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Uttarakhand National Lok Adalat News: राष्ट्रीय लोक अदालत 2026, उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में हजारों मामलों का आपसी सुलह से निस्तारण, करोड़ों की धनराशि पर बनी सहमति

On: May 9, 2026 5:45 PM
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Uttarakhand National Lok Adalat News: राष्ट्रीय लोक अदालत 2026, उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में हजारों मामलों का आपसी सुलह से निस्तारण, करोड़ों की धनराशि पर बनी सहमति
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देहरादून/गोपेश्वर: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तत्वावधान में उत्तराखंड के समस्त जिलों में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ को कम करना और आम जनता को त्वरित, सुलभ एवं सस्ता न्याय प्रदान करना है। प्रदेश भर के जिला न्यायालयों और तहसील स्तर पर आयोजित इन अदालतों में फौजदारी के शमनीय मामलों से लेकर दीवानी, पारिवारिक और वित्तीय विवादों का निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर किया गया। लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी पक्ष की हार या जीत नहीं हुई, बल्कि दोनों पक्षों ने हाथ मिलाकर विवाद को सदा के लिए समाप्त कर दिया।


चम्पावत में विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल और उद्देश्य

चम्पावत जिले में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने आपसी सुलह-समझौते की एक नई मिसाल पेश की। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भवदीप रावते ने इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक अदालत का मूल मंत्र न्यायालयों के बाहर विवादों का मैत्रीपूर्ण समाधान ढूंढना है। उन्होंने विस्तार से बताया कि इस बार संपत्ति अधिग्रहण के जटिल मामलों के साथ-साथ मोटर वाहन वित्तीय विवादों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक और पारिवारिक मुद्दों को भी संवेदनशीलता के साथ सुलझाया गया, जिससे कई परिवारों को टूटने से बचाया जा सका। प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में विधिक जागरूकता बढ़ती है और आम जनमानस का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है।

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Photo- Uttarakhand National Lok Adalat

चमोली में रिकॉर्ड निस्तारण और भारी अर्थदंड की वसूली

सीमांत जिले चमोली में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला जज विध्यांचल सिंह की अध्यक्षता में जिला न्याय भवन गोपेश्वर में संपन्न हुआ। यहाँ की अदालतों में न्याय के प्रति जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहाँ कुल 105 वादों का निस्तारण आपसी सुलह के आधार पर किया गया। वित्तीय मामलों में यह आयोजन विशेष रूप से सफल रहा, क्योंकि विभिन्न बैंकों से जुड़े उनतालीस मामलों को निपटाया गया। आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो न्यायालयों में लंबित छियासठ विभिन्न मामलों में समझौते के बाद अठहत्तर लाख 10 हजार अड़तीस रुपये का अर्थदंड वसूला गया। जिला जज ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लोक अदालतें न केवल लंबित मुकदमों की संख्या घटाती हैं, बल्कि सरकारी राजस्व की प्राप्ति में भी सहायक सिद्ध होती हैं।

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ऊधमसिंह नगर में बैंकिंग और पारिवारिक विवादों का समाधान

ऊधमसिंह नगर जिले के विभिन्न न्यायालय परिसरों में भी राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान गहमागहमी बनी रही। यहाँ विशेष रूप से बैंक ऋणों की वसूली और मोटर वाहन अधिनियम से संबंधित मामलों की भरमार रही। अग्रणी जिला प्रबंधक चिराग पटेल ने जानकारी दी कि बैंकों से लिए गए पुराने ऋणों के मामलों में उधारकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए विशेष छूट के साथ समझौते कराए गए। इसके अलावा, पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता कर कई पुराने लंबित मामलों को बंद किया गया। प्रशासन और विधिक टीम के समन्वित प्रयासों से सैकड़ों लोगों ने अपने वर्षों पुराने विवादों से मुक्ति पाई, जिससे जिले की न्यायिक प्रक्रिया को गति मिली है।


मसूरी में न्याय का सुलभ मार्ग और बड़े वित्तीय समझौते

पर्यटन नगरी मसूरी के न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत ने भी महत्वपूर्ण सफलता अर्जित की। यहाँ न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज के मार्गदर्शन में करीब 55 मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस), क्रिमिनल कंपाउंडेबल केस और मोटर व्हीकल एक्ट के मामले प्रमुखता से शामिल थे। विशेष उपलब्धि के रूप में, दो बड़े विवादों में करीब साढ़े 34 लाख रुपये का ऐतिहासिक समझौता कराया गया। न्यायिक अधिकारी ने बताया कि नियमित अदालतों में मुकदमों के निस्तारण में लंबा समय और धन खर्च होता है, जबकि लोक अदालत में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तत्काल न्याय मिल जाता है। इससे न केवल कोर्ट का कीमती समय बचता है, बल्कि पक्षकारों के बीच का मनमुटाव भी स्थायी रूप से समाप्त हो जाता है।


निष्कर्ष: समाज के लिए लोक अदालत की उपयोगिता

राष्ट्रीय लोक अदालत का यह आयोजन एक बार फिर यह सिद्ध करने में सफल रहा कि बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से कठिन से कठिन विवाद को सुलझाया जा सकता है। यह प्रणाली उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो लंबी कानूनी लड़ाई का खर्च वहन नहीं कर सकते। आपसी सहमति से हुए इन फैसलों की सबसे अच्छी बात यह है कि इनके विरुद्ध कहीं अपील नहीं की जा सकती, जिससे भविष्य में भी मुकदमेबाजी की संभावना शून्य हो जाती है।

(For more news apart from Uttarakhand National Lok Adalat organised in districts of Uttarakhand, hundreds of cases settled through mutual consent news in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)

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