Uttarakhand News: उत्तराखंड में बेरोजगार और प्रशिक्षित युवाओं का अपनी मांगों को लेकर संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में, वर्षों से लंबित पड़ी जायज मांगों को लेकर ‘मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड’ के बैनर तले प्रदेश भर के लैब तकनीशियनों ने मंगलवार को राजधानी देहरादून में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में जुटे युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए सचिवालय कूच किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन तकनीकी युवाओं का आक्रोश इस बात को लेकर है कि वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
सचिवालय के बाहर तीखी नोकझोंक और सड़क पर धरना
पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के तहत जैसे ही आंदोलनकारी लैब तकनीशियनों का हुजूम सचिवालय की ओर बढ़ा, पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए पहले से ही भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। सचिवालय से कुछ दूरी पर ही पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और युवाओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने पर आक्रोशित बेरोजगार लैब तकनीशियन वहीं सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदेश सरकार की रोजगार नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था पर युवाओं के भविष्य की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि और आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी
सड़क पर चल रहे इस उग्र प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारियों ने संवेदनशीलता का परिचय भी दिया। संगठन के सदस्यों ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के हालिया निधन पर गहरा दुख प्रकट करते हुए धरना स्थल पर ही दो मिनट का मौन रखा और दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जैसे-जैसे प्रदर्शन का समय बीतता गया और सड़क पर जाम की स्थिति बनने लगी, पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया। आंदोलन को और अधिक उग्र होता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन वाहनों में बैठाया और उन्हें वहां से हटाकर सीधे एकता विहार स्थित आधिकारिक धरना स्थल पर पहुंचा दिया।
एकता विहार में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान
पुलिस द्वारा धरना स्थल पर पहुंचाए जाने के बाद भी लैब तकनीशियनों का हौसला कम नहीं हुआ। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि वे अपनी मांगों के पूरा होने तक पीछे नहीं हटेंगे। इसके बाद सभी प्रशिक्षित लैब तकनीशियन एकता विहार धरना स्थल पर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। संघ ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक उनका यह संघर्ष और क्रमिक अनशन लगातार जारी रहेगा।
राज्य गठन के 26 वर्षों बाद भी सेवा नियमावली का अभाव
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशीष खाली ने सरकार और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन से पूर्व से ही यहां बीएससी एमएलटी (मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) का पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम से हर साल सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी डिग्री और डिप्लोमा पूरा करके पास आउट हो रहे हैं। लेकिन अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार लैब तकनीशियनों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी सेवा नियमावली तैयार नहीं कर पाई है। स्थायी रोजगार की कोई निश्चित व्यवस्था न होने के कारण हजारों प्रशिक्षित युवा आज दर-दर की ठोकरें खाने और बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और आम जनता की परेशानी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में लैब तकनीशियनों की भारी कमी है। पहाड़ों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तकनीकी स्टाफ न होने के कारण वहां की गरीब जनता को खून, पेशाब जैसी बेहद सामान्य और आवश्यक जांचों के लिए भी मीलों दूर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों का कीमती समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही उन पर भारी आर्थिक बोझ भी पड़ता है। यदि स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां की जाएं, तो पहाड़ों की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार हो सकता है।
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संगठन की प्रमुख मांगें और निजीकरण का विरोध
बेरोजगार लैब तकनीशियन संघ ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने एक स्पष्ट एजेंडा रखा है। उनकी प्रमुख मांगों में सबसे पहले इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड्स (IPHS) के मानकों के अनुरूप प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में लैब तकनीशियनों के नए पदों का सृजन करना शामिल है। इसके अलावा, रिक्त पड़े पदों पर बिना किसी देरी के वर्षवार मेरिट (Seniority) के आधार पर जल्द से जल्द सीधी भर्ती शुरू करने की मांग की गई है। संघ ने यह भी मांग उठाई है कि जो अभ्यर्थी सालों से भर्ती का इंतजार करते-करते अपनी अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं, उन्हें सरकार द्वारा एकमुश्त विशेष छूट दी जाए। इसके साथ ही, सरकारी प्रयोगशालाओं को पीपीपी मोड या निजी हाथों में सौंपने (निजीकरण) की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाई जाए।
शासन को अंतिम चेतावनी और उग्र आंदोलन की रूपरेखा
अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे संगठन ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर शासन के चक्कर काट रहे थे, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले। अब युवाओं के सब्र का बांध टूट चुका है। यदि सरकार ने समय रहते उनकी इन न्यायसंगत मांगों पर कोई त्वरित और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे प्रदेश स्तर पर और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। संगठन ने साफ किया है कि यदि भविष्य में आंदोलन के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा आती है या स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।








