Uttarakhand Monsoon: उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही प्राकृतिक आपदा का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने राज्य के 7 संवेदनशील जिलों के लिए अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मूसलाधार बारिश के चलते अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी समेत तमाम प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। भूस्खलन के कारण ऋषिकेश-बद्रीनाथ और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग सहित कुल 173 मुख्य व ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे चारधाम यात्रा आंशिक रूप से प्रभावित हुई है। जानिए पहाड़ी रास्तों पर उफनते नालों में फंसी गाड़ियों और आपदा प्रबंधन विभाग के बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन्स की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
देवभूमि में आसमानी आफत: मानसून के आते ही बदला हालात
उत्तराखंड में मानसूनी बादलों के बरसने के साथ ही पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। पहाड़ों में रुक-रुक कर हो रही मूसलाधार बारिश अब स्थानीय निवासियों और चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी आफत बन चुकी है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में पिछले 36 घंटों से जारी भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे चारों तरफ जलभराव और भूस्खलन का खौफनाक नजारा देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने संयुक्त रूप से बुलेटिन जारी कर राज्य के 7 सबसे संवेदनशील जिलों के लिए अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में रहने वाले लोगों और यात्रा कर रहे पर्यटकों को बेहद सतर्क रहने तथा बहुत जरूरी न होने पर पहाड़ों की यात्रा न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
उफान पर नदियां: खतरे के निशान के करीब पहुंची अलकनंदा और भागीरथी
लगातार हो रही बारिश का सबसे भयानक असर उत्तराखंड की जीवनदायिनी नदियों पर पड़ा है। केदारघाटी और बद्रीनाथ संभाग के ऊपरी कैचमेंट एरिया में अत्यधिक पानी बरसने से मंदाकिनी और अलकनंदा नदियां अपने पूरे रौद्र रूप में आ चुकी हैं। हरिद्वार और ऋषिकेश के तटीय इलाकों में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा को पार कर गया है, जिससे प्रशासन ने तटीय बस्तियों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी का वेग इतना तीव्र हो चुका है कि घाटों के आस-पास बने सुरक्षा दीवारें दरकने लगी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे-छोटे बरसाती नाले, जो गर्मियों में सूखे पड़े थे, आज विशालकाय नदियों की तरह बह रहे हैं। नदियों के इस उफान से बांधों और जल विद्युत परियोजनाओं के जलाशयों में पानी का दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते कई बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जो मैदानी इलाकों में बाढ़ के खतरे को और बढ़ा रहा है।

सड़कों पर मलबे का साम्राज्य: 173 सड़कें पूरी तरह से ठप
पहाड़ों में भूस्खलन (Landslide) के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) और सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण लिंक रोड तक कुल 173 मुख्य सड़कें मलबे के आने से पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) तोताघाटी, सिरोबगड़ और लामबगड़ के पास पहाड़ों से गिरे विशालकाय बोल्डरों के कारण बंद पड़ा है। इसी तरह, गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर मलबा आने से वाहनों के पहिए थम गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण चारधाम यात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु बीच रास्ते में अलग-अलग सुरक्षित पड़ावों पर फंसे हुए हैं। प्रशासन की टीमें मशीनों के साथ मलबे को हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों और खराब विजिबिलिटी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
तेज बहाव के बीच फंसी गाड़ियां: रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो आए सामने
उत्तराखंड के कई जिलों से दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जहां उफनते बरसाती नालों को पार करने के दुस्साहस में कई छोटी-बड़ी गाड़ियां पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह फंसती हुई नजर आ रही हैं। पिथौरागढ़ और चम्पावत मार्ग पर एक यात्री बस उफनते नाले के बीचों-बीच फंस गई, जिसे स्थानीय युवाओं और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) के जवानों ने रस्सियों के सहारे कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। देहरादून के विकासनगर और ऋषिकेश के तटीय रास्तों पर भी कुछ कारें पानी के तेज वेग में बहने से बाल-बाल बचीं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने सोशल मीडिया और चौकियों के माध्यम से वाहन चालकों से अपील की है कि वे पहाड़ों में किसी भी उफनते हुए गधेरे या नाले को पार करने की कोशिश कतई न करें, क्योंकि पानी की गहराई और उसकी रफ्तार का अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है।
इन 7 संवेदनशील जिलों के लिए मौसम विभाग का कड़ा अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के भौगोलिक और मौसम संबंधी पैमानों का विश्लेषण करने के बाद 7 जिलों को रेड और ऑरेंज अलर्ट की श्रेणी में रखा है। इन जिलों में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 48 घंटों में इन जनपदों में गर्जना के साथ अत्यंत तीव्र बौछारें और आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। विशेषकर नैनीताल और पौड़ी के पहाड़ी ढलाने वाले क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन का खतरा सबसे ज्यादा मंडरा रहा है। कुमाऊं और गढ़वाल दोनों ही मंडलों के जिलाधिकारियों को हर समय मोबाइल व वायरलेस सेट के साथ अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

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सुशासन और त्वरित एक्शन: धामी सरकार के कड़े निर्देश
राज्य में बिगड़ते हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से सभी जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी सड़कें बंद हो रही हैं, वहां तुरंत अतिरिक्त जेसीबी मशीनें तैनात की जाएं और बंद रास्तों को खोलने में एक घंटे से अधिक का समय न लगे। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि राशन, जरूरी दवाइयां और पेयजल की आपूर्ति पहाड़ों के सुदूरवर्ती गांवों में किसी भी कीमत पर न रुके। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्यटकों और चारधाम यात्रियों को मौसम की पल-पल की जानकारी देते रहें, ताकि कोई भी अनजाने में खतरे वाले क्षेत्रों की ओर न बढ़े।









