Uttarakhand News: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी देहरादून सहित पूरे प्रदेश में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर, टिहरी, पौड़ी और नैनीताल के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 2 जुलाई को राज्यभर में 66 जगहों पर व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी कमान खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी संभालेंगे। जानिए इस महा-तैयारी और प्रशासनिक अलर्ट की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।
देवभूमि में मानसून की दस्तक
उत्तराखंड में तपती और उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। देवभूमि में मानसून ने अपनी धमाकेदार दस्तक दे दी है, जिसके साथ ही राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के तमाम पहाड़ी और मैदानी इलाकों में झमाझम और मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मानसून की इस पहली ही फुहार ने जहां मौसम को खुशनुमा बना दिया है, वहीं दूसरी ओर पर्वतीय जिलों में संभावित आपदाओं का खतरा भी बढ़ा दिया है। इस बदलते और चुनौतीपूर्ण मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने बेहद गंभीरता दिखाई है। विभाग ने देहरादून और बागेश्वर जिले में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका व्यक्त करते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी कर दिया है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो यह खतरा अभी टलने वाला नहीं है, क्योंकि आगामी 2 जुलाई को भी देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जैसे संवेदनशील पर्वतीय जनपदों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बरकरार रखा गया है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।
मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
मौसम विभाग की इस गंभीर चेतावनी और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने जनपदवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बेहद जरूरी और भावुक अपील जारी की है। जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि जब तक बहुत अधिक आवश्यक न हो, तब तक वे किसी भी प्रकार की लंबी या पहाड़ी यात्रा करने से पूरी तरह बचें। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे समय-समय पर मौसम की अद्यतन (अपडेटेड) जानकारी लेते रहें और स्थानीय प्रशासन व आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से सचेत किया है कि बरसात के इस शुरुआती दौर में नदी-नालों, उफनते गधेरों और पहाड़ों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) संभावित क्षेत्रों के आसपास जाने की भूल कतई न करें और अत्यधिक सतर्कता बरतें। इसके साथ ही, उन्होंने जिले के सभी संबंधित विभागों और आपातकालीन अधिकारियों को ‘अलर्ट मोड’ में रहने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटने हेतु सभी आवश्यक जीवन रक्षक तैयारियां पूरी रखने के कड़े निर्देश दिए हैं। जनता से यह भी कहा गया है कि यदि कहीं भी कोई अप्रिय घटना या जलभराव की स्थिति दिखे, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन या नजदीकी आपदा नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराएं।
मानसून के दौरान पहाड़ों में आने वाली बाढ़, भूस्खलन और क्लाउड बर्स्ट (बादल फटना) जैसी वास्तविक आपदाओं के समय प्रशासनिक प्रतिक्रिया को जांचने के लिए उत्तराखंड सरकार एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। आगामी 02 जुलाई को समूचे राज्य में एक व्यापक और ऐतिहासिक ‘मॉक ड्रिल’ (आपदा अभ्यास) का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए शासन स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस महा-अभ्यास की अंतिम चरण की तैयारियों और रणनीतियों का सटीक आकलन करने के लिए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के सचिवालय स्थित ‘राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र’ में एक उच्च स्तरीय ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण एक्सरसाइज के दौरान राज्य के सभी 13 जनपदों के जिलाधिकारियों और विभिन्न रेखीय विभागों (लाइन डिपार्टमेंट्स) जैसे सेना, पुलिस, स्वास्थ्य, वन और लोनिवि की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली, आपसी तालमेल, आपातकालीन वायरलेस व सैटेलाइट संचार, आधुनिक खोज व बचाव उपकरणों की उपलब्धता तथा राहत शिविरों की पूरी कार्ययोजना का बहुत ही बारीकी से और विस्तृत परीक्षण किया गया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े और सीधे निर्देशों के क्रम में आगामी 02 जुलाई को आयोजित होने वाली यह मॉक ड्रिल उत्तराखंड के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक मॉक ड्रिल होने जा रही है। राज्य के सभी 13 जनपदों में मानसून की चुनौतियों का पूरी ताकत और सूझबूझ से सामना करने के लिए अलग-अलग 66 रणनीतिक स्थानों पर एक साथ इस मॉक ड्रिल को अंजाम दिया जाएगा। इस बार के अभियान की सबसे खास और महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन 66 स्थानों को इस अभ्यास के लिए चुना गया है, उनमें से लगभग 95 प्रतिशत स्थान बिल्कुल नए हैं, जहां पहले कभी ऐसा अभ्यास नहीं हुआ था। इसका फायदा यह होगा कि नए दुर्गम क्षेत्रों में भी प्रशासन की पहुंच और तैयारियों का वास्तविक टेस्ट हो सकेगा। सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस पूरी मॉक ड्रिल का बहुत बारीकी से निरीक्षण करेंगे और कंट्रोल रूम में बैठकर अधिकारियों की त्वरित निर्णय क्षमता को परखेंगे।
इस महा-अभियान के उद्देश्यों और इसकी रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह साफ विजन है कि आपदा के समय किसी भी विभाग के बीच आपसी समन्वय (कॉर्डिनेशन) की कमी नहीं होनी चाहिए। इसी विजन के तहत विभिन्न सरकारी और अर्धसरकारी रेखीय विभागों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने, आपदा राहत उपकरणों और मानव संसाधनों का संकट के समय बेहतर से बेहतर और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने तथा वास्तविक आपदा के समय धरातल पर राहत और बचाव कार्यों को अत्यधिक प्रभावी और त्वरित तरीके से संचालित करने के लिए इस मॉक ड्रिल का खाका तैयार किया गया है।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने आगे जोड़ते हुए कहा कि इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल एक पारंपरिक सरकारी अभ्यास या कोरम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव जीवन की रक्षा से है। इसके माध्यम से हम यह देखना चाहते हैं कि जब अचानक कोई वास्तविक आपदा आएगी, तो हमारे विभिन्न विभागों की तत्परता, सूचना तंत्र की गति, संसाधनों को मौके पर पहुंचाने की रफ्तार और अधिकारियों की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी सुदृढ़ है। उन्होंने एक बहुत ही व्यावहारिक बात साझा करते हुए कहा कि किसी भी प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत आधारशिला उसकी ‘पूर्व तैयारी’ होती है। यदि हमारे सभी विभाग मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही अपनी सभी व्यवस्थाओं, कमियों और वायरलेस प्रणालियों का जमीनी परीक्षण कर लें और उनमें सुधार कर लें, तो हम किसी भी बड़ी से बड़ी आपदा के दौरान होने वाली जन-धन की हानि को बहुत हद तक कम करने में कामयाब हो सकते हैं।
आपदा सचिव ने अपनी बात को विराम देते हुए विश्वास जताया कि 2 जुलाई को होने वाले इस व्यापक और सघन अभ्यास के माध्यम से हमारे सिस्टम में छिपी हुई संभावित कमियों, व्यावहारिक चुनौतियों और संचार संबंधी बाधाओं की समय रहते सटीक पहचान हो सकेगी। इन कमियों की पहचान होने के तुरंत बाद उनका तकनीकी और प्रशासनिक समाधान किया जाएगा, ताकि जब वास्तव में मानसून के चरम पर कोई आपातकालीन परिस्थिति पैदा हो, तब हमारी खोज, राहत एवं बचाव टीमें अधिक प्रभावी, पूरी तरह से समन्वित और बिना किसी देरी के त्वरित रूप से धरातल पर एक्शन ले सकें और देवभूमि के प्रत्येक नागरिक व श्रद्धालु की जान की मुस्तैदी से रक्षा की जा सके।







