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Rispana River News: रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

On: June 27, 2026 6:10 PM
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Rispana River News: रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान
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Rispana River News In Hindi: देहरादून की जीवनदायिनी रिस्पना नदी के पुनरुद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। नदी के 15 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन सर्वे कराने, 7 दिनों में कार्ययोजना सौंपने, सिंचाई विभाग द्वारा घाट निर्माण और वन विभाग द्वारा हरित पट्टी विकसित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जानिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीतियों के तहत बनने वाली इस विशेष टास्कफोर्स की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान और यहां की पर्यावरणीय धरोहर से गहराई से जुड़ी ‘रिस्पना नदी’ के दिन अब बहुरने वाले हैं। लंबे समय से प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रही इस ऐतिहासिक नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण और व्यापक सौंदर्यीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ी और निर्णायक मुहिम शुरू कर दी है। देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला मुख्यालय में रिस्पना नदी के कायाकल्प के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, वन विभाग और नगर निगम सहित तमाम संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए स्पष्ट किया कि रिस्पना नदी का पुनरुद्धार केवल एक सरकारी औपचारिकता या विभागीय अभियान नहीं है, बल्कि यह आम जनता की सहभागिता से जुड़ा एक व्यापक, संवेदनशील और अनिवार्य पर्यावरणीय मिशन है, जिसे हर हाल में मिशन मोड पर पूरा किया जाएगा।

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Photo- देहरादून जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान

इस महा-अभियान को धरातल पर उतारने और वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए जिलाधिकारी ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। उन्होंने बैठक में नगर निगम के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए कि रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले लगभग पंद्रह किलोमीटर के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र में गिरने वाले सभी गंदे नालों और अवैध गार्बेज प्वाइंट्स (कूड़ा फेंकने के स्थानों) का तुरंत चिन्हीकरण किया जाए। इस कार्य में पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए उन्होंने पूरे 15 किलोमीटर के क्षेत्र का आधुनिक ‘ड्रोन सर्वे’ (Drone Survey) और स्ट्रेचवार भौतिक सर्वे कराने के आदेश दिए। इस सर्वे के माध्यम से प्रत्येक चिन्हित स्थान पर जमा होने वाले कूड़े की वास्तविक मात्रा, वहां की वर्तमान सफाई व्यवस्था और आवश्यक सुधारात्मक कार्यों का एक विस्तृत वैज्ञानिक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। जिलाधिकारी ने नगर निगम को इस पूरे सर्वे की रिपोर्ट और विस्तृत कार्ययोजना का खाका आगामी 07 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से उनके समक्ष प्रस्तुत करने की समय-सीमा तय कर दी है।

नदी के भौतिक स्वरूप को सुंदर और मजबूत बनाने के लिए सिंचाई विभाग को भी एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अभियंताओं को निर्देशित किया कि वे रिस्पना नदी के तटों पर भव्य और पक्के घाटों के निर्माण, किनारों के सौंदर्यीकरण और आम जनता के बैठने व टहलने के लिए विकसित किए जाने वाले पर्यटन स्थलों की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें। इसके साथ ही, लोक निर्माण विभाग (PWD) को भी इस अभियान में तकनीकी रूप से शामिल किया गया है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत जो भी पिलर्स (खंभे) या अन्य कंक्रीट की संरचनाएं नदी क्षेत्र के भीतर आ रही हैं, उनका एक ऐसा समुचित और उन्नत तकनीकी प्लान प्रस्तुत किया जाए जिससे नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह में रत्ती भर भी बाधा न आए और न ही उसके पारिस्थितिकी तंत्र को कोई नुकसान पहुंचे।

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इस बड़े और बहुविभागीय अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने और विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को सीधे तौर पर कमान सौंपी है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक विभागों के समन्वय से तत्काल एक प्रभावी और शक्तिशाली ‘विशेष टास्कफोर्स’ (Special Task Force) का गठन किया जाए। जिलाधिकारी ने बेहद व्यावहारिक बात कहते हुए अधिकारियों को समझाया कि नदी में कूड़ा गिरने और उसे प्रदूषित करने की इस गंभीर समस्या का कोई भी स्थायी समाधान तब तक संभव नहीं है, जब तक कि दून घाटी के आम नागरिकों के व्यवहार में एक सकारात्मक और पर्यावरण-अनुकूल परिवर्तन न लाया जाए। इसके लिए उन्होंने पूरे जनपद में एक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, स्वयंसेवी संगठनों (NGOs), पर्यावरणविदों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय व जमीनी सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

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Photo- देहरादून जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान

रिस्पना नदी का उद्गम क्षेत्र पहाड़ों की रानी मसूरी के आस-पास से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस अभियान की सफलता के लिए जिलाधिकारी ने नगर पालिका मसूरी को भी विशेष रूप से पाबंद किया है। उन्होंने मसूरी पालिका प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि पहाड़ी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले सभी हिस्सों में चौबीसों घंटे नियमित और चाक-चौबंद सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए। पहाड़ों से आने वाले होटलों या घरों का कोई भी अपशिष्ट, प्लास्टिक या गंदा पानी किसी भी सूरत में नदी के उद्गम स्रोतों में न जाने पाए, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जाए। वहीं दूसरी ओर, नदी के पर्यावरण संरक्षण और उसके जलग्रहण क्षेत्र को दोबारा पुनर्जीवित करने के दृष्टिगत वन विभाग को एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वन विभाग को नदी के दोनों तटों पर बड़े पैमाने पर सघन वृक्षारोपण करने और एक लंबी ‘हरित पट्टी’ (Green Belt) विकसित करने की एक बहुत ही विस्तृत और वैज्ञानिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे मृदा अपरदन को रोका जा सके और नदी को दोबारा अविरल बनाया जा सके।

बैठक के समापन सत्र में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने पूरे अभियान की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए कहा कि रिस्पना नदी के ऐतिहासिक गौरव को वापस लाने के लिए प्रशासन दो स्तरों पर काम करेगा, जिसमें ‘शॉर्ट टर्म’ (अल्पकालिक) और ‘Long Term’ (दीर्घकालिक) दोनों रणनीतियों को समानांतर रूप से क्रियान्वित किया जाएगा। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी और उसके आस-पास बरसों से जमा कूड़े का तत्काल उठान, पुराने गार्बेज प्वाइंट्स का पूर्ण उन्मूलन, नदी में सार्वजनिक रूप से कूड़ा फेंकने पर सख्त कानूनी रोक व चालान की कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं दूसरी तरफ, लॉन्ग टर्म योजना के तहत भव्य घाटों का निर्माण, नदी तटों का स्थायी सौंदर्यीकरण, हरित पट्टी का विकास, आवश्यक मजबूत आधारभूत संरचनाओं का निर्माण और नदी संरक्षण के लिए एक समग्र एवं स्थायी नीति तैयार कर उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को आपसी मतभेद भुलाकर एक टीम के रूप में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर को बचाने की दिशा में हमारा एक ऐतिहासिक कर्तव्य है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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