
भाजपा विधायक की इस चिट्ठी ने कांग्रेस को सरकार को घेरने का मौका दे दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए धामी सरकार की नैतिकता पर सवाल खड़े किए हैं।
गोदियाल के मुख्य बयान:
“जब सत्ता पक्ष के एक वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री को ही अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए दिल्ली दरबार में गुहार लगानी पड़ रही है, तो उत्तराखंड की आम जनता की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह सरकार केवल कागजों पर विकास का ढोल पीट रही है, जबकि हकीकत में अपनों को ही प्रताड़ित करने का खेल चल रहा है।”
गोदियाल की मांगें:
- SIT जांच: कांग्रेस अध्यक्ष ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एसआईटी (SIT) जांच की मांग की है।
- सच्चाई का खुलासा: उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि क्या एक विधायक के आरोप सही हैं? यदि हाँ, तो जिम्मेदार अधिकारियों और सफेदपोशों पर कार्रवाई हो।
- भ्रम की स्थिति: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार चुप्पी साधे रखती है, तो यह माना जाएगा कि राज्य में ‘अघोषित आपातकाल’ जैसी स्थिति है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
अरविंद पाण्डेय का यह कदम धामी सरकार के भीतर चल रही अंतर्कलह को उजागर करता है। एक तरफ भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर उनके अपने ही विधायक अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है, विशेषकर जब कांग्रेस इसे जनता के बीच ‘कानून-व्यवस्था के फेलियर’ के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है।








