Uttarakhand Sports Policy News: उत्तराखंड की धामी सरकार ने सूबे के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक पहल की है। खेल मंत्री रेखा आर्य ने विभागीय बैठक में निर्देश दिए हैं कि नई खेल नीति तैयार करते समय आम जनता, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों से ऑनलाइन माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए जाएं। इसके साथ ही, केंद्र की राष्ट्रीय खेल नीति के समावेश, उत्तराखंड के पारंपरिक खेलों को विशेष स्थान देने, अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी और राज्य में खेल विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जानिए उत्तराखंड नई खेल नीति 2026 की पूरी जमीनी खेल रिपोर्ट।
उत्तराखंड खेल नीति में जनभागीदारी की अनूठी पहल
देवभूमि उत्तराखंड के युवाओं के भीतर छुपी खेल प्रतिभाओं को वैश्विक मंचों पर चमकाने और राज्य की खेल व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी व आधुनिक बनाने की दिशा में धामी सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश की खेल नीति को और अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनभागीदारी आधारित बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नया और अनूठा प्रयोग शुरू किया है। अब उत्तराखंड की नई खेल नीति बंद कमरों में केवल नौकरशाहों द्वारा तय नहीं की जाएगी, बल्कि राज्य का प्रत्येक नागरिक, सुदूरवर्ती गांवों में खेल रहे प्रतिभावान खिलाड़ी और खेल प्रेमी इस नीति के निर्माण में सीधे अपनी महत्वपूर्ण राय दे सकेंगे। मंगलवार को देहरादून में आयोजित एक उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में सूबे की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि नई नीति का अंतिम मसौदा तैयार करने से पहले आम जनता की रायशुमारी को अनिवार्य बनाया जाए। सरकार की इस लोकतांत्रिक पहल से राज्य के खेल इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने दिए ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित करने के निर्देश
विभागीय बैठक के संपन्न होने के बाद मीडिया से औपचारिक बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने इस पूरी योजना के विजन को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की नई खेल नीति कैसी होनी चाहिए, उसमें बुनियादी ढांचे, बजट, खिलाड़ियों की डाइट और उनके सामाजिक-आर्थिक संरक्षण को लेकर क्या-क्या नई चीजें शामिल की जानी चाहिए—इस पर अब आम लोग सीधे अपनी बात शासन तक पहुंचा सकेंगे। खेल मंत्री ने इसके लिए खेल विभाग के आला अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप और ईमेल आईडी आधारित फीडबैक सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी नागरिक आसानी से अपनी राय दर्ज करा सके। सरकार की योजना यहीं नहीं रुकती; खेल मंत्री ने एलान किया है कि जिन नागरिकों या खेल विशेषज्ञों के सुझाव नीति को बेहतर बनाने में सबसे उपयुक्त और कारगर साबित होंगे, उन्हें नई खेल नीति के आधिकारिक हिस्से के रूप में शामिल किया जाएगा और ऐसे उत्कृष्ट विचार देने वाले लोगों को राज्य सरकार द्वारा एक भव्य समारोह में सार्वजनिक रूप से सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाएगा।
राष्ट्रीय खेल नीति और देवभूमि के पारंपरिक खेलों का बेजोड़ संगम
नई खेल नीति के मुख्य स्वरूप और उसके लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि इस बार की नीति में भारत सरकार की राष्ट्रीय खेल नीति (National Sports Policy) के मुख्य सिद्धांतों और आधुनिक मानकों का पूरी तरह से समावेश किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे राज्य के खिलाड़ियों को केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं और राष्ट्रीय खेल अकादमियों के साथ सीधे तालमेल बिठाने में कोई परेशानी नहीं होगी। इसके साथ ही, इस नीति की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यह होगी कि इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति का हिस्सा रहे पारंपरिक और क्षेत्रीय खेलों को एक विशेष और आधिकारिक स्थान दिया जाएगा। पहाड़ों के पारंपरिक खेल जैसे कि बाग-बकरी, गिल्ली-डंडा, मलखंभ, रस्साकशी और स्थानीय तीरंदाजी व कुश्ती जैसी विधाओं को आधुनिक खेल नियमों के तहत संस्थागत रूप दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने से न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी, बल्कि ग्रामीण और सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों के उन गरीब बच्चों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा जो आधुनिक महंगे खेल उपकरणों को खरीद पाने में असमर्थ हैं।
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पदक विजेताओं को ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी और अकादमियों में समायोजन
उत्तराखंड के उन जांबाज खिलाड़ियों के लिए भी यह बैठक बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेहनत से देवभूमि का नाम रोशन किया है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने बैठक में साफ लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में देश और राज्य के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी विभागों में ‘आउट ऑफ टर्न’ (बिना किसी देरी के सीधे) नौकरी देने के मामले में जो भी प्रशासनिक या विधिक औपचारिकताएं बची हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर काम करके तुरंत पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पदकों की चमक फीकी पड़ने से पहले खिलाड़ियों को उनके सम्मान के अनुरूप रोजगार मिलना चाहिए ताकि वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसके अलावा, कैबिनेट मंत्री ने एक और बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए बताया कि इन पदक विजेता और अनुभवी खिलाड़ियों में से एक बड़े समूह को राज्य भर में स्थापित की जा रही नई खेल अकादमियों (Sports Academies) में मुख्य प्रशिक्षक (कोच) और प्रशासनिक पदों पर समायोजित करने की तैयारी पूरी की जा रही है। इससे हमारे सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव का सीधा लाभ राज्य के उभरते हुए नौनिहालों को मिल सकेगा।

खेल विश्वविद्यालय की स्थापना और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा
राज्य में खेल संस्कृति को अकादमिक और वैज्ञानिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रस्तावित ‘उत्तराखंड खेल विश्वविद्यालय’ (Sports University) की तैयारियों को लेकर भी बैठक में गंभीर मंथन हुआ। खेल मंत्री ने विश्वविद्यालय की भूमि आवंटन, पाठ्यक्रम निर्माण और बजटीय प्रावधानों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गति को और तेज किया जाए ताकि आगामी सत्र से यहाँ खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान और कोचिंग से जुड़े विश्वस्तरीय पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू किया जा सके। इस अत्यंत महत्वपूर्ण विभागीय बैठक में राज्य के खेल जगत के कई आला अधिकारी और नीति-निर्माता मुस्तैदी से उपस्थित रहे, जिनमें विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक दीप्ति सिंह, अपर निदेशक अजय अग्रवाल तथा महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई शामिल थे। इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने खेल मंत्री के समक्ष वर्तमान में चल रहे विभिन्न खेल स्टेडियमों के निर्माण कार्य और आगामी राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी से जुड़ी तैयारियों की एक विस्तृत डिजिटल प्रस्तुति भी दी, जिस पर खेल मंत्री ने समयबद्धता और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के कड़े निर्देश जारी किए।









