CM Dhami in Women’s Protest News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउण्ड, देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री, हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जन आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में एक विशाल महिला जन आक्रोश रैली और ऐतिहासिक पदयात्रा का आयोजन किया गया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम धामी ने इसे देश के साथ ‘महापाप’ करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही लखपति दीदी, समान नागरिक संहिता (UCC) और 30% महिला आरक्षण जैसी ऐतिहासिक कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट रखी।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कें गुरुवार को उस समय मातृशक्ति के गगनभेदी नारों और अभूतपूर्व जनसैलाब से गूंज उठीं, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं महिलाओं के अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरे। देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित विशाल ‘महिला जन आक्रोश रैली’ में प्रतिभाग करने पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने न केवल मातृशक्ति का हौसला बढ़ाया, बल्कि रैली के उपरांत हजारों की संख्या में उमड़ी महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के मुख्य केंद्र घंटाघर तक निकाली गई आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए। इस पैदल मार्च के दौरान महिलाओं का उत्साह और आक्रोश देखते ही बन रहा था, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों के हनन के खिलाफ देवभूमि की मातृशक्ति की सजगता को साफ बयां कर रहा था।
रैली में उपस्थित विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधे तौर पर देश की मुख्य विपक्षी पार्टियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की आधी आबादी को लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद में उनका वास्तविक अधिकार व प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) लाया गया था। परंतु, दुर्भाग्यवश लोकसभा में विपक्ष के नकारात्मक रुख और संख्या बल के राजनीतिक जोड़-तोड़ के कारण यह अत्यंत महत्वपूर्ण बिल पारित नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि विपक्ष ने एक सोचे-समझे राजनीतिक षड्यंत्र के तहत देश की करोड़ों माताओं और बहनों का संवैधानिक अधिकार छीनने का घोर पाप किया है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि देश की नारी इस घोर अन्याय के विरुद्ध चुप बैठने वाली नहीं है; वह अपने हक के लिए अवश्य आवाज उठाएगी क्योंकि आज की नारी अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक और सजग हो चुकी है।

विपक्ष के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के पावन और ऐतिहासिक प्रयास को लोकसभा में विफल करके विपक्ष ने देश के लोकतंत्र और मातृशक्ति के साथ एक बड़ा ‘महापाप’ किया है, जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा से मातृशक्ति को केवल एक मतदाता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का सबसे मजबूत आधार माना है। केंद्र सरकार के पिछले वर्षों के कार्यकाल में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐसे ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं, जिनकी कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की महिला केंद्रित फ्लैगशिप योजनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने जहां समाज की सोच को बदला, वहीं ‘उज्ज्वला योजना’ ने करोड़ों गरीब ग्रामीण महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर एक स्वस्थ जीवन दिया है। इसके साथ ही ‘जन धन योजना’ के माध्यम से देश की करोड़ों बहनों को पहली बार बैंकिंग प्रणाली की मुख्यधारा से जोड़कर उनके हाथों में आर्थिक ताकत सौंपी गई है। ‘स्टार्टअप योजना’ के माध्यम से देश में लाखों महिला उद्यमियों को खड़ा किया गया है, जबकि ‘लखपति दीदी योजना’ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता का नया सवेरा लेकर आई है। इसके अतिरिक्त, मुस्लिम बहनों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए ‘ट्रिपल तलाक’ जैसी सदियों पुरानी कुप्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर महिलाओं को स्वाभिमान से आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। प्रधानमंत्री की इसी प्रेरणा का परिणाम है कि आज देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं; चाहे वह आदिवासी समाज की बेटी का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति) तक पहुंचना हो या देश के सबसे महत्वपूर्ण वित्त मंत्रालय की कमान केंद्रीय मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जैसी सशक्त महिला के हाथों में होना हो।
समारोह के मंच से उत्तराखंड सरकार की उपलब्धियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी राज्य सरकार भी देवभूमि की मातृशक्ति के कल्याण और उनके सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से समर्पित होकर कार्य कर रही है। उत्तराखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में ऐतिहासिक ’30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण’ (Horizontal Reservation) को कानूनी रूप से लागू कर उनके पैरों को मजबूती दी है। महिलाओं की सुरक्षा, उनके मान-सम्मान और पारिवारिक अधिकारों की रक्षा हेतु उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना है जिसने अपनी विधानसभा में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) को पारित कर धरातल पर लागू किया है।
आर्थिक मोर्चे पर महिलाओं की प्रगति की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘ग्रामीण आजीविका मिशन’, ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ और ‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’ के त्रिकोण के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं को सीधे स्वरोजगार और कुटीर उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं के धरातलीय और सुखद परिणामों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ घोषणा की कि उत्तराखंड सरकार के गंभीर प्रयासों के चलते प्रदेश में अब तक दो लाख पैंसठ हजार (2.65 लाख) से अधिक साधारण ग्रामीण महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर सफलतापूर्वक ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं।
(For more news apart from CM Dhami participated in the women’s public outrage rally and criticized the opposition Uttarakhand News in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)







