Uttrakhand News In Hindi: सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0: साहसिक पर्यटन और राष्ट्रवाद का संगम, सीएम धामी ने जांबाजों को सराहाउत्तराखंड की पावन धरा, जिसे हम देवभूमि के नाम से जानते हैं, वर्तमान में न केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, बल्कि अब यह विश्व पटल पर साहसिक खेलों और पर्यटन के नए गंतव्य के रूप में भी उभर रही है। हाल ही में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर (टिहरी) में आयोजित ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ के समापन समारोह में शिरकत की। भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम साहस, अनुशासन और देशप्रेम की एक अनूठी मिसाल पेश कर गया।
1. दुर्गम रास्तों पर साहस की परीक्षा: सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0
सूर्य देवभूमि चैलेंज का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के दुर्गम और पुराने ट्रेकिंग मार्गों को पुनर्जीवित करना और युवाओं में साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि पैदा करना है। इस वर्ष, इस प्रतियोगिता में भारतीय सेना के 100 जांबाज़ जवानों और देश के कोने-कोने से आए 200 साहसिक ट्रैकर्स ने हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण 113 किलोमीटर लंबी हाई एल्टीट्यूड मैराथन थी। यह कोई साधारण दौड़ नहीं थी, बल्कि हिमालय की चुनौतीपूर्ण ऊंचाइयों और दुर्गम रास्तों पर धैर्य की परीक्षा थी। प्रतिभागियों ने बद्री-केदार ट्रेल के अंतर्गत हेलंग से कलगोट, फिर मंडल और अंत में उखीमठ तक की दूरी तय की।

2. ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मार्गों का पुनरुद्धार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन का महत्व केवल खेल तक सीमित नहीं है। प्रतिभागियों ने बद्रीनाथ, केदारनाथ और पंच केदार को जोड़ने वाले उन ऐतिहासिक मार्गों पर यात्रा की, जो सदियों से हमारे पूर्वजों के आध्यात्मिक पथ रहे हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: यह आयोजन पुरानी विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बना।
- आध्यात्मिक जुड़ाव: हिमालय की गोद में दौड़ते हुए ट्रैकर्स ने देवभूमि की दिव्यता को अनुभव किया।

3. भारतीय सेना और राष्ट्र निर्माण में भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि सेना न केवल सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि युवाओं को प्रेरित कर राष्ट्र निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
“ऐसे आयोजन युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करते हैं। जब एक युवा हिमालय की चुनौतियों का सामना करता है, तो उसका आत्मविश्वास वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाने के लिए तैयार होता है।”
4. वाइब्रेंट विलेज और सीमांत क्षेत्रों का विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए सीएम धामी ने ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
- आजीविका के अवसर: साहसिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को होमस्टे, गाइड और अन्य सेवाओं के माध्यम से स्वरोजगार मिल रहा है।
- बुनियादी ढांचा: सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को मजबूती मिली है।
- माणा गांव की नई पहचान: पीएम मोदी द्वारा माणा को ‘देश का पहला गांव’ घोषित करने से इन क्षेत्रों के प्रति दृष्टिकोण बदला है।

5. उत्तराखंड: साहसिक खेलों का वैश्विक केंद्र
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता को रेखांकित करते हुए बताया कि राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।
| गतिविधि | प्रमुख स्थान |
| स्कीइंग और विंटर स्पोर्ट्स | औली की बर्फीली ढलानें |
| रिवर राफ्टिंग और कयाकिंग | ऋषिकेश में गंगा की लहरें |
| वाटर स्पोर्ट्स | टिहरी झील का विशाल विस्तार |
| ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग | मुनस्यारी और उच्च हिमालयी क्षेत्र |
सरकार एंगलिंग, पैराग्लाइडिंग और साइकिलिंग के लिए भी नए सर्किट विकसित कर रही है। पिछले वर्ष पीएम मोदी के हर्षिल-मुखबा प्रवास ने इन क्षेत्रों में शीतकालीन पर्यटन को नई ऊर्जा दी है।

6. प्रतियोगिता का विवरण और मुख्य पड़ाव
मेजर पुष्पेंद्र सिंह (गढ़वाल स्काउट) के अनुसार, यह 113 किमी लंबी यात्रा तीन मुख्य चरणों में संपन्न हुई:
- 16 अप्रैल: बद्रीनाथ में एक्सपो के साथ भव्य शुरुआत।
- 17 अप्रैल: हेलंग से कलगोट तक का पहला कठिन चरण।
- 18-19 अप्रैल: कलगोट से मंडल और अंत में उखीमठ में समापन।
प्रतिभागियों ने इस दौरान न केवल अपनी शारीरिक क्षमता दिखाई, बल्कि हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया।
समृद्ध उत्तराखंड, सशक्त युवा
‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास का एक ब्लूप्रिंट है। यह आयोजन दर्शाता है कि कैसे खेल, पर्यटन और सेना का समन्वय राज्य की आर्थिकी को बदल सकता है। मुख्यमंत्री धामी ने सभी विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तराखंड दुनिया की ‘एडवेंचर कैपिटल’ के रूप में पहचाना जाएगा।








