शिमला/मनाली: हिमाचल प्रदेश में कड़ाके की ठंड और सूखे के लंबे दौर के बाद अब मौसम करवट लेने वाला है। पहाड़ों की रानी शिमला से लेकर जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति तक, हर कोई आसमान की ओर टकटकी लगाए देख रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर दी है। ताजा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से 13 जनवरी के बाद प्रदेश के ऊंचाई और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश का दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।

लंबे समय से ‘स्नो-ड्रॉट’ (बर्फ का सूखा) झेल रहे हिमाचल प्रदेश में यह खबर संजीवनी की तरह है। सेब बागवानों से लेकर पर्यटन व्यवसायी तक, सभी के चेहरे इस पूर्वानुमान से खिल उठे हैं।
यह भी खबर पढें: वजन घटाना है तो आज ही छोड़ें ये 8 चीजें: वेट लॉस कोच ने बताए स्मार्ट और हेल्दी विकल्प
वर्तमान स्थिति: हाड़ कंपा देने वाली ठंड और कोहरा
फिलहाल, पूरा प्रदेश शीतलहर (Cold Wave) की चपेट में है। 12 जनवरी तक की स्थिति के अनुसार, प्रदेश के मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा के कुछ हिस्सों में विजिबिलिटी (दृश्यता) इतनी कम हो गई है कि वाहनों की रफ्तार थम सी गई है।

तापमान की बात करें तो जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति और किन्नौर में पारा शून्य से काफी नीचे लुढ़क चुका है। कुकुमसेरी (Kukumseri) प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान बना हुआ है, जहाँ न्यूनतम तापमान -11.2 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। वहीं, ताबो में पारा -8 डिग्री और कल्पा में -3 डिग्री के करीब है। मनाली, जो पर्यटकों का पसंदीदा स्थल है, वहां भी रात का तापमान माइनस में चल रहा है, जिससे पानी की पाइपें जमने की खबरें सामने आ रही हैं।
पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक: 13 से 15 जनवरी तक कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। इसका असर 13 जनवरी की रात से हिमाचल प्रदेश में दिखने लगेगा।
यह भी खबर पढें: हैदराबाद: बोराबांडा में युवती की चाकू मारकर और पत्थर से कुचलकर हत्या
- ऊंचाई वाले क्षेत्र (High Hills): लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा के पांगी-भरमौर और कुल्लू की ऊंची चोटियों (रोहतांग, अटल टनल) पर 13 से 15 जनवरी के बीच हल्की से मध्यम बर्फबारी होने की संभावना है। यह उन पर्यटकों के लिए खुशखबरी है जो ‘व्हाइट विंटर’ का अनुभव करने के लिए पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।
- मध्य पर्वतीय क्षेत्र (Mid Hills): शिमला, कुफरी, नारकंडा, मनाली और डलहौजी जैसे पर्यटन स्थलों में भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और बर्फबारी के फाहे गिर सकते हैं। यदि तापमान में पर्याप्त गिरावट आई, तो शिमला शहर में सीजन की पहली अच्छी बर्फबारी देखने को मिल सकती है।
- मैदानी इलाके (Plains): कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना में गरज के साथ बारिश होने के आसार हैं। इससे मैदानी इलाकों में छाये घने कोहरे से राहत मिलेगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा, हालांकि ठंड और ठिठुरन बढ़ जाएगी।
सेब बागवानों के लिए उम्मीद की किरण
इस साल सर्दियों में अब तक सामान्य से 80-90% कम बारिश और बर्फबारी हुई है। इस सूखे ने सेब और अन्य गुठलीदार फलों (Stone Fruits) के बागवानों की चिंता बढ़ा दी थी। सेब की अच्छी फसल के लिए ‘चिलिंग आवर्स’ (Chilling Hours – निश्चित समय तक कम तापमान) का पूरा होना बेहद जरूरी होता है। Himachal Pradesh Weather latest news update in hindi
बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 13 जनवरी से शुरू होने वाला यह स्पेल अच्छी बर्फबारी देता है, तो यह सेब की फसल के लिए ‘बूस्टर’ का काम करेगा। बर्फ की परत जमीन में नमी बनाए रखती है, जो गर्मियों में पौधों के काम आती है। सूखे के कारण जो नमी की कमी हो गई थी, उसकी भरपाई के लिए यह बर्फबारी किसी वरदान से कम नहीं होगी।
पर्यटन उद्योग को पंख लगने की उम्मीद
क्रिसमस और न्यू ईयर पर बर्फबारी न होने से हिमाचल का पर्यटन उद्योग थोड़ा निराश था। शिमला और मनाली के होटलों में ऑक्यूपेंसी उम्मीद से कम रही थी। लेकिन अब मौसम विभाग की चेतावनी के बाद होटल व्यवसायियों को उम्मीद है कि वीकेंड पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ेगी।
मनाली के एक होटल व्यवसायी ने बताया, “सैलानी रोज फोन करके पूछ रहे हैं कि बर्फ कब गिरेगी। अगर 14-15 जनवरी को बर्फ गिरती है, तो लोहड़ी और मकर संक्रांति का मजा दोगुना हो जाएगा।” प्रशासन ने भी पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम का अपडेट देखकर ही यात्रा करें और अपनी गाड़ियों को फिसलन भरी सड़कों के लिए तैयार रखें।

चेतावनी और सावधानियां (Advisory)
मौसम विभाग ने येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी करते हुए कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- वाहन चालक: मैदानी इलाकों में घने कोहरे के कारण सुबह और रात के समय गाड़ी चलाते वक्त फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें। ऊंचाई वाले इलाकों में सड़कों पर ‘ब्लैक आइस’ (Black Ice) जमने का खतरा है, इसलिए धीरे और सावधानी से गाड़ी चलाएं।
- सैलानी: जो पर्यटक ट्रैकिंग के शौकीन हैं, वे मौसम खराब होने पर ऊंचाई वाले इलाकों में जाने से बचें। अटल टनल और रोहतांग पास की ओर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की अनुमति और मौसम का हाल जरूर जान लें।
- किसान: बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान में भारी गिरावट आएगी, इसलिए अपने मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए उचित प्रबंध करें।













