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Rekha Arya News: लोहाघाट में खेल मंत्री का महिला स्पोर्ट्स कॉलेज-स्टेडियम का निरीक्षण

On: September 18, 2026 4:13 AM
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Rekha Arya News: लोहाघाट में खेल मंत्री का महिला स्पोर्ट्स कॉलेज-स्टेडियम का निरीक्षण
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Rekha Arya News: उत्तराखंड की शांत और मनोरम वादियों के बीच बसा सीमांत जिला चंपावत आज खेल जगत के मानचित्र पर एक नए आत्मविश्वास के साथ उभर रहा है। लोहाघाट की सुरम्य पहाड़ियों में स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज और स्टेडियम केवल ईंट-पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि यह उन सैकड़ों ग्रामीण व पर्वतीय प्रतिभाओं की उम्मीदों का केंद्र हैं जो अपने सपनों को पंख लगाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने का जज्बा रखती हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रदेश की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या का लोहाघाट दौरा राज्य के खेल परिदृश्य को एक नई ऊर्जा और दिशा देने वाला सिद्ध हुआ है। कड़कड़ाती धूप और पहाड़ी ढलानों के बीच जब प्रदेश की खेल मंत्री ने सीधे मैदान में पहुंचकर वहां अध्ययनरत और अभ्यास कर रही बालिकाओं के साथ संवाद स्थापित किया, तो यह केवल एक औपचारिक प्रशासनिक दौरा नहीं रह गया, बल्कि यह एक संवेदनशील मार्गदर्शक का अपनी भावी पीढ़ियों के साथ आत्मीय जुड़ाव बन गया।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

लोहाघाट के इस ऐतिहासिक परिसर में पहुंचकर खेल मंत्री ने सबसे पहले पूरे खेल मैदान, छात्रावास, प्रशिक्षण कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि दूर-दराज के गांवों से आकर यहां रह रही छात्राओं को प्रशिक्षण और दैनिक जीवन में किसी प्रकार की असुविधा का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है। खेल मंत्री ने सीधे छात्राओं के बीच जाकर उनकी दिनचर्या, सुबह के अभ्यास सत्र, खान-पान की गुणवत्ता, अध्ययन के घंटों और शाम के शारीरिक प्रशिक्षण के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से चर्चा की। जब एक मंत्री सीधे जमीन पर बैठकर बच्चों के दैनिक अनुभवों को सुनती है, तो व्यवस्था में बैठा हुआ डर समाप्त हो जाता है और विश्वास का संचार होता है। छात्राओं ने भी पूरी बेबाकी और सहजता के साथ अपनी दिनचर्या साझा की, अपने खेल के प्रति समर्पण को दर्शाया और साथ ही कुछ व्यवहारिक परेशानियों को भी रेखांकित किया।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

छात्राएं जो अक्सर सुविधाओं के अभाव या प्रशासनिक जटिलताओं के कारण अपनी बात उच्च स्तर तक नहीं पहुंचा पाती हैं, उन्होंने खेल मंत्री के समक्ष खुलकर अपनी बात रखी। छात्राओं द्वारा साझा की गई समस्याओं में खेल उपकरणों की उपलब्धता, मैदान के कुछ हिस्सों का सुदृढ़ीकरण और दैनिक गतिविधियों से जुड़े कुछ व्यावहारिक पहलू शामिल थे। खेल मंत्री ने न केवल इन समस्याओं को अत्यंत गंभीरता से सुना, बल्कि तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को इन कमियों को दूर करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने छात्राओं को आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी राह में आने वाली किसी भी प्रशासनिक या भौतिक अड़चन को टिकने नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही अध्ययनरत बालिकाओं ने संस्थान को और अधिक जीवंत व परिणामोन्मुखी बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिनकी मंत्री ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह दर्शाता है कि आज की बेटियां केवल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली शिक्षार्थी नहीं हैं, बल्कि वे अपनी व्यवस्था को सुधारने की क्षमता और दृष्टि भी रखती हैं।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

संवाद के दौरान खेल मंत्री रेखा आर्या ने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण के महत्व पर अत्यंत प्रेरणादायक विचार रखे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की सार्थकता तभी है जब उसके समक्ष एक निश्चित ध्येय हो। बिना लक्ष्य के जीवन उस नौका के समान होता है जिसकी कोई पतवार नहीं होती और जो हवा के थपेड़ों के साथ भटकती रहती है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि जीवन में लक्ष्य तय करना पहली सीढ़ी है, किंतु उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तन, मन और पूरी आत्मा के साथ सतत प्रयास करना अनिवार्य होता है। खेल का मैदान किसी चमत्कार पर नहीं, बल्कि पसीने की हर बूंद, निरंतर अभ्यास और कभी न हार मानने वाले संकल्प पर चलता है। जब तक एक खिलाड़ी अपनी संपूर्ण ऊर्जा को अपने लक्ष्य पर केंद्रित नहीं करता, तब तक शिखर तक पहुंचना संभव नहीं होता।

अपने संबोधन में उन्होंने समाज के बदलते दृष्टिकोण को भी बहुत सुंदर और यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया। एक समय था जब हमारे समाज और विशेष रूप से पारंपरिक परिवारों में खेलों को केवल समय व्यतीत करने का जरिया माना जाता था। अक्सर अभिभावकों का मानना होता था कि खेलकूद से जीवन संवरता नहीं, बल्कि बिगड़ता है। पुरानी कहावतें भी पढ़ाई को नवाब बनाने और खेल को खराब करने से जोड़ती थीं। किंतु आज 21वीं सदी का भारत उस संकीर्ण सोच से बहुत आगे निकल चुका है। आज माता-पिता स्वयं अपनी बेटियों की उंगली पकड़कर उन्हें खेल मैदानों तक ले जा रहे हैं। आज खेल केवल एक अतिरिक्त गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गरिमापूर्ण आजीविका, राष्ट्रीय पहचान और आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त माध्यम बन चुका है।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

खेल मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आधुनिक युग में जितना महत्व औपचारिक शिक्षा का है, ठीक उतना ही महत्व खेलों का भी है। दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा जहां हमारे मस्तिष्क को परिष्कृत करती है, तर्कशीलता देती है और व्यक्तित्व को तराशती है, वहीं खेल हमारे भीतर अनुशासन, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना का संचार करते हैं। इसलिए छात्राओं को अपनी पुस्तकों और अपने खेल के उपकरणों के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित करना होगा। किसी एक के लिए दूसरे की उपेक्षा नहीं की जा सकती। जब एक खिलाड़ी शिक्षित होकर मैदान में उतरता है, तो उसकी रणनीति, उसकी एकाग्रता और उसका आत्मविश्वास एक अलग ही स्तर का होता है।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

इस अवसर पर खेल मंत्री ने एक अत्यंत दूरगामी और व्यवहारिक निर्णय लेते हुए कॉलेज के प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि वे यहां की छात्राओं के लिए देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज का एक विशेष शैक्षणिक व खेल भ्रमण आयोजित करें। यह निर्देश साधारण नहीं है। पर्वतीय जनपदों के दूरस्थ क्षेत्रों में अध्ययनरत बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक अलगाव की होती है। उन्हें अक्सर यह देखने का अवसर नहीं मिलता कि बड़े केंद्रों पर आधुनिक तकनीकों और उन्नत सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण कैसे संचालित होता है। देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज का भ्रमण इन बालिकाओं के क्षितिज को विस्तार देगा। जब वे राज्य के सबसे बड़े खेल संस्थान में जाकर वहां की उन्नत व्यायामशालाओं, सिंथेटिक ट्रैकों, अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की कार्यप्रणाली और वहां के खिलाड़ियों की कठोर दिनचर्या को प्रत्यक्ष रूप से देखेंगी, तो उनके भीतर का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाएगा। यह अनुभव उनके मन में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की असीम भूख पैदा करेगा।

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक क्षण वह था जब खेल मंत्री ने लोहाघाट स्पोर्ट्स कॉलेज की छात्राओं के सुगम आवागमन हेतु एक समर्पित बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बस केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र की उन तमाम भौगोलिक विषमताओं का समाधान है जो वर्षों से बालिकाओं के नियमित आवागमन में बाधा बनती रही हैं। पहाड़ी रास्तों पर समय पर सार्वजनिक वाहनों का न मिलना, मौसम की अनिश्चितता और सुरक्षा की चिंताएं हमेशा से छात्राओं और उनके परिजनों के लिए मानसिक तनाव का कारण रहती थीं। इस बस सुविधा के शुरू होने से अब छात्राओं को न केवल एक सुरक्षित और आरामदायक साधन प्राप्त हुआ है, बल्कि उनके बहुमूल्य समय की भी भारी बचत होगी। जो समय पहले आने-जाने की जद्दोजहद और इंतजार में व्यर्थ होता था, अब वह समय छात्राएं अपने खेल अभ्यास, शारीरिक विश्राम और अध्ययन में लगा सकेंगी।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

बस के लोकार्पण के समय छात्राओं के चेहरों पर तैरती मुस्कान और उनकी आंखों में चमकता विश्वास इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि यह पहल उनके जीवन में कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। खेल मंत्री ने इस अवसर पर दोहराया कि प्रदेश सरकार की मंशा दूरस्थ क्षेत्रों के अंतिम कोने तक खेल सुविधाओं का लोकतंत्रीकरण करना है। जब तक पहाड़ की प्रतिभाओं को मैदान की आधुनिक सुविधाएं और संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक राज्य की वास्तविक खेल क्षमता का प्रकटीकरण नहीं हो सकता। सरकार का संकल्प है कि किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी को केवल इसलिए अपने सपनों का त्याग न करना पड़े कि उसके पास जूते नहीं थे, मैदान नहीं था, या आने-जाने की सुविधा नहीं थी।

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Photo- Rekha Arya Visit Lohaghat Sports College inspection

कार्यक्रम के समापन पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने लोहाघाट स्पोर्ट्स कॉलेज में अध्ययनरत समस्त बालिकाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य, सुखद जीवन और आगामी राज्य व राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने उपस्थित प्रशिक्षकों और शिक्षकों से भी आह्वान किया कि वे केवल एक नौकरी के रूप में अपनी सेवाएं न दें, बल्कि इन बालिकाओं को अपने परिवार के सदस्य की भांति स्नेह और संबल प्रदान करते हुए उन्हें तराशें। एक अच्छा गुरु साधारण पत्थर को भी हीरा बना सकता है, और चंपावत की यह भूमि तो वैसे भी ऐतिहासिक रूप से शौर्य, तपस्या और परिश्रम की पावन धरा रही है।

लोहाघाट में हुआ यह कार्यक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तराखंड में खेल संस्कृति अब पारंपरिक उत्सवों से निकलकर नीतिगत सुधारों और ठोस बुनियादी ढांचे के निर्माण की ओर तेजी से अग्रसर है। खेल प्रतिभाओं की पहचान, उन्हें आधुनिक संसाधनों से जोड़ना, उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं का संवेदनशील समाधान करना और उनके आवागमन से लेकर स्वास्थ्य तक की चिंता करना एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। जब राज्य की बेटियां इस प्रकार के सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ेंगी, तो वे न केवल अपने परिवारों और चंपावत जनपद का नाम रोशन करेंगी, बल्कि वैश्विक फलक पर भारत का मान बढ़ाकर पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित करेंगी। यह कदम भविष्य के उन स्वर्ण पदकों की नींव है जो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तराखंड के खाते में दर्ज होने वाले हैं।

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