Raghu Rai Dies at 83 News In Hindi: भारतीय फोटोग्राफी के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे। 83 वर्षीय रघु राय ने रविवार सुबह दिल्ली में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल भारतीय पत्रकारिता, बल्कि विश्व फोटोग्राफी जगत में एक युग का अंत हो गया है। रघु राय केवल तस्वीरें नहीं खींचते थे, वे समय को एक फ्रेम में कैद कर उसे जीवंत बना देते थे।
एक आकस्मिक शुरुआत से वैश्विक पहचान तक
18 दिसंबर, 1942 को झंग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय का फोटोग्राफी का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। एक सिविल इंजीनियर के रूप में प्रशिक्षित होने के बावजूद, उन्होंने 1965 में अपने बड़े भाई एस. पॉल के प्रभाव में आकर कैमरा थामा। उनकी प्रतिभा इतनी प्रखर थी कि 1966 में वे ‘द स्टेट्समैन’ के मुख्य फोटोग्राफर बन गए।

1970 के दशक में, विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रतिष्ठित मैग्नम फोटोज (Magnum Photos) में शामिल होने के लिए नामांकित किया। वे इस एजेंसी का हिस्सा बनने वाले दुर्लभ भारतीय फोटोग्राफरों में से एक थे।
इतिहास के साक्षी: भोपाल से लेकर इंदिरा गांधी तक
रघु राय के कैमरे ने भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और दर्दनाक पलों को दर्ज किया है। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की उनकी तस्वीरें, विशेष रूप से उस बच्चे की तस्वीर जिसे मिट्टी में दफनाया जा रहा था, आज भी मानवता के इतिहास के सबसे मार्मिक दस्तावेजों में से एक मानी जाती है।

उन्होंने न केवल आपदाओं को, बल्कि भारत की राजनीति और संस्कृति के दिग्गजों को भी अपने लेंस से अमर किया। इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, दलाई लामा और सत्यजीत रे के उनके द्वारा लिए गए पोट्रेट्स आज भी मानक माने जाते हैं। इंदिरा गांधी के बारे में उनका वह मशहूर फ्रेम, जिसमें वे कैबिनेट के बीच खड़ी हैं, अक्सर ‘कैबिनेट का इकलौता मर्द’ के रूप में वर्णित किया जाता है।
फोटोग्राफी नहीं, एक ‘दर्शन’
रघु राय के लिए फोटोग्राफी केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव था। वे अक्सर कहते थे कि वे कैमरे के बिना ध्यान (meditation) नहीं कर सकते। उनकी शैली की सबसे बड़ी विशेषता थी—’साधारण में असाधारण’ को ढूंढना। बनारस की गलियाँ हों या हिमालय की शांत वादियाँ, रघु राय का लेंस हमेशा उस ‘ऊर्जा’ को पकड़ने की कोशिश करता था जो दृश्य के पीछे छिपी होती थी।
पुरस्कार और सम्मान
- 1972: बांग्लादेश युद्ध के दौरान उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
- 2017: फोटोग्राफी में उनके योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’।
- 2009: फ्रांस सरकार द्वारा ‘Officier des Arts et des Lettres’ से सम्मानित।
एक अधूरा अध्याय
अपने अंतिम दिनों तक रघु राय सक्रिय रहे। वे अपनी 57वीं किताब पर काम कर रहे थे। उनकी विरासत 50,000 से अधिक तस्वीरों के संग्रह (Raghu Rai Foundation) के रूप में जीवित रहेगी। आज जब वे चले गए हैं, तो पीछे छोड़ गए हैं वह “तीसरी आँख”, जिसने हमें सिखाया कि देखना और महसूस करना दो अलग बातें हैं।
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