Kedar Singh Koshyari Bageshwar News: कहते हैं कि सच्चा प्रेम अमर होता है, लेकिन उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जो इस कहावत को हकीकत में चरितार्थ कर रही है। बदलते दौर में जहां रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है, वहीं 89 वर्षीय एक पूर्व सैनिक ने अपनी दिवंगत पत्नी के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाएं।
कपकोट तहसील के फरसाली वल्ली तिलघर गांव के रहने वाले केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद न केवल उनकी यादों को संजोया है, बल्कि उन्हें अपने घर में ‘देवी’ का दर्जा देकर उनका मंदिर स्थापित कर दिया है।
केदार सिंह का 1962 से शुरू हुआ था अटूट प्रेम का सफर
केदार सिंह कोश्यारी भारतीय सेना के एक जांबाज सिपाही रहे हैं। उनका और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी का साथ साल 1962 में शुरू हुआ था। केदार सिंह ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया और लंबे समय तक अरुणाचल प्रदेश जैसी कठिन सीमाओं पर तैनात रहे। सेना की ड्यूटी के कारण वे अक्सर घर से दूर रहते थे, लेकिन लक्ष्मी देवी ने घर की जिम्मेदारी संभाली और केदार सिंह के लिए एक मजबूत स्तंभ बनी रहीं।

दूरी और समय कभी उनके प्यार के बीच दीवार नहीं बन पाए। केदार सिंह बताते हैं कि सेना की नौकरी के दौरान लक्ष्मी के पत्रों का इंतजार और उनकी यादें ही उन्हें सरहद पर डटे रहने की शक्ति देती थीं।
केदार सिंह पर शादी समारोह में अचानक टूटा साथ
जीवन के 57 साल एक-दूसरे के साथ सुख-दुख साझा करने के बाद, नियति को कुछ और ही मंजूर था। 7 दिसंबर 2019 का वह काला दिन केदार सिंह कभी नहीं भूल सकते। एक शादी समारोह में शामिल होने के दौरान लक्ष्मी देवी का अचानक निधन हो गया। जिस जीवनसाथी के साथ उन्होंने बुढ़ापे की हर शाम बिताने का सपना देखा था, वह अचानक उन्हें अकेला छोड़कर चली गईं।
इस सदमे ने केदार सिंह को पूरी तरह झकझोर दिया। वे अंदर से टूट चुके थे। उनकी कोई संतान नहीं थी, ऐसे में लक्ष्मी देवी ही उनका संसार थीं। लेकिन एक फौजी का दिल हार मानना नहीं जानता था; उन्होंने तय किया कि वे अपनी पत्नी को खुद से कभी दूर नहीं होने देंगे।
जब केदार सिंह का घर बना मंदिर और पत्नी बनीं ‘मूर्ति’
पत्नी के निधन के एक साल बाद, यानी 2020 में केदार सिंह ने एक अनोखा निर्णय लिया। उन्होंने जयपुर के मूर्तिकारों से संपर्क किया और अपनी पत्नी की एक आदमकद (Life-size) मूर्ति तैयार करवाई। यह मूर्ति बिल्कुल वैसी ही दिखती है जैसी लक्ष्मी देवी जीवित अवस्था में थीं।

केदार सिंह ने अपने घर के एक हिस्से को मंदिर का रूप दिया और वहां पूरी श्रद्धा के साथ पत्नी की मूर्ति स्थापित की। उनके लिए यह केवल पत्थर की एक मूर्ति नहीं है, बल्कि उनकी पत्नी की साक्षात उपस्थिति है।
दिनचर्या: सुबह आरती और रात को दिनभर का हाल
89 साल की उम्र में भी केदार सिंह की दिनचर्या किसी पुजारी की तरह है। वे रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और सबसे पहले अपनी पत्नी के मंदिर में जाते हैं।
- रोजाना पूजा: वे अपनी पत्नी की मूर्ति को नए वस्त्र पहनाते हैं, माला चढ़ाते हैं और सुबह-शाम विधिवत आरती करते हैं।
- दिल की बातें: केदार सिंह मंदिर में बैठकर घंटों अपनी पत्नी की मूर्ति से बातें करते हैं। वे उन्हें बताते हैं कि आज गांव में क्या हुआ, उन्होंने क्या खाया और वे उन्हें कितना याद करते हैं।
- अकेलापन हुआ दूर: केदार सिंह का कहना है कि जब से उन्होंने मूर्ति स्थापित की है, उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं होता। वे कहते हैं, “लोग कहते हैं वह मर चुकी हैं, लेकिन मेरे लिए वह आज भी यहीं हैं। मैं अपनी हर खुशी और दुख उनके साथ साझा करता हूँ।”
समाज के लिए एक प्रेरणा
आज के दौर में जहां बुजुर्गों को अक्सर अकेला छोड़ दिया जाता है या रिश्तों में वह गहराई नहीं दिखती, वहां केदार सिंह की यह प्रेम कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। केदार सिंह वर्तमान में अपने भाई के परिवार के साथ रहते हैं, लेकिन उनका पूरा जीवन अपनी पत्नी की भक्ति में ही बीतता है।
गांव के लोग केदार सिंह के इस समर्पण को देखकर हैरान भी हैं और उनके प्रति गहरा सम्मान भी रखते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रेम मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकता है और यदि भावनाएं सच्ची हों, तो यादें ही जीवन जीने का सबसे बड़ा आधार बन जाती हैं।









