CM Vijay TVK News 2026: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने जोसेफ विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। तमिलनाडु की राजनीति में लगभग छह दशकों से चले आ रहे द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के द्विध्रुवीय वर्चस्व को तोड़ते हुए विजय राज्य के 9वें मुख्यमंत्री बने हैं। उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने इस विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़े दल के रूप में अपनी जगह बनाई और गठबंधन के सहयोगियों के साथ सत्ता की कमान संभाली।

मुख्यमंत्री विजय ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली के आदेश
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विजय ने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए तीन महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए। उनके प्रशासन का पहला आधिकारिक आदेश 200 यूनिट मुफ्त बिजली का रहा, जो घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है। इसके अलावा उन्होंने राज्य में बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या से निपटने के लिए एक विशेष ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ के गठन और महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन और विशेष बल बनाने की फाइलों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य ‘सच्चा धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय’ प्रदान करना है।

चुनावी जीत और गठबंधन का गणित
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजे चौंकाने वाले रहे। विजय की पार्टी TVK ने 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटों पर जीत दर्ज की। बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से महज 10 सीटें दूर रहने के कारण, विजय ने कांग्रेस, VCK, भाकपा (CPI), माकपा (CPM) और मुस्लिम लीग (IUML) के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई है। इस गठबंधन को कुल 120 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। 13 मई तक उन्हें सदन में अपना बहुमत साबित करना होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की यह जीत पारंपरिक कैडर आधारित राजनीति के बजाय उनके विशाल फैन बेस ‘विजय मक्कल अय्यक्कम’ और युवाओं के बीच उनकी डिजिटल लोकप्रियता का परिणाम है।

‘थलापति’ से मुख्यमंत्री तक का सफर
विजय का राजनीति में प्रवेश और सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने अपनी फिल्मों ‘कथ्थी’, ‘मेर्सल’ और ‘सरकार’ के माध्यम से लगातार भ्रष्टाचार और व्यवस्था की खामियों पर प्रहार किया था, जिसने उन्हें युवाओं का मसीहा बना दिया। शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में विजय भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वह किसी ‘शाही वंश’ से नहीं आए हैं, बल्कि एक सहायक निर्देशक के बेटे के रूप में गरीबी और अपमान झेलते हुए यहाँ तक पहुंचे हैं। उन्होंने समर्थकों से कहा, “अब शक्ति का केवल एक ही केंद्र होगा, और वह मैं हूँ,” जो उनके कड़े प्रशासनिक रुख की ओर इशारा करता है।
पहली कैबिनेट और भविष्य की चुनौतियां
विजय की कैबिनेट में 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली है, जिनमें से अधिकांश पहली बार मंत्री बने हैं। अनुभवी नेता के.ए. सेंगोट्टैयन को शामिल कर उन्होंने अनुभव और युवा जोश का संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि, विजय के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। पिछली सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर ‘श्वेत पत्र’ लाने का वादा करते हुए उन्होंने पारदर्शी शासन का संकल्प लिया है। गठबंधन सहयोगियों की आकांक्षाओं को साधना और मुफ्त बिजली जैसे बड़े चुनावी वादों के लिए बजट आवंटित करना उनके कार्यकाल की शुरुआती परीक्षाएं होंगी। इसके साथ ही, पारिवारिक विवादों और विरोधियों के हमलों के बीच सरकार की स्थिरता बनाए रखना भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगा।









