Dehradun News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रशासनिक तंत्र ने समाज के सबसे संवेदनशील और आश्रित वर्ग की सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह (राजकीय संप्रेक्षण गृह) और किशोरी गृह का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य इन आवासीय संस्थानों में संचालित हो रही दैनिक व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेना और वहां रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता को परखना था। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आवासियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, परिसर की स्वच्छता तथा उनके सामाजिक पुनर्वास से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की बेहद बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक मानवीय, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए।
इस स्थलीय निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण और भावुक पहलू तब सामने आया जब जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान बाल सुधार गृह पहुंचे। वहां उन्होंने निवासरत बालकों के बीच बैठकर उनसे बेहद आत्मीय और सरल तरीके से सीधा संवाद स्थापित किया। जिलाधिकारी ने बच्चों से उनकी दैनिक दिनचर्या, खेलकूद, खान-पान, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और उनकी शिक्षा-दीक्षा के बारे में विस्तार से बातचीत की। बच्चों की मनोदशा और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही जिला प्रोबेशन अधिकारी को एक बेहद महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि बाल सुधार गृह के भीतर तुरंत एक विशेष ‘बेसिक लर्निंग प्रोग्राम’ (बुनियादी शिक्षा कार्यक्रम) का संचालन शुरू किया जाए। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य इन बच्चों की शैक्षिक और बौद्धिक क्षमता का सर्वांगीण विकास करना होना चाहिए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से दोबारा जुड़ सकें। इसके साथ ही, उन्होंने संस्थान में रह रहे सभी बालकों का एक बेहद विस्तृत और वैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार कर जल्द से जल्द उनके समक्ष प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सरकारी संस्थानों में रह रहे इन बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संस्थान में रहने वाले प्रत्येक बालक की नियमित रूप से पेशेवर मनोवैज्ञानिकों के माध्यम से काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए, साथ ही उनके स्वास्थ्य का समय-समय पर गहन परीक्षण भी कराया जाए। ऐसा करने से न केवल उनके मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके शारीरिक विकास की बाधाएं भी दूर होंगी। डॉ. आशीष चौहान ने इस बात को रेखांकित किया कि इन बच्चों को केवल चारदीवारी के भीतर रखना प्रशासन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और व्यक्तित्व विकास से संबंधित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों को बहुत प्रभावी ढंग से संचालित किया जाना चाहिए, जिससे वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

इसके बाद जिलाधिकारी ने केदारपुरम परिसर में ही संचालित नारी निकेतन और किशोरी गृह का भी गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उनका पूरा ध्यान वहां की सुरक्षा व्यवस्थाओं और संवासिनियों की निजता पर केंद्रित रहा। उन्होंने पूरे परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों, सुरक्षा गार्डों की तैनाती और आगंतुकों के रजिस्टर की जांच करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा अभेद्य बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारी निकेतन में रहने वाली किशोरियों और संवासिनियों की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को पाबंद किया कि नारी निकेतन की सभी आवासियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए और यदि किसी को विशेष इलाज की आवश्यकता हो, तो उसे तुरंत उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इन महिलाओं और किशोरियों की जो भी व्यावहारिक आवश्यकताएं या शिकायतें हैं, उनका समाधान पूरी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ सुनिश्चित किया जाए।
संस्थानों के भौतिक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पूरे परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी खुद घूमकर अवलोकन किया। उन्होंने शौचालय, भोजनालय और शयनकक्षों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी कि मौसम के बदलाव को देखते हुए मच्छरों और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए नियमित रूप से फॉगिंग और कीटनाशकों का छिड़काव कराया जाए। एक स्वच्छ, स्वास्थ्यप्रद और सुरक्षित वातावरण बनाए रखना इन संस्थानों के प्रबंधकों की पहली जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि इन संस्थानों में रहने वाले बच्चों और महिलाओं को हर हाल में एक बेहतर और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मानवीय कार्य में और राजकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही या कोताही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान समय में केदारपुरम स्थित इस पूरे परिसर के विभिन्न विंगों में बड़ी संख्या में आवासी रह रहे हैं। मौजूदा समय में नारी निकेतन में कुल एक सौ साठ संवासिनियां आश्रय ले रही हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी सीधे तौर पर महिला कल्याण विभाग की है। वहीं, बाल सुधार गृह में वर्तमान में सात किशोर निवासरत हैं, जिनकी शिक्षा और काउंसलिंग पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, किशोरी संप्रेक्षण गृह में कुल बारह किशोरियां रह रही हैं। इतनी बड़ी संख्या में मौजूद आवासियों के लिए भोजन, कपड़े, दवाइयां और सुरक्षा की व्यवस्था को बिना किसी बाधा के सुचारू रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे और बेहतर करने के लिए जिलाधिकारी ने खुद कमान संभाली है। जिला प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि आगामी दिनों में भी इस तरह के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे ताकि व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार बना रहे और किसी भी आवासी को असुविधा का सामना न करना पड़े।
देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह और किशोरी गृह का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने संवासिनियों और बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पुनर्वास व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। बालकों की शैक्षिक क्षमता बढ़ाने के लिए बेसिक लर्निंग प्रोग्राम शुरू करने और सभी का विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने पर बल दिया गया।







