Uttarakhand High Court News: उत्तराखंड हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने लोकभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल ने शपथ दिलाई, सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं। आज लोकभवन में उत्तराखंड हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 15वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र सेवानिवृत्त
न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र का स्थान लिया है, जो शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। न्यायमूर्ति गुप्ता इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे अपने लंबे न्यायिक अनुभव के लिए न्यायिक जगत में विशेष पहचान रखते हैं। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने की मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता से मुलाकात कर उन्हें नवीन दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम ने उनकी उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पद पर नियुक्ति की सिफारिश की थी। जिसे मंजूरी देते हुए भारत सरकार ने संस्तुति राष्ट्रपति को भेजी थी।

आपको बता दें, 9 अक्टूबर 1964 को न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता का जन्म हुआ था। अपनी उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने कानून विषय को चुना और 1987 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। 6 दिसंबर 1987 को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति मनोज कुमार ने एक अधिवक्ता के रूप में अपना पंजीकरण कराया और कानूनी अभ्यास की शुरुआत की। न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने वकालत के दौरान मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और किराया नियंत्रण से जुड़े जटिल कानूनी मामलों पर ध्यान केंद्रित किया। इलाहाबाद हाई कोर्ट में 12 अप्रैल 2013 को अतिरिक्त न्यायाधीश बने जबकि 10 अप्रैल 2015 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए। वहीं, 22 नवंबर 2023 से 4 फरवरी 2024 तक इलाहाबाद हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
माननीय मुख्य न्यायाधीश का जन्म 09 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने कानून की दुनिया में कदम रखने के लिए अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ से पूरी की। वर्ष 1987 में उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ (कानून) में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद, उन्होंने कानूनी पेशे को अपना करियर बनाया और 06 दिसंबर 1987 को एक आधिकारिक एडवोकेट (वकील) के तौर पर अपना एनरोलमेंट यानी पंजीकरण कराया।

वकालत का सफर और विशेषज्ञता
वकील के रूप में पंजीकृत होने के बाद उन्होंने अदालत में नियमित रूप से अपनी प्रैक्टिस शुरू की। अपने वकालत के लंबे करियर में उन्होंने मुख्य रूप से सिविल (नागरिक मामले), रेंट कंट्रोल (किराया नियंत्रण) और संवैधानिक मामलों से जुड़े जटिल कानूनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। इन क्षेत्रों में उनकी गहरी समझ, कानूनी बारीकियों पर पकड़ और उत्कृष्ट पैरवी के कारण उन्होंने कानूनी जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के रूप में सफर
लंबे समय तक वकालत का शानदार अनुभव प्राप्त करने के बाद, उन्हें न्यायपालिका में जज के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। 12 अप्रैल 2013 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट के एडिशनल जज (अतिरिक्त न्यायाधीश) के रूप में प्रमोट किया गया। इस पद पर रहते हुए उनके बेहतरीन कार्यों को देखते हुए, दो वर्ष बाद 10 अप्रैल 2015 को उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के परमानेंट जज (स्थायी न्यायाधीश) के रूप में पद की शपथ ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल बेहद गरिमामयी और महत्वपूर्ण रहा।
उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति
न्यायपालिका में उनके उत्कृष्ट योगदान और वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के क्लॉज़ (1) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, देश के राष्ट्रपति ने 08 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके द्वारा उन्हें उत्तराखंड हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इस ऐतिहासिक नियुक्ति के बाद, उन्होंने 10 जनवरी 2026 को उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने पद का कार्यभार संभाला और गोपनीयता की शपथ ली।

लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई शुरू करने से लेकर देश के प्रतिष्ठित इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज रहने और फिर उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का उनका यह सफर उनकी न्यायप्रियता, कड़ी मेहनत और कानूनी विशेषज्ञता का एक बेहतरीन उदाहरण है।







