हिमाचल प्रदेश में जनवरी का महीना अपनी चरम सर्दी पर है, और पूरा प्रदेश इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। पहाड़ों पर हुई ताज़ा बर्फबारी के बाद अब बर्फीली हवाओं ने मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग (IMD) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 4 प्रमुख जिलों में भीषण शीतलहर (Cold Wave) चल रही है, जबकि प्रदेश के 12 प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों का तापमान शून्य (Minus) से नीचे लुढ़क गया है।

4 जिलों में शीतलहर का प्रकोप
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले जनजातीय जिलों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चंबा जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में न केवल रात का, बल्कि दिन का तापमान भी सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है।

लाहौल-स्पीति और किन्नौर में कई जल स्रोत पूरी तरह से जम चुके हैं। चंद्रभागा नदी का प्रवाह भी ठंड के कारण धीमा पड़ गया है और किनारों पर बर्फ की मोटी परत जम गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को, विशेषकर सुबह और शाम के समय, घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

12 शहर जहां ‘माइनस’ में पहुंचा पारा
बीती रात हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 12 शहरों में न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु (Freezing Point) से नीचे चला गया है।

- केलंग (लाहौल-स्पीति): यह राज्य का सबसे ठंडा स्थान बना हुआ है, जहां न्यूनतम तापमान -12.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है।
- कुकुमसेरी: यहां का तापमान -10.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
- कल्पा (किन्नौर): यहां पारा -6.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
- मनाली: पर्यटकों के पसंदीदा स्थल मनाली में तापमान -2.5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है।
- नारकंडा: शिमला के ऊपरी इलाके नारकंडा में तापमान -3.0 डिग्री सेल्सियस है।
- कुफरी: यहां भी तापमान -1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
- समधो: तापमान -8.2 डिग्री सेल्सियस।
- रिकांगपिओ: तापमान -1.2 डिग्री सेल्सियस।
- सियोबाग: तापमान -0.5 डिग्री सेल्सियस।
- भुंतर: तापमान -0.2 डिग्री सेल्सियस।
- डलहौजी: तापमान -1.0 डिग्री सेल्सियस।
- सुंदरनगर: मैदानी इलाका होने के बावजूद यहां तापमान -0.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

राजधानी शिमला में भी तापमान जमाव बिंदु के बेहद करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे वहां भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
जनजीवन पर व्यापक असर: जम गए नल, सड़कें फिसलन भरी
हिमाचल प्रदेश में भीषण ठंड का सीधा असर आम जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। लाहौल घाटी और ऊपरी शिमला में पानी की पाइपलाइनें जमने से पेयजल संकट गहराने लगा है। लोग आग जलाकर पाइपों को पिघलाने की कोशिश करते देखे जा रहे हैं। इसके अलावा, डीजल वाहनों के इंजन जमने की वजह से परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। सुबह के समय गाड़ियाँ स्टार्ट न होने से लोगों को दफ्तर और गंतव्य तक पहुंचने में देरी हो रही है।

सड़कों पर पाला (Black Ice) जमने की वजह से ड्राइविंग बेहद खतरनाक हो गई है। अटल टनल रोहतांग के आसपास और मनाली-लेह मार्ग पर फिसलन बढ़ गई है। पुलिस प्रशासन ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे फोर-व्हील ड्राइव (4×4) वाहनों का ही प्रयोग करें और रात के समय इन रास्तों पर सफर करने से बचें।
पर्यटकों के लिए एडवाइजरी (Advisory)
बर्फबारी और ठंड का लुत्फ उठाने के लिए हिमाचल पहुंच रहे पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। क्रिसमस और न्यू ईयर के बाद भी मनाली, कसोल और शिमला के होटल पैक चल रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने पर्यटकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं:

- बर्फबारी वाले क्षेत्रों में अपनी गाड़ियां सावधानी से चलाएं।
- गर्म कपड़े, दस्ताने और पर्याप्त दवाइयां साथ रखें।
- ट्रैकिंग के लिए जाने से पहले स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनी ज़रूर देखें।
- नदी-नालों के किनारे जाने से बचें क्योंकि फिसलन के कारण दुर्घटना की संभावना अधिक है।
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किसानों और बागवानों की चिंता
जहाँ एक तरफ यह ठंड पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश में किसानों और बागवानों के लिए यह मिला-जुला असर लेकर आई है। सेब (Apple) की फसल के लिए यह ‘चिलिंग आवर्स’ (Chilling Hours) पूरे करने के लिए अच्छा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी अच्छी बर्फबारी और ठंड होगी, सेब की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होगी। हालांकि, मैदानी इलाकों में कोहरे और पाले की वजह से सब्जियों की फसल को नुकसान होने का डर भी बना हुआ है। कृषि विभाग ने किसानों को फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: अभी राहत के आसार नहीं
शिमला मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मौसम शुष्क लेकिन बेहद ठंडा रहने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कमजोर पड़ने के बाद अब सूखी ठंड (Dry Cold) का प्रकोप बढ़ेगा। मैदानी जिलों जैसे ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा के कुछ हिस्सों में सुबह और रात के समय घना कोहरा (Dense Fog) छाए रहने का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि 10 जनवरी के बाद एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में फिर से बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की संभावना बन सकती है। तब तक, प्रदेशवासियों को इस कड़ाके की ठंड से राहत मिलने के आसार कम ही हैं।












