Uttarakhand Congress: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता ने राज्य की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ा दिया है। कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति प्रभाग और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार लगातार दलितों, वंचितों और अल्पसंख्यकों की अनदेखी कर रही है और जनविरोधी नीतियों को जबरन थोप रही है। इस प्रेस वार्ता में केवल आरोप ही नहीं लगाए गए, बल्कि उत्तराखंड सरकार की नीतियों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का बिगुल भी फूंक दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि वे इस लड़ाई को केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी सरकार की नीतियों का पुरजोर विरोध करेंगे।
अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का बड़ा ऐलान: 27 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल ने मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि आगामी 27 जुलाई को उत्तराखंड से कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रभाग और अल्पसंख्यक समाज के हजारों लोग दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एकत्र होंगे और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक विशाल प्रदर्शन करेंगे। मदन लाल ने कहा कि राज्य में दलित और वंचित वर्ग खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस कर रहा है। सरकार उनके अधिकारों का संरक्षण करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाला यह प्रदर्शन केंद्र और राज्य सरकार को यह चेतावनी देगा कि दलित समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के हनन को अब और अधिक बर्दाश्त नहीं करेगा।
एससी-एसटी कानून की अवहेलना और दोहरे रवैये का आरोप
मदन लाल ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां दोहरे मापदंड अपना रही हैं। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई की नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब एससी या एसटी समुदाय से ताल्लुक रखने वाला कोई व्यक्ति किसी अपराध में संलिप्त पाया जाता है या उस पर आरोप लगता है, तो प्रशासन तुरंत हरकत में आकर उसके घर पर बुलडोजर चलाने जैसी सख्त और त्वरित कार्रवाई कर देता है। इसके ठीक उलट, जब इस समुदाय के लोग स्वयं किसी अपराध या जुल्म का शिकार होते हैं, तो अन्य दबंग समाज के आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया बेहद सुस्त पड़ जाती है और उचित कार्रवाई करने से बचा जाता है। यह न्याय प्रणाली का खुल्लम-खुल्ला अपमान और दोहरा रवैया है।
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और भेदभाव की राजनीति पर प्रहार
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुलेमान अंसारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो चुकी है कि आम अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला दिलाने से कतरा रहे हैं और डर का माहौल महसूस कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भारी अभाव है, जिससे गरीब, दलित और अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। सुलेमान अंसारी ने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार असल में समाज को बांटने और भेदभाव की राजनीति करने में व्यस्त है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की जीवन शैली और उनके बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
उत्तराखंड में उफान पर भाजपा और कांग्रेस की सियासी जंग
गौरतलब है कि यह प्रेस वार्ता ऐसे समय में आयोजित की गई है जब उत्तराखंड की राजनीति में राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों को लेकर पहले से ही भारी उथल-पुथल मची हुई है। इन दिनों पेपर लीक मामलों, भर्ती घोटालों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस और भाजपा लगातार आमने-सामने हैं। मात्र दो दिन पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर हल्ला बोला था। इस राजनीतिक खींचतान के बीच यह प्रेस वार्ता विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है जिसके तहत वह सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा का पलटवार और कांग्रेस भवन कूच की गूंज
कांग्रेस के लगातार हमलो के बीच भारतीय जनता पार्टी भी खामोश नहीं बैठी है। हाल ही में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस द्वारा दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिए गए धरने के विरोध में देहरादून में विशाल प्रदर्शन किया था और कांग्रेस भवन की ओर कूच किया था। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी युवाओं को बरगलाने और उनके आड़ में अराजकता फैलाने का काम कर रही है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस नीति या मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह जनता को गुमराह करने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहा है। दोनों प्रमुख दलों के बीच चल रही यह जोर-जमाइश राज्य के राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर रही है।
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अधिकारों की लड़ाई या सियासी शह-मात का खेल?
देहरादून के कांग्रेस मुख्यालय से उठी इस आवाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में दलित, अल्पसंख्यक और जनहित के मुद्दे केंद्र बिंदु बने रहेंगे। 27 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने जा रहा प्रदर्शन इस लड़ाई को एक नया आयाम देगा। एक तरफ जहां कांग्रेस अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों, कानून के समान क्रियान्वयन और शिक्षा के मुद्दे को उठाकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा करार दे रही है। अब देखना यह होगा कि 27 जुलाई का यह जंतर-मंतर प्रदर्शन राज्य सरकार पर कितना राजनीतिक दबाव बना पाता है और जनता इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देखती है।
कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुलेमान अंसारी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने का काम किया, अभिभावक अपने बच्चों के सरकारी संस्थानों में पढ़ाने से डर रहे हैं, सरकार भेदभाव की राजनीति कर रही है।









