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Uttarakhand conducts digital cleanliness test News: उत्तराखंड में स्वच्छता की डिजिटल परीक्षा, क्यूआर कोड तय करेगा शहरों की रैंकिंग और जमीनी हकीकत

On: May 10, 2026 6:17 PM
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Uttarakhand conducts digital cleanliness test News: उत्तराखंड में स्वच्छता की डिजिटल परीक्षा, क्यूआर कोड तय करेगा शहरों की रैंकिंग और जमीनी हकीकत
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Uttarakhand conducts digital cleanliness test News: उत्तराखंड के शहरों को सुंदर और स्वच्छ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल की शुरुआत की है। अब प्रदेश के शहरों की स्वच्छता का प्रमाण पत्र सरकारी फाइलों से नहीं, बल्कि सीधे जनता के फीडबैक से तय होगा। ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत राज्य के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, पर्यटन केंद्रों और बस अड्डों पर विशेष क्यूआर (QR) कोड लगाए गए हैं। इस तकनीक के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने फोन से कोड स्कैन कर उस क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है। यह कदम न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देगा, बल्कि नगर निगमों और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली को सीधे जनता की अदालत में खड़ा कर देगा। देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड के लिए यह योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ हर साल करोड़ों पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं, जिनके लिए स्वच्छता एक बड़ा मानक है।

इस नई व्यवस्था के तहत फीडबैक की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है ताकि हर वर्ग का व्यक्ति इसमें भागीदारी कर सके। जब कोई नागरिक क्यूआर कोड स्कैन करता है, तो उसके सामने स्वच्छता से जुड़े कुछ बुनियादी सवाल आते हैं, जैसे कचरे का उठाव समय पर हो रहा है या नहीं, सड़कों पर गंदगी तो नहीं है, और सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति कैसी है। प्राप्त फीडबैक सीधे निदेशालय स्तर पर मॉनिटर किया जा रहा है, जिससे अधिकारियों को यह पता चल जाता है कि किस शहर के किस वार्ड में सफाई कर्मचारी ढिलाई बरत रहे हैं। इस डिजिटल फीडबैक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘रियल टाइम’ डेटा पर आधारित है, जिससे अब कागजी आंकड़ों के जरिए शहरों को नंबर वन दिखाना संभव नहीं होगा। अब शहरों की स्टार रेटिंग और रैंकिंग पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि वहाँ रहने वाले लोग व्यवस्था से कितने संतुष्ट हैं।

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Photo X Uttarakhand CM Dhami cleanliness abhiyan

उत्तराखंड में स्वच्छता रेटिंग को जमीनी हकीकत से जोड़ने के पीछे सरकार का उद्देश्य जवाबदेही तय करना है। अक्सर देखा जाता था कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान नगर निकाय केवल मुख्य सड़कों और वीआईपी इलाकों की सफाई पर ध्यान केंद्रित करते थे, जबकि गलियों और दूर-दराज के वार्डों में गंदगी का अंबार लगा रहता था। अब क्यूआर कोड फीडबैक प्रणाली लागू होने से हर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। जिन शहरों की फीडबैक रेटिंग खराब होगी, वहां के संबंधित अधिकारियों और सफाई निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके विपरीत, अच्छा प्रदर्शन करने वाले निकायों को सरकार की ओर से अतिरिक्त फंड और पुरस्कार दिए जाएंगे। यह प्रतिस्पर्धात्मक माहौल शहरों को अपनी सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए प्रेरित करेगा और ‘क्लीन देवभूमि’ के सपने को साकार करने में मदद करेगा।

इस अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने जनता से अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की है। सरकार का मानना है कि स्वच्छता केवल प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। क्यूआर कोड के माध्यम से आम आदमी को एक शक्तिशाली हथियार दिया गया है जिससे वह अपने शहर की तस्वीर बदल सकता है। आने वाले समय में इस सिस्टम को और अधिक विस्तार देने की योजना है, जिसमें फीडबैक के साथ-साथ कूड़ा निस्तारण की फोटो अपलोड करने का विकल्प भी जोड़ा जा सकता है। यह पहल न केवल उत्तराखंड के शहरों को ‘स्मार्ट’ बनाएगी, बल्कि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी राज्य की छवि को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी। अब समय आ गया है कि प्रदेश का हर नागरिक अपने मोबाइल का उपयोग कर अपने शहर की स्वच्छता का प्रहरी बने।

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