Harrawala Railway Station News: देशभर के रेलवे नेटवर्क को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वस्तरीय बनाने के संकल्प के साथ शुरू की गई ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के अंतर्गत आज भारतीय रेलवे के इतिहास में एक और स्वर्णिम पन्ना जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में पुनर्विकसित किए गए 75 रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण कर उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इसी गौरवशाली कड़ी में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पास स्थित पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन भी पूरी तरह से नए रंग-रूप और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ जनता के लिए खोल दिया गया है। देहरादून में आयोजित इस भव्य लोकार्पण समारोह के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जो इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभूतपूर्व सौगात के लिए समस्त उत्तराखंड वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का सहर्ष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हर्रावाला रेलवे स्टेशन का यह नया स्वरूप देवभूमि उत्तराखंड के लिए अत्यंत गौरव और गर्व का विषय है। लगभग 19 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से पुनर्विकसित किया गया यह स्टेशन केवल एक कंक्रीट का ढांचा मात्र नहीं है, बल्कि यह दून घाटी की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। यह स्टेशन अब आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए उत्तराखंड की पहली और बेहद खूबसूरत झलक पेश करेगा।
संस्कृति और आधुनिकता का समन्वय: स्टेशन की दीवारों पर जीवंत हुई ऐपण कला
हर्रावाला रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। स्टेशन परिसर की दीवारों, मुख्य द्वारों और प्रतीक्षालयों में उत्तराखंड की पारंपरिक और लोक कला ‘ऐपण’ को बहुत ही खूबसूरती के साथ स्थान दिया गया है। ऐपण कला, जो उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में मांगलिक अवसरों पर गेरू और चावल के आटे (बिस्वार) से बनाई जाती है, वह अब रेलवे स्टेशन पर आने वाले हर यात्री का स्वागत करेगी। यह अभिनव प्रयोग आधुनिकता और पुरातन संस्कृति के सुंदर समन्वय का एक बेजोड़ उदाहरण है।
संस्कृति के इस संरक्षण के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा, सुगमता और आराम के लिए स्टेशन पर विश्वस्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए स्टेशन परिसर में यात्रियों के उठने-बैठने के लिए विशाल और वातानुकूलित प्रतीक्षालय, आधुनिक सूचना डिस्प्ले सिस्टम, दिव्यांगजनों के अनुकूल सुगम रैंप और शौचालय, तथा लिफ्ट व एस्केलेटर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, स्टेशन की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए चप्पे-चप्पे पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये सभी आधुनिक सुविधाएं मिलकर यात्रियों की यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुगम और आरामदायक बनाएंगी, जिससे उन्हें किसी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसा अहसास होगा।

भारतीय रेलवे का अभूतपूर्व परिवर्तन: आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक का युग
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के भीतर चल रहे रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय रेलवे इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े और अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। वह दौर अब अतीत की बात हो चुका है जब रेलवे को केवल एक धीमे और पुराने परिवहन के साधन के रूप में देखा जाता था। आज रेलवे नेटवर्क के विस्तार, पटरियों के दोहरीकरण, सुरक्षा मानकों में सुधार, ट्रेनों की रफ्तार और तकनीकी दक्षता में निरंतर और रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की जा रही है।
इस बदलते और आधुनिक होते भारत की सबसे बड़ी पहचान देश में पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से निर्मित होने वाली ‘वंदे भारत’ और ‘नमो भारत’ जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें हैं। ये ट्रेनें न केवल यात्रियों के समय की बचत कर रही हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की एक नई और बेहद मजबूत पहचान बनकर उभरी हैं। इन ट्रेनों ने भारतीय नागरिकों के यात्रा के तौर-तरीकों और उनके अनुभव को पूरी तरह से वैश्विक मानकों के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है, जो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।
पहाड़ों तक रेल पहुंचने का सपना सच: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना की प्रगति
उत्तराखंड के संदर्भ में बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय को छुआ। उन्होंने कहा कि पहाड़ों के दुर्गम रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाना कभी एक असंभव सपना माना जाता था। दशकों तक इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अटूट मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के मजबूत सहयोग से आज यह सपना बहुत तेजी के साथ धरातल पर साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ की प्रगति का ब्यौरा देते हुए एक बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण रेल लाइन परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। विशाल हिमालयी पहाड़ों के बीच सुरंगों और गगनचुंबी पुलों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना जब पूरी तरह से शुरू होगी, तो यह उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और विशेष रूप से पर्यटन विकास को एक नई और क्रांतिकारी गति प्रदान करेगी। इसके साथ ही, वर्तमान में उत्तराखंड को जो दो वंदे भारत ट्रेनें मिली हैं, उनसे भी राज्य में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आवागमन में विशेष और प्रीमियम सुविधा मिल रही है।
उत्तराखंड को मिला रिकॉर्ड बजट: बुनियादी ढांचे पर 39 हजार करोड़ का निवेश
राज्य के भीतर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा इस चालू वर्ष में उत्तराखंड को रेलवे अवसंरचना विकास (रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) के लिए अब तक का सबसे ऐतिहासिक और रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का रेल बजट आवंटित किया गया है। यह बजट दर्शाता है कि केंद्र की नजर में उत्तराखंड का विकास कितनी प्राथमिकता पर है।
इतना ही नहीं, वर्तमान में संपूर्ण उत्तराखंड राज्य के भीतर अलग-अलग चरणों में लगभग 39,491 करोड़ रुपये से अधिक की विशाल और विभिन्न रेलवे परियोजनाओं पर काम पूरी गति के साथ चल रहा है। इसमें नए रेल मार्गों का सर्वेक्षण, पुराने स्टेशनों का आधुनिकीकरण और सुरक्षा प्रणालियों को अपग्रेड करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि इतनी बड़ी धनराशि और योजनाओं की सौगात मिलना इस बात का सीधा और स्पष्ट प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में उत्तराखंड के प्रति कितना विशेष स्नेह, आदर और राज्य के विकास के प्रति कितनी अटूट प्रतिबद्धता है।








