ताजा खबरें क्राइम लाइफस्टाइल मौसम खेल बॉलीवुड हॉलीवुड जॉब - एजुकेशन स्वास्थ्य राज्य देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस धर्म अन्य

---Advertisement---

Rahul Gandhi News: पीएम आवास के बाहर जब धरने पर बैठ गए राहुल गांधी

On: July 21, 2026 2:32 PM
Follow Us:
Rahul Gandhi News: पीएम आवास के बाहर जब धरने पर बैठ गए राहुल गांधी
---Advertisement---

Rahul Gandhi News: राजधानी दिल्ली के उच्च-सुरक्षा वाले लुटियंस ज़ोन में मंगलवार का दिन देश की राजनीति के लिए एक अभूतपूर्व मोड़ लेकर आया। प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब अचानक हुए एक गुप्त विरोध प्रदर्शन ने पूरे राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने मिलकर प्रधानमंत्री आवास की ओर रुख किया और सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। यह प्रदर्शन नीट-यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में आए संकट को लेकर आयोजित किया गया था। जिस तरह से यह पूरी रणनीति बनाई गई और लागू की गई, उसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर मीडिया तक सभी को चौंका दिया।

संसद के भीतर चल रहे गतिरोध के बीच जब विपक्ष को अपनी बात का व्यापक असर होता नहीं दिखा, तो उन्होंने सीधे देश के सर्वोच्च राजनीतिक ठिकाने के बाहर जाकर विरोध जताने का फैसला किया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह थी कि इसकी भनक आखिरी वक्त तक किसी को नहीं लगने दी गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से शुरू हुआ यह पैदल मार्च बिना किसी शोर-शराबे के प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ा और देखते ही देखते यह एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल गया।

तीन घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा और पीएम आवास के बाहर की स्थिति

मंगलवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे जब आम दिनों की तरह लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक सामान्य चल रहा था, तभी अचानक विपक्षी नेताओं का एक बड़ा जत्था प्रधानमंत्री आवास से महज सौ मीटर की दूरी पर सड़क पर बैठ गया। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल थे। नेताओं के अचानक सड़क पर बैठने की खबर जैसे ही फैली, सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।

image 151
photo- X Congress (x INCIndia)

आनन-फानन में पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सुरक्षा बलों ने तुरंत प्रधानमंत्री आवास की ओर जाने वाले रास्तों को सील कर दिया। धरना स्थल पर माहौल बेहद तनावपूर्ण और ऊर्जा से भरा हुआ था। कार्यकर्ता और नेता एक स्वर में सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। “पीएम और गृह मंत्री इस्तीफा दो” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। सड़क पर बैठे नेताओं ने यह साफ कर दिया कि वे किसी खोखले आश्वासन पर हटने वाले नहीं हैं और जब तक छात्रों के भविष्य को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं होता, उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।

पर्दे के पीछे की सीक्रेट रणनीति: खड़गे के घर से पैदल मार्च

राजनीतिक विश्लेषकों को जिस बात ने सबसे ज्यादा हैरान किया, वह थी इस पूरे प्रदर्शन की गोपनीयता। आमतौर पर किसी भी बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या पीएम आवास के घेराव की खबर खुफिया एजेंसियों और मीडिया को पहले ही लग जाती है। लेकिन इस बार रणनीति इतनी गुप्त रखी गई थी कि सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह से बेखबर रहीं।

सभी प्रमुख नेता पहले मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एकत्र हुए। वहां से बिना किसी सरकारी लाव-लश्कर या गाड़ियों के काफिले के, सभी नेता बेहद सादगी के साथ पैदल ही प्रधानमंत्री आवास की ओर निकल पड़े। जब यह काफिला पीएम आवास से मात्र सौ मीटर की दूरी पर रह गया और नेता सड़क पर बैठने लगे, तब जाकर मीडिया और दिल्ली पुलिस को इस बात की सूचना दी गई। इस अचानक हुए कदम ने पुलिस प्रशासन को रणनीति बनाने का कोई मौका नहीं दिया, जिसके चलते शुरुआती कुछ घंटों तक प्रशासन केवल स्थिति को संभालने की कोशिश में ही लगा रहा।

सरकार की ओर से वार्ता के प्रयास: जितेंद्र सिंह और गृह सचिव की भूमिका

धरना शुरू होने के बाद सरकार में भी भारी खलबली देखने को मिली। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने तुरंत अपने वरिष्ठ प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए भेजा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन खुद धरना स्थल पर पहुंचे ताकि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को समझा-बुझाकर वहां से उठाया जा सके।

image 152
photo- X Congress (x INCIndia)

जितेंद्र सिंह और राहुल गांधी के बीच लगभग बीस मिनट तक बेहद गहन बातचीत हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि पीएम आवास जैसी सुरक्षा-संवेदनशील जगह पर धरना देना उचित नहीं है और वे अपनी मांगों को उपयुक्त मंच पर उठाएं। वार्ता के पहले दौर के बाद जितेंद्र सिंह तुरंत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास पहुंचे और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। गृह मंत्री के साथ परामर्श करने के बाद जितेंद्र सिंह दोबारा राहुल गांधी से बात करने धरना स्थल पर लौटे, लेकिन बातचीत किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंच सकी और गतिरोध बरकरार रहा।

मांगों का गणित: नीट चर्चा से लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक

सरकार और विपक्ष के बीच हुई बातचीत विफल रहने के पीछे मांगों का बढ़ता दायरा था। सरकार की ओर से बाद में जारी बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी के साथ बातचीत में शुरुआत में केवल नीट परीक्षा पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग रखी गई थी। सरकार के अनुसार, वे इस मांग को मानने के लिए तैयार थे और संसद के भीतर चर्चा कराने का भरोसा भी दे रहे थे।

image 153
photo- X Congress (x INCIndia)

हालांकि, सरकार का आरोप है कि जैसे ही उन्होंने पहली मांग पर सहमति जताई, विपक्ष ने अपनी शर्तें बढ़ा दीं। राहुल गांधी और विपक्षी दल अपनी बात पर अड़ गए और उन्होंने दो स्पष्ट मांगें सामने रख दीं। पहली मांग नीट मुद्दे पर संसद में बिना किसी देरी के तुरंत व्यापक चर्चा कराने की थी, और दूसरी मांग इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की थी। विपक्ष का कहना था कि जब तक लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक केवल चर्चा का कोई मतलब नहीं रह जाता।

धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज और पुलिस की कार्रवाई

जब बातचीत के सारे रास्ते बंद हो गए और शाम के साढ़े छह बज गए, तो दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया। लगभग तीन घंटे से चल रहे इस धरने को खत्म कराने के लिए धरना स्थल पर सौ से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए। पुलिस की मंशा साफ थी कि नेताओं को जल्द से जल्द वहां से हटाकर स्थिति को सामान्य किया जाए।

जैसे ही पुलिस बल राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं की ओर बढ़ा, वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य विपक्षी समर्थकों ने नेताओं के चारों तरफ एक मजबूत मानवीय घेरा बना लिया। कार्यकर्ताओं ने ठान लिया था कि वे पुलिस को राहुल गांधी तक नहीं पहुंचने देंगे। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लगभग आधे घंटे तक भारी धक्का-मुक्की हुई। माहौल इतना बिगड़ गया कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज तक करना पड़ा।

image 154
photo- X Congress (x INCIndia)

सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस तीखी झड़प में कई कार्यकर्ताओं को चोटें आईं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने जबरन खींचकर हटाया। आखिरकार, एक दर्जन से अधिक बलिष्ठ पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद राहुल गांधी और अन्य नेताओं को घेरे से बाहर निकाला और उन्हें उठाकर पहले से तैयार खड़ी सरकारी बसों में बैठाया।

हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरे और राजनीतिक असर

शाम ढलते-ढलते पुलिस ने पीएम आवास के बाहर मौजूद लगभग सभी प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शामिल थे। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस की गाड़ियों में भरकर अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।

image 155
photo- X Congress (x INCIndia)

इस पूरी घटना ने देश के राजनीतिक तापमान को अचानक बहुत बढ़ा दिया है। पीएम आवास जैसी जगह पर इस स्तर का प्रदर्शन और देश के शीर्ष विपक्षी नेताओं की इस तरह से हिरासत, भारतीय राजनीति में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है। इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और ज्यादा तीखा होने वाला है।

नीट परीक्षा विवाद: युवाओं का गुस्सा और राजनीतिक मोड़

पीएम आवास के बाहर हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक राजनीतिक दांव नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के लाखों युवाओं का आक्रोश छिपा है। पिछले कुछ समय से नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, अंक प्रणाली में गड़बड़ी और ग्रेस मार्क्स को लेकर देश भर के छात्र सड़कों पर हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं और कई राज्यों में इसको लेकर कानूनी मामले भी चल रहे हैं।

विपक्ष ने इस छात्र असंतोष को बहुत गहराई से महसूस किया है। राहुल गांधी लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि भारत की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। छात्रों के इसी गुस्से को आवाज देने के लिए विपक्ष ने सीधे सत्ता के केंद्र पर हमला बोलने की रणनीति अपनाई। यह प्रदर्शन देश के उन लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए एक संदेश था कि उनका मुद्दा अब देश की राजनीति के केंद्र में आ चुका है।

image 156
photo- X Congress (x INCIndia)

संसद से सड़क तक बढ़ता संघर्ष

इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब संसद के भीतर का विरोध केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहने वाला है। जब संसद में गतिरोध के चलते चर्चा के रास्ते बंद होते दिखाई देते हैं, तो विपक्ष सड़क के संघर्ष को अपना हथियार बना रहा है। सरकार का तर्क है कि विपक्ष हर मुद्दे पर राजनीति कर रहा है और संसद के नियमों को दरकिनार करके केवल अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।


Spain vs Argentina World Cup Final: स्पेन की ऐतिहासिक जीत, दूसरी बार बना विश्व विजेता

दूसरी ओर, विपक्ष का मानना है कि जब सरकार जनता से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर जवाबदेही से भागती है, तो उनके पास विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। संसद के आगामी सत्रों में इस घटना की गूंज सुनाई देना तय है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अब केवल एक प्रदर्शन का नारा नहीं रही, बल्कि यह विपक्ष का एक प्रमुख राजनीतिक एजेंडा बन चुकी है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment