Bageshwar National Paragliding Competition inaugurated News: उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद अंतर्गत कपकोट के ऐतिहासिक केदारेश्वर मैदान में राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरसी प्रतियोगिता का शानदार शुभारंभ हुआ है। नौ फरवरी तक चलने वाले इस साहसिक खेल महाकुंभ में भारतीय सेना के विंग और देश भर के 96 शीर्ष पैराग्लाइडर पायलट हिस्सा ले रहे हैं। जानिए कपकोट-बागेश्वर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की इस बड़ी प्रशासनिक व स्थानीय मुहिम की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।
उत्तराखंड की हसीन वादियों और ऊंचे बर्फीले पर्वतों के बीच बसे देवभूमि के सीमांत जनपद बागेश्वर से साहसिक खेल प्रेमियों के लिए एक बेहद गौरवशाली और रोमांचक खबर सामने आई है। कपकोट क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले केदारेश्वर मैदान में आज से बहुप्रतीक्षित ‘राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग एक्यूरसी प्रतियोगिता’ का बेहद भव्य और रंगारंग शुभारंभ हो गया है। आगामी नौ फरवरी तक आयोजित होने वाली इस अनूठी और हाई-प्रोफाइल खेल प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से आए कुल छियानवे (96) बेहद अनुभवी पैराग्लाइडर पायलट और भारतीय सेना (Indian Army) के विशेष रूप से प्रशिक्षित जांबाज पायलट आसमान की ऊंचाइयों में अपने साहस, संतुलन और तकनीकी कौशल का अद्भुत प्रदर्शन कर रहे हैं। इस वृहद आयोजन का मुख्य और दूरगामी उद्देश्य उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) की असीम संभावनाओं को पंख लगाना, स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करना और पहाड़ों के प्रतिभावान युवाओं को खेल व रोजगार के नए और अप्रत्याशित अवसर प्रदान करना है।
इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की शुरुआत होते ही कपकोट का आसमान रंग-बिरंगे पैराग्लाइडर्स से सराबोर हो उठा है, जिसे देखने के लिए आस-पास की घाटियों से हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और खेल प्रेमी केदारेश्वर मैदान में उमड़ रहे हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान हवा के रुख को भांपते हुए जब एक के बाद एक जांबाज पायलटों ने पहाड़ियों की चोटी से उड़ान भरी और पूरी सटीकता (एक्यूरसी) के साथ मैदान के ठीक बीचोबीच निर्धारित लैंडिंग पॉइंट पर कदम रखे, तो पूरा परिसर तालियों और गगनभेदी गूंज से सराबोर हो उठा। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, पैराग्लाइडिंग की ‘एक्यूरसी’ विधा में पायलटों की केवल उड़ान भरने की क्षमता की जांच नहीं होती, बल्कि विपरीत हवाओं के बीच उनके मानसिक संतुलन, हवा के दबाव को समझने की उनकी तकनीकी दक्षता और एकदम सटीक स्थान पर सुरक्षित उतरने के उनके धैर्य की बेहद कड़ी परीक्षा ली जाती है। इस प्रतियोगिता में शामिल भारतीय सेना के पायलटों की मौजूदगी ने स्थानीय युवाओं के भीतर देश सेवा और साहसिक खेलों के प्रति एक नया जोश फूंकने का काम किया है।
इस ऐतिहासिक आयोजन पर अपनी प्रसन्नता और क्षेत्रीय विकास का विजन साझा करते हुए कपकोट के क्षेत्रीय विधायक ने कहा कि केदारेश्वर मैदान में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता का होना पूरे बागेश्वर जिले के लिए एक युगांतरकारी मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस प्रकार के बड़े और राष्ट्रीय आयोजनों से न केवल स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीटों से प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और प्रेरणा मिलेगी, बल्कि भविष्य में उनके लिए गाइड, ट्रेनर और एडवेंचर गाइड के रूप में रोजगार के कई नए द्वार भी खुलेंगे। विधायक ने दृढ़ता के साथ कहा कि उनका संकल्प कपकोट और बागेश्वर की इस खूबसूरत घाटी को केवल राज्य स्तर तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इस तरह के सफल आयोजनों के माध्यम से इसे बहुत जल्द राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक स्थापित पैराग्लाइडिंग हब के रूप में नई पहचान दिलाना है, जिससे यहां होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।
प्रतियोगिता के तकनीकी पहलुओं और युवाओं के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्य प्रशिक्षक जगदीश जोशी ने बताया कि यह आयोजन बागेश्वर के युवाओं के लिए एक चलती-फिरती खुली खेल यूनिवर्सिटी की तरह है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, तकनीकी रूप से मजबूत असम, मेघालय और सेना के विंग्स से जो शीर्ष पायलट यहां पहुंचे हैं, उनकी फ्लाइंग टेकनीक, हवा में ग्लाइडर को मोड़ने के तरीके और लैंडिंग के समय शरीर के संतुलन को बनाए रखने की कला को हमारे स्थानीय युवा बहुत बारीकी से देख और सीख रहे हैं। जगदीश जोशी का मानना है कि उत्तराखंड के युवाओं में पहाड़ों पर रहने के कारण जन्मजात रूप से साहस और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता होती है; बस उन्हें सही तकनीकी मार्गदर्शन और इस तरह के मंचों की आवश्यकता होती है, जो यह प्रतियोगिता बखूबी पूरा कर रही है।
वहीं दूसरी ओर, इस आयोजन को लेकर स्थानीय युवाओं में भी एक अभूतपूर्व उत्साह और नई उमंग साफ देखी जा सकती है। कपकोट के ही रहने वाले एक ऊर्जावान स्थानीय युवा मयंक चौबे ने प्रतियोगिता को लेकर अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके जैसे अनगिनत युवाओं के लिए यह पहला मौका है जब वे अपने घर के ठीक सामने देश के सबसे बेहतरीन पायलटों को लाइव एक्शन में देख पा रहे हैं। मयंक ने बेहद सकारात्मक लहजे में कहा कि इस प्रतियोगिता से उन्हें न केवल पैराग्लाइडिंग की बारीकियों को समझने का अवसर मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के बीच एडवेंचर स्पोर्ट्स (साहसिक खेलों) को करियर के रूप में अपनाने को लेकर भी रुझान और आकर्षण बहुत तेजी से बढ़ा है। युवा अब केवल पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय अपनी वादियों में ही पर्यटन के नए आयाम गढ़ने की सोच रहे हैं।
चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों और सुरम्य प्राकृतिक छटा से घिरे कपकोट में इस खेल महाकुंभ को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन और खेल विभाग ने सुरक्षा के भी बेहद कड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंतजाम किए हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आयोजन स्थल पर डॉक्टरों की विशेष टीम, अत्याधुनिक एम्बुलेंस और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों को पूरी तरह मुस्तैद रखा गया है। मौसम विभाग से भी पल-पल की हवा की गति और बादलों की स्थिति का अपडेट लिया जा रहा है ताकि पायलटों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। नौ फरवरी तक चलने वाले इस रोमांचक सफर में अभी कई और रिकॉर्ड बनने और टूटने की उम्मीद है, लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है कि कपकोट के केदारेश्वर मैदान से उठी यह एडवेंचर की गूंज आने वाले समय में उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग में एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत करने जा रही है।
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