Haridwar district planning meeting: धर्मनगरी हरिद्वार के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला योजना समिति की बैठक बुधवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। कैबिनेट मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुई इस बैठक में विकास योजनाओं पर चर्चा होनी थी, लेकिन यह बैठक विपक्ष के भारी हंगामे और बहिष्कार की भेंट चढ़ गई। कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायकों ने सरकार पर विकास के नाम पर ‘ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने’ का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।
बैठक की शुरुआत और अचानक भड़का आक्रोश
बैठक की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत, रवि बहादुर और बसपा विधायक शहजाद अली के नेतृत्व में विपक्षी जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया। जैसे ही प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज सभागार में पहुँचे, विपक्षी विधायकों ने मेज पर रखी जिला योजना की बुकलेट उठाकर फेंक दी। देखते ही देखते पूरा हॉल “धामी सरकार मुर्दाबाद” और “पक्षपात बंद करो” के नारों से गूंज उठा।

विपक्ष का आरोप था कि जिला प्रशासन और सरकार मिलकर जनप्रतिनिधियों की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं। हंगामे की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल को स्थिति को संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
“जनहित की नहीं, ठेकेदारों की बैठक”
विपक्षी विधायकों ने मीडिया से बात करते हुए सरकार की कार्यशैली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जिला योजना का बजट जनता की बुनियादी सुविधाओं—सड़क, बिजली, और पानी—के लिए होना चाहिए, लेकिन यहाँ योजनाओं का चयन केवल ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
- पारदर्शिता पर सवाल: विपक्ष का दावा है कि जो योजनाएं सदन के सामने रखी गई हैं, उनमें स्थानीय विधायकों के सुझावों को पूरी तरह दरकिनार किया गया है।
- भ्रष्टाचार का आरोप: विधायकों ने आरोप लगाया कि बजट का बंदरबांट किया जा रहा है और धरातल पर कोई काम नहीं दिख रहा है।
- गठबंधन का स्वरूप: इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि कांग्रेस और बसपा के विधायक एक सुर में सरकार के खिलाफ खड़े नजर आए।
सदन में भाजपा, बाहर विपक्ष का धरना
हंगामे और शोर-शराबे के बीच विपक्षी विधायक बैठक का बहिष्कार कर कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भाजपा विधायकों और जिला पंचायत सदस्यों के साथ बैठक जारी रखी। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीति करने के लिए विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए करोड़ों रुपये के बजट परिव्यय पर चर्चा की गई, जिसमें जल जीवन मिशन, कृषि और ग्रामीण सड़कों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

प्रशासनिक चुनौतियां और राजनीतिक भविष्य
प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह स्थिति बेहद असहज रही। एक ओर प्रभारी मंत्री का दबाव था और दूसरी ओर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का उग्र विरोध। हालांकि, कुछ देर बाद बैठक की कार्यवाही को सामान्य करने का दावा किया गया, लेकिन विपक्ष का धरना जारी रहने से यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले दिनों में यह विवाद थमने वाला नहीं है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जिला योजना समितियाँ वास्तव में लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं या वे केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित रह गई हैं? विपक्ष के इन आरोपों के बाद अब सबकी नजरें धामी सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।









