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Why is Gujhiya made on Holi?: होली में क्यों बनाई जाती है गुझिया, जानें इसका इतिहास और धार्मिक महत्व

On: February 23, 2026 8:39 AM
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Why is Gujhiya made on Holi? News In Hindi: गुझिया का सफर: इतिहास और उद्गम, गुझिया केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय त्योहारों, विशेषकर होली और दिवाली की पहचान है।
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Why is Gujhiya made on Holi? News In Hindi: गुझिया का सफर: इतिहास और उद्गम, गुझिया केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि भारतीय त्योहारों, विशेषकर होली और दिवाली की पहचान है। मैदा, मावा और चीनी के मेल से बनी यह अर्धचंद्राकार मिठाई अपने स्वाद और बनावट के कारण सदियों से भारतीय रसोई का हिस्सा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी पसंदीदा गुझिया का इतिहास भारत की सीमाओं से भी आगे जाता है?

गुझिया कहाँ का व्यंजन है?

मूल रूप से गुझिया को उत्तर भारत का मुख्य व्यंजन माना जाता है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसकी जड़ें सबसे गहरी हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र (मथुरा और वृंदावन) में इसे होली के अनिवार्य प्रसाद और पकवान के रूप में देखा जाता है। हालांकि, भारत के अलग-अलग राज्यों में इसके नाम और बनाने के तरीके बदल जाते हैं:

  • महाराष्ट्र: यहाँ इसे ‘करंजी’ कहा जाता है।
  • बिहार: यहाँ इसे ‘पिड़किया’ के नाम से जाना जाता है।
  • कर्नाटक और आंध्र प्रदेश: यहाँ इसे ‘कज्जीकायालु’ या ‘कर्जिकाई’ कहते हैं।
  • गोवा: यहाँ ईसाई समुदाय इसे ‘नेवरी’ के रूप में बनाता है।
Gujiya recipe

गुझिया का प्राचीन इतिहास

गुझिया के इतिहास को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं, लेकिन इसके विकास को तीन प्रमुख चरणों में देखा जा सकता है:

1. प्राचीन भारतीय संदर्भ (पूप)

प्राचीन भारत में मैदे या गेहूं के आटे को घी में तलकर और उसमें गुड़ या शहद भरकर बनाए जाने वाले पकवानों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें ‘पूप’ कहा जाता था। हालांकि गुझिया का आधुनिक स्वरूप मध्यकाल में निखर कर आया।

2. मध्यकालीन तुर्की और मध्य एशिया का प्रभाव (समोसा और बकलवा)

कई खाद्य इतिहासकार मानते हैं कि गुझिया का संबंध मध्य एशियाई देशों के ‘समोसा’ और बकलवा से है। 13वीं शताब्दी के आसपास, जब मध्य एशिया से व्यापारी और शासक भारत आए, तो वे अपने साथ भरवां पेस्ट्री (Stuffed Pastry) बनाने की कला भी लाए। तुर्की में ‘सम्बुसक’ (Sambusak) नाम का एक व्यंजन बनाया जाता था, जो धीरे-धीरे भारत में आकर दो रूपों में बंट गया— नमकीन रूप में ‘समोसा’ और मीठे रूप में ‘गुझिया’।

3. मुगल काल और शाही रसोई

मुगल काल के दौरान गुझिया के वर्तमान स्वरूप (मावा और ड्राई फ्रूट्स वाली फिलिंग) को काफी लोकप्रियता मिली। शाही रसोइयों ने इसमें केसर, इलायची और महंगे मेवों का प्रयोग शुरू किया, जिससे यह आम लोगों के साथ-साथ राजघरानों की भी पसंद बन गई। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र में गुझिया को कलात्मक आकार देने की परंपरा यहीं से मजबूत हुई।

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सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

गुझिया का इतिहास केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्ति मार्ग से भी जुड़ा है। 17वीं शताब्दी के आसपास, ब्रज के मंदिरों में भगवान कृष्ण को ‘छप्पन भोग’ लगाने की परंपरा में गुझिया को एक प्रमुख स्थान मिला। चूंकि होली भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम का उत्सव है, इसलिए उनके पसंदीदा दुग्ध उत्पादों (मावा/खोया) से बनी इस मिठाई को होली का आधिकारिक व्यंजन मान लिया गया।

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आज भी, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के गांवों में गुझिया बनाने के लिए लकड़ी के पारंपरिक सांचों का उपयोग किया जाता है, जिन पर लोक कला की सुंदर नक्काशी होती है। यह इस बात का प्रमाण है कि गुझिया केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति का एक जीवंत हिस्सा है।

Gujiya Recipe: How to make Gujiya Recipe for Holi at Home | Homemade Gujiya  Recipe - Times Food

वहीं गुझियां को बनाने के लिए आपको कौन सी सामग्री चाहिए यहां देखिए

आवश्यक सामग्री: मैदा 500 ग्राम, देसी घी (मोयन के लिए) 100 ग्राम, ताजा मावा या खोया 400 ग्राम, पिसी हुई चीनी या बूरा 250 ग्राम, सूजी 50 ग्राम, बारीक कटे हुए काजू और बादाम 1/2 कप, चिरौंजी 2 बड़े चम्मच, कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल 1/2 कप, हरी इलायची पाउडर 1 छोटा चम्मच, और तलने के लिए पर्याप्त घी या तेल।

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