Padma Awards 2026 Winners List News: नई दिल्ली के ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित एक गरिमामयी नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की कई महान विभूतियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस भव्य समारोह के पहले चरण में कुल 66 हस्तियों को देश के इन प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। इस वर्ष देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म पुरस्कार’ के लिए कुल 131 नामों की घोषणा की गई थी, जिनमें से बाकी बचे विजेताओं को अगले चरण में सम्मानित किया जाएगा। सोमवार शाम को आयोजित हुए इस विशेष समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह शाम देश की कला, खेल, संस्कृति, शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले नायकों को समर्पित रही।
धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण और हेमा मालिनी की भावुकता
समारोह की शुरुआत में सबसे पहला और सबसे बड़ा आकर्षण हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे दिग्गज अभिनेताओं में से एक दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र सिंह देओल को दिया गया सम्मान रहा। भारतीय सिनेमा में छह दशकों से अधिक समय तक अमिट छाप छोड़ने वाले ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया। चूंकि धर्मेंद्र का नवंबर 2025 में निधन हो गया था, इसलिए उनकी ओर से यह सम्मान उनकी पत्नी, मशहूर अभिनेत्री और लोकसभा सांसद हेमा मालिनी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों ग्रहण किया।

हल्की गुलाबी रंग की साड़ी में सजीं हेमा मालिनी जब इस गौरवपूर्ण सम्मान को स्वीकार करने मंच की ओर बढ़ीं, तो पूरा गणतंत्र मंडप तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह क्षण पूरे देओल परिवार के लिए गर्व के साथ-साथ अत्यंत भावुक कर देने वाला था। दर्शक दीर्घा में मौजूद धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की छोटी बेटी अहाना देओल अपने दिवंगत पिता के नाम की घोषणा सुनते ही और अपनी मां को यह पुरस्कार लेते देख अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। उनके पति वैभव वोहरा उन्हें संभालते नजर आए।
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक अत्यंत भावुक और खुशी का पल है। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह सम्मान थोड़ा पहले मिला होता और धरम जी स्वयं इसे ग्रहण करते, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहता और उनके करोड़ों प्रशंसक भी और अधिक आनंदित होते। हालांकि, उन्होंने सिनेमा में उनके अभूतपूर्व योगदान को मान्यता देने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया और बताया कि सन्नी देओल, बॉबी देओल और ईशा देओल सहित परिवार का हर सदस्य इस ऐतिहासिक पल से गौरवान्वित है।
खेल जगत की चमक और हरमनप्रीत कौर को पद्मश्री
कला और सिनेमा के साथ-साथ इस समारोह में खेल के मैदान पर भारत का परचम लहराने वाले दिग्गजों को भी उचित सम्मान मिला। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर भुल्लर को खेल के क्षेत्र में उनके शानदार नेतृत्व और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया था। जब वे राष्ट्रपति के समक्ष सम्मान लेने पहुंचीं, तो खेल प्रेमियों और वहां मौजूद अतिथियों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। हरमनप्रीत को मिला यह सम्मान देश की करोड़ों बेटियों के लिए एक प्रेरणा की तरह है, जो खेल की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहती हैं।
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मार्शल आर्ट गुरु के. पजनीवेल का पीएम मोदी को साष्टांग प्रणाम
इस समारोह का एक और सबसे चर्चा में रहने वाला और दिल छू लेने वाला पल तब आया जब पुडुचेरी के प्रसिद्ध पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘सिलंबम’ के गुरु के. पजनीवेल को पद्मश्री पुरस्कार के लिए मंच पर आमंत्रित किया गया। भारत की लुप्त होती पारंपरिक युद्ध कलाओं को जीवित रखने और उनके संरक्षण में जीवन समर्पित करने वाले के. पजनीवेल जैसे ही मंच की ओर बढ़े, उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखते ही जमीन पर लेटकर यानी साष्टांग दंडवत प्रणाम किया। उनकी इस सादगी और भारतीय संस्कारों की अनूठी झलक ने वहां मौजूद सभी लोगों को अचंभित और प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों अपना पद्मश्री पुरस्कार ग्रहण किया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है।
कला, शिक्षा और उद्योग जगत की अन्य प्रमुख हस्तियां
सोमवार को आयोजित हुए इस समारोह में कुल 2 हस्तियों को पद्म विभूषण, 6 को पद्म भूषण और 58 हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। धर्मेंद्र के अलावा संगीत जगत की दिग्गज और प्रसिद्ध भारतीय वायलिन वादक डॉ. एन. राजम को भी कला के क्षेत्र में उनकी असाधारण सेवा के लिए ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया।
पद्म भूषण की श्रेणी में बात करें तो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सार्वजनिक मामलों में उनकी लंबी सेवाओं के लिए इस सम्मान से नवाजा गया। इसके साथ ही विज्ञापन और क्रिएटिव जगत की जानी-मानी दिवंगत हस्ती पीयूष पांडे को मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया, जिसे उनकी पत्नी नीता ने स्वीकार किया। व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले जाने-माने उद्योगपति उदय सुरेश कुमार कोटक को भी ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले डॉ. कल्लपट्टी रामासामी पलनिसामी और कला के क्षेत्र में शतावधानी डॉ. आर. गणेश को भी ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार प्रदान किया गया।

शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पूर्व अध्यक्ष ममिडाला जगदेश कुमार को उनके महत्वपूर्ण सुधारों और अकादमिक योगदान के लिए ‘पद्मश्री’ पुरस्कार मिला। इसके साथ ही देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले सोलर ग्रुप के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल को भी राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। कला और साहित्य के अन्य क्षेत्रों से जुड़े दिग्गजों जैसे रतिलाल मोहनलाल बोरीसागर, स्वामी ब्रह्मदेव, कुमार बोस और कला क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले तागा राम भील को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया। वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को भी उनके पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में कार्यों के लिए पद्मश्री दिया गया।
पद्म पुरस्कारों की गरिमा और उनका महत्व
पद्म पुरस्कार भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कारों में से हैं, जिनकी घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गृह मंत्रालय द्वारा की जाती है। इन पुरस्कारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है—असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए ‘पद्म विभूषण’, उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए ‘पद्म भूषण’ और किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए ‘पद्मश्री’।
वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी थी, जिनमें से पहले भव्य समारोह में 66 हस्तियों को यह सम्मान सौंप दिया गया है। ये पुरस्कार देश के उन अनसुने नायकों, जमीन से जुड़े समाजसेवियों, कलाकारों, वैज्ञानिकों और खिलाड़ियों की पहचान करते हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी जिंदगी खपा दी। राष्ट्रपति भवन का यह आयोजन न केवल इन हस्तियों के सम्मान का गवाह बना, बल्कि इसने देश की विविधता, संस्कृति और प्रतिभा की समृद्ध विरासत को भी दुनिया के सामने पेश किया।











