Uttarakhand Police: उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाने का संकेत दिया है। देहरादून के रेसकोर्स स्थित पुलिस लाइन में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस विभाग में एक हजार छह सौ नए पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का ऐलान किया है। सीमांत और संवेदनशील पर्वतीय राज्य में कानून-व्यवस्था की मजबूती और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के दोहरे उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय पुलिस तंत्र को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में अपराध नियंत्रण, नशे के अवैध नेटवर्क पर प्रहार और तेजी से पैर पसार रहे डिजिटल अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस बल में मानव संसाधन का विस्तार बेहद आवश्यक है।

पुलिस स्मृति दिवस के इस गरिमामय अवसर पर राज्य की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ाकर मातृभूमि की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले जांबाज जवानों के अदम्य साहस को नमन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एक शहीद केवल अपने परिवार की ही धरोहर नहीं होता, बल्कि वह पूरे राष्ट्र और समाज का गौरव होता है। राज्य का प्रत्येक नागरिक इन रणबांकुरों के त्याग और समर्पण का सदैव ऋणी रहेगा। त्योहारों और विषम मौसम के बीच अपने परिवारों से दूर रहकर दिन-रात नागरिकों की हिफाजत में मुस्तैद रहने वाले पुलिसकर्मियों का अनुशासन पूरे समाज के लिए अनुकरणीय प्रेरणा है।
देहरादून के रेसकोर्स स्थित ऐतिहासिक पुलिस लाइन मैदान में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड के पावन अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के युवाओं और पुलिस बल के लिए बड़े नीतिगत फैसलों का ऐलान किया है। कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीद पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून के राज को सुदृढ़ बनाने और पुलिस व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जल्द ही पुलिस विभाग में 1,600 नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। इस महत्वपूर्ण घोषणा से प्रदेश के उन हजारों युवाओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है जो लंबे समय से उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बनकर देवभूमि की सेवा करने का सपना संजोए बैठे हैं।
मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में उपस्थित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, जवानों और शहीद परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील सीमांत और पर्यटन केंद्रित राज्य में पुलिस केवल एक बल नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा का सबसे मजबूत भरोसा है। इस भरोसे को और सशक्त करने के लिए जमीनी स्तर पर कर्मियों की संख्या बढ़ाना समय की अनिवार्य मांग है। 1,600 नए पदों की यह भर्ती प्रक्रिया न केवल थानों और चौकियों में कार्यबल की कमी को दूर करेगी, बल्कि कानून और व्यवस्था की निगरानी को हर इलाके में प्रभावी बनाएगी।
भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के दैनिक कार्य संचालन और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई अहम योजनाओं की घोषणा की। मामलों की पारदर्शी और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी विवेचकों को अत्याधुनिक जांच किट उपलब्ध कराई जाएगी। आधुनिक फोरेंसिक और प्राथमिक जांच सामग्री से लैस होने के बाद विवेचना अधिकारी घटना स्थल पर ही सूक्ष्म साक्ष्य सुरक्षित कर सकेंगे, जिससे अदालतों में मुकदमों को मजबूत आधार मिलेगा और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाना संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त ड्यूटी के सिलसिले में देहरादून आने वाले पुलिसकर्मियों की आवासीय सुविधा के लिए राजधानी में एक भव्य पुलिस ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा और पुलिस अस्पताल का आधुनिकीकरण कर उसे अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जाएगा।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने परेड का निरीक्षण करने के उपरांत शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक शहीद पुलिसकर्मी केवल अपने परिवार का संबल नहीं होता, बल्कि उसका त्याग पूरे राष्ट्र और समाज की साझी धरोहर होता है। जब आम नागरिक अपने घरों में त्योहारों का उल्लास मना रहे होते हैं, तब हमारे पुलिसकर्मी अपने बच्चों और परिजनों से सैकड़ों मील दूर चौराहों, घाटों और सीमाओं पर मुस्तैद खड़े रहते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद निरीक्षक धर्मेंद्र मलिक की धर्मपत्नी सुनीता और शहीद उप निरीक्षक विनोद पंवार की धर्मपत्नी नीलम को विशेष रूप से सम्मानित कर राज्य सरकार की ओर से सदैव उनके साथ खड़े रहने का विश्वास दिलाया।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में राज्य के सामने उभरती नई सुरक्षा चुनौतियों का भी गहन विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि परंपरागत अपराधों की रोकथाम के साथ-साथ आज पुलिस के सामने दो सबसे बड़े खतरे हैं, पहला नशीले पदार्थों का फैलता जाल और दूसरा तेजी से पैर पसारता साइबर अपराध। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि देवभूमि उत्तराखंड में नशे के सौदागरों के लिए कोई जगह नहीं है। नशा युवा पीढ़ी के भविष्य और सामाजिक ताने-बाने को भीतर से खोखला करता है, इसलिए पुलिस को नशा तस्करों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर प्रहार करना होगा। इसके साथ ही साइबर ठगी और डिजिटल फ्रॉड से आमजन की गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए राज्य पुलिस को सूचना तकनीक के उन्नत उपकरणों और निरंतर प्रशिक्षण से लैस किया जा रहा है।

चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब और कैंची धाम जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में पुलिस बल की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव कराने में उत्तराखंड पुलिस की भूमिका अतुलनीय रही है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद जवानों ने मानवीय संवेदनाओं के साथ अपनी ड्यूटी निभाई है, जिससे पूरे देश में देवभूमि की छवि और प्रतिष्ठा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
लगातार ड्यूटी और काम के भारी दबाव को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस जवानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष बल दिया। उन्होंने पुलिस के शीर्ष नेतृत्व को निर्देश दिया कि जवानों के मानसिक तनाव को कम करने और उनकी कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए समय-समय पर तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं, खेलकूद गतिविधियां और नियमित योग सत्र अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं। एक तनावमुक्त और स्वस्थ पुलिसकर्मी ही जनहित में अधिक संवेदनशीलता और तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकता है।
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