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Rudraprayag Leopard Attack News: गुलदार के हमले में मृतक बच्चे के परिजनों से मिले जिलाधिकारी…. दस लाख की सहायता, आवास और पेंशन के दिए निर्देश

On: June 25, 2026 5:09 PM
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रुद्रप्रयाग गुलदार हमला सहायता
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Rudraprayag leopard attack News: रुद्रप्रयाग गुलदार हमला सहायता के तहत जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने अगस्त्यमुनि क्षेत्र में गुलदार हमले में मृतक बच्चे के परिजनों से मुलाकात की।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद अंतर्गत विकासखंड अगस्त्यमुनि के सिंद्रवाणी गांव में गुलदार के हमले में जान गंवाने वाले मासूम बच्चे के पीड़ित परिवार से जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मुलाकात की। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, बहनों को छात्रवृत्ति और दादा-दादी को वृद्धावस्था पेंशन देने की घोषणा की है। क्षेत्र में गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग और वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों की टीमें मुस्तैद हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिसने स्थानीय निवासियों के भीतर एक गहरा खौफ और चिंता पैदा कर दी है। इसी कड़ी में रुद्रप्रयाग जनपद के विकासखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत आने वाले सिंद्रवाणी गांव में पिछले दिनों एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जहां एक आदमखोर गुलदार ने एक मासूम बच्चे को अपना निवाला बना लिया था। इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व डर का माहौल था। पीड़ित परिवार के इस असीम दुख को बांटने और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित राहत पहुंचाने के लिए रुद्रप्रयाग के संवेदनशील जिलाधिकारी प्रतीक जैन स्वयं सिंद्रवाणी गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक बच्चे के शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर इस बेहद दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। जिलाधिकारी ने दुखी परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि इस संकट की घड़ी में पूरा जिला प्रशासन उनके साथ खड़ा है और उन्हें हर संभव वैधानिक व मानवीय सहायता प्रदान की जाएगी।

ग्रामीणों के घावों पर मरहम लगाने और पीड़ित परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मौके पर ही एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक पहल की। उन्होंने केवल कागजी औपचारिकताओं में समय गंवाने के बजाय विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बुलाकर पीड़ित परिवार के संपूर्ण सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए। जिलाधिकारी ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और आपदा राहत कोष के नियमों के तहत मृतक बच्चे की माता के बैंक खाते में तत्काल दस लाख रुपये की अनुग्रह आर्थिक सहायता राशि हस्तांतरित करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त, परिवार की अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के अंतर्गत तुरंत एक पक्के आवास का लाभ स्वीकृत करने के निर्देश दिए ताकि वे एक सुरक्षित आशियाने में रह सकें और उन्हें भविष्य में ऐसे हिंसक वन्यजीवों के खतरों से सुरक्षा मिल सके।

परिवार के अन्य सदस्यों के भविष्य और बुढ़ापे की लाठी को मजबूत करने के लिए भी प्रशासनिक स्तर पर चौतरफा मदद की रूपरेखा तैयार की गई है। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मौके पर ही मौजूद शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को पाबंद किया कि मृतक मासूम की दोनों बहनों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए उन्हें तुरंत विशेष छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्रदान किया जाए। वहीं दूसरी ओर, बच्चे के असहाय बुजुर्ग दादा-दादी की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से ‘वृद्धावस्था पेंशन योजना’ से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी की इस त्वरित और व्यापक कल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने माना कि किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा जमीन पर आकर इस तरह का संवेदनशीलता भरा कदम उठाना वाकई प्रशंसनीय है, जिससे पीड़ित परिवार को आगे बढ़ने की थोड़ी हिम्मत मिलेगी।

वहीं दूसरी तरफ, सिंद्रवाणी और उसके आस-पास की पूरी घाटी में दहशत का सबब बने आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिलाधिकारी के सख्त रुख के बाद वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने क्षेत्र में युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। गुलदार की सटीक लोकेशन का पता लगाने और उसकी धरपकड़ के लिए गांव के विभिन्न संवेदनशील और संभावित रास्तों पर तीन बड़े और आधुनिक पिंजरे लगाए गए हैं, जिनमें शिकार (चारा) की व्यवस्था भी की गई है। इसके साथ ही, तकनीकी रूप से इस अभियान को मजबूत करने के लिए क्षेत्र में पांच हाई-टेक ट्रैप कैमरे और कई अन्य अत्याधुनिक थर्मल इमेजिंग उपकरणों की सहायता से लगातार चौबीसों घंटे निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा रही है ताकि गुलदार की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा सके।

वन विभाग की विशेष सशस्त्र टीमें और स्थानीय वन रक्षक प्रभावित क्षेत्र में दिन और रात के समय लगातार सघन गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे हैं ताकि ग्रामीणों को सुरक्षा का अहसास हो सके और वे अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए बेखौफ होकर निकल सकें। इस पूरे ऑपरेशन को वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से अंजाम देने के लिए देहरादून और अन्य उच्च संस्थानों से विशेष ‘वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स’ (वन्यजीव विशेषज्ञों) की एक टीम को भी आपातकालीन स्थिति में मौके पर बुलाया गया है। यह विशेषज्ञ टीम आगामी चार से पांच दिनों तक सिंद्रवाणी और अगस्त्यमुनि के जंगलों में डेरा डालकर रहेगी। विशेषज्ञ गुलदार के पगचिह्नों (पगमार्क), उसके हमले के तौर-तरीकों और व्यवहार का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं ताकि बिना किसी अन्य जान-माल के नुकसान के उसे जल्द से जल्द ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर या पिंजरे में कैद कर सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

इस पूरी दुखद घटना और उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर की गई त्वरित कार्रवाई को लेकर सिंद्रवाणी गांव के संभ्रांत नागरिकों और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे की मौत का दुख कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन घटना के तुरंत बाद से ही शासन और प्रशासन ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ धरातल पर काम किया है, उसने सरकार के प्रति उनके विश्वास को मजबूत किया है। ग्रामीणों ने बताया कि राजस्व विभाग, पुलिस और वन विभाग के आला अधिकारी लगातार गांव में बने हुए हैं और पीड़ित परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत को पूरा करने का पूरा भरोसा दे रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से यह भी अपील की है कि जब तक गुलदार पूरी तरह से पकड़ा नहीं जाता, तब तक वे शाम के समय अकेले जंगलों की ओर जाने से बचें, बच्चों को अकेला न छोड़ें और गांव में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था बनाए रखें।

रुद्रप्रयाग गुलदार हमला सहायता
रुद्रप्रयाग गुलदार हमला सहायता से प्रभावित परिवार को भविष्य के लिए सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।

बता दें कि रुद्रप्रयाग जनपद के न्याय पंचायत सारी अंतर्गत सिन्द्रवाणी गांव में मंगलवार को दर्दनाक घटना सामने आई जहां पांच साल के बच्चे को गुलदार उसकी मां के हाथ से खींचकर ले गया। इसके बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।  घटना के बाद ग्रामीणों के साथ ही वन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ  की टीमें बच्चे की तलाश में जुट गईं। देर रात गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बच्चे का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला।

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