Women Empowerment and Child Development Uttarakhand News: उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के बाद अब पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार राज्य की महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बुधवार को देहरादून के यमुना कॉलोनी स्थित अपने कैंप कार्यालय में विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्च स्तरीय बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के तहत चयनित नई दो सौ ग्यारह लाभार्थी महिलाओं को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द वित्तीय सहायता राशि जारी की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए ताकि जरूरतमंद महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए समय पर सरकारी मदद मिल सके और वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। मंत्री रेखा आर्या ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की ऐसी महिलाओं को संबल प्रदान करना है जो एकाकी जीवन जी रही हैं। इस योजना के दायरे में अविवाहित, परित्यक्ता, तलाकशुदा, निराश्रित और दिव्यांग महिलाओं को शामिल किया गया है, जिन्हें समाज में सबसे अधिक आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है। मंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि इस कल्याणकारी योजना के पहले चरण में चार सौ चौरासी महिलाओं को पहले ही स्वरोजगार के लिए उनकी पहली किस्त जारी की जा चुकी है। सबसे सुखद बात यह है कि इनमें से अधिकांश महिलाओं ने न केवल इस राशि का सदुपयोग किया है, बल्कि अपने-अपने स्थानीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के लघु और कुटीर उद्योग, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार सफलतापूर्वक शुरू भी कर दिए हैं। प्रथम किस्त का यह सकारात्मक परिणाम राज्य में महिला उद्यमिता की एक नई गाथा लिख रहा है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री ने आगामी लक्ष्यों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस साल दो हजार एकल महिलाओं को इस स्वरोजगार योजना से सीधे तौर पर लाभान्वित करने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि अगस्त महीने तक हर हाल में नए आवेदन आमंत्रित करने के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी जाए। इससे राज्य के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों की उन पात्र महिलाओं को भी आवेदन करने का मौका मिलेगा जो पूर्व में जानकारी के अभाव में इस योजना से वंचित रह गई थीं। विभागीय स्तर पर आवेदनों के सरलीकरण और पारदर्शिता पर भी विशेष बल दिया गया है ताकि किसी भी वास्तविक पात्र महिला को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
कैंप कार्यालय में आयोजित इस समीक्षा बैठक का दायरा सिर्फ एकल महिला स्वरोजगार योजना तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें विभाग द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय पुरस्कारों की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया गया। बैठक में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ और ‘आंगनबाड़ी सम्मान पुरस्कार’ के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन पुरस्कारों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, ताकि समाज में असाधारण कार्य करने वाली महिलाओं और अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वास्तविक सम्मान हो सके। उन्होंने इन सम्मान समारोहों को गरिमामयी ढंग से आयोजित करने के लिए समय सारणी निर्धारित करने को भी कहा।
इसके अलावा, बैठक में उत्तराखंड की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने वाली ‘नंदा गौरा योजना’ को लेकर भी एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण ऐलान किया गया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि तकनीकी समस्याओं और आवश्यक दस्तावेजी औपचारिकताएं समय पर पूरी न होने की वजह से हरिद्वार और उत्तरकाशी जनपद की चार हजार से अधिक बालिकाएं अपनी हक की धनराशि पाने से पीछे छूट गई थीं। बेटियों की इस समस्या का संज्ञान लेते हुए विभाग ने त्वरित कार्रवाई की और सभी कमियों को दूर कर लिया है। मंत्री ने घोषणा की कि इन दोनों जनपदों की चार हजार से अधिक पात्र बालिकाओं के बैंक खातों में कुल उन्नीस करोड़ बाईस लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम धनराशि गुरुवार को सीधे डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेज दी जाएगी। इस कदम से इन दोनों जिलों की हजारों बेटियों की उच्च शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।
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इस बड़ी वित्तीय सहायता के सीधे खातों में हस्तांतरण से उन परिवारों को भारी राहत मिलेगी जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटियों की पढ़ाई को आगे जारी रखने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। नंदा गौरा योजना के तहत मिलने वाली यह राशि बेटियों के जन्म से लेकर उनकी बारहवीं तक की पढ़ाई और आगे के जीवन के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। मंत्री रेखा आर्या ने स्पष्ट किया कि धामी सरकार का यह संकल्प है कि प्रदेश की किसी भी बेटी की पढ़ाई पैसे की कमी के कारण नहीं रुकनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि भविष्य में किसी भी जिले में तकनीकी कारणों से बालिकाओं की धनराशि में देरी नहीं होनी चाहिए और डिजिटल गवर्नेंस का पूरा लाभ सीधे जनता तक पहुंचना चाहिए।
समीक्षा बैठक के अंत में मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग सीधे तौर पर समाज के सबसे संवेदनशील और अंतिम छोर पर खड़े वर्ग से जुड़ा हुआ है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में जहां आधी आबादी पर पूरे परिवार और अर्थव्यवस्था की जिम्मेदारी टिकी है, वहां इस तरह की स्वरोजगार योजनाएं और वित्तीय सहायता कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में गेमचेंजर साबित हो रहे हैं। सरकार की इन कोशिशों से न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।







