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Uttarakhand News: ज्योतिर्मठ पुनर्वास कार्यों की एनडीएमए ने की समीक्षा

On: July 10, 2026 5:20 PM
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Uttarakhand News: ज्योतिर्मठ पुनर्वास कार्यों की एनडीएमए ने की समीक्षा
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Uttarakhand Jyotirmath Rehabilitation News: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की सदस्य रीता मिस्सल और दिनेश कुमार असवाल ने देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) भूधंसाव के बाद चल रहे पुनर्वास और पुनरुत्थान कार्यों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन और चमोली जिला प्रशासन के साथ मिलकर मुआवजा वितरण में तेजी लाने, स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ाने, 55 असुरक्षित भवनों को ध्वस्त करने तथा केंद्र से मिली पहली किश्त के तहत ढाल स्थिरीकरण और ड्रेनेज सिस्टम के कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। जानिए ज्योतिर्मठ आपदा राहत और पुनर्निर्माण 2026 की पूरी विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।

देहरादून में एनडीएमए की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

उत्तराखंड के चमोली जनपद के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) क्षेत्र में पिछले दिनों हुए भूधंसाव के बाद अब वहां के पुनरुत्थान, विस्थापितों के पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पूरी तरह से गंभीर नजर आ रही हैं। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की वरिष्ठ सदस्य रीता मिस्सल और सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने राजधानी देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) का विस्तृत दौरा किया। यहाँ उन्होंने उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ आपदा प्रबंधन अधिकारियों और चमोली जिला प्रशासन के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान एनडीएमए के केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने ज्योतिर्मठ में चल रहे राहत, पुनर्वास और तकनीकी कार्यों की एक-एक बिंदु पर गहन समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि पुनर्निर्माण के जितने भी कार्य धरातल पर चल रहे हैं, उन्हें हर हाल में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए, ताकि प्रभावित जनता को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजा वितरण में आएगी तेजी

इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्य रूप से आपदा प्रभावित परिवारों के स्थायी व अस्थायी पुनर्वास, उन्हें दी जाने वाली आर्थिक सहायता तथा मुआवजा वितरण की वर्तमान स्थिति पर बेहद विस्तार से चर्चा हुई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों ने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि जिन परिवारों के आशियाने इस भूधंसाव की जद में आकर पूरी तरह से नष्ट या असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें मुआवजा देने की प्रक्रिया को लालफीताशाही से मुक्त कर अत्यधिक तेज किया जाए। एनडीएमए ने अधिकारियों को यह मूल मंत्र भी दिया कि पुनर्वास और आजीविका की किसी भी योजना को अंतिम रूप देते समय स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता (Public Participation) हर हाल में सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि जब तक स्थानीय समाज इस पूरी पुनर्निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा, तब तक धरातल पर योजनाएं पूरी तरह सफल नहीं हो पाएंगी। इसके साथ ही विस्थापित हो चुके युवाओं और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और आजीविका के नए साधनों से जोड़ने के लिए भी विभिन्न विभागों को मिलकर काम करने को कहा गया है।

ज्योतिर्मठ की सतत निगरानी के लिए लगेगा आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम

भूधंसाव की प्रकृति और भविष्य में आने वाले किसी भी संभावित खतरे को भांपने के लिए बैठक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया गया। एनडीएमए के सदस्यों ने निर्देश जारी किए हैं कि ज्योतिर्मठ के पूरे भूधंसाव प्रभावित क्षेत्र की चौबीसों घंटे और सातों दिन सतत निगरानी (Continuous Surveillance) की जाए। इसके लिए पूरे प्रभावित संभाग में अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, टिल्टमीटर, सैटेलाइट इमेजरी ट्रैकिंग और भूगर्भीय हलचलों को मापने वाले आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण तुरंत स्थापित किए जाएं। इस हाई-टेक सिस्टम के लग जाने से जमीन के भीतर होने वाले किसी भी सूक्ष्म बदलाव या धंसाव की रफ्तार का पहले ही पता चल सकेगा, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में जनहानि को रोकने के लिए समय रहते ‘अर्ली वार्निंग अलर्ट’ (प्रारंभिक चेतावनी) जारी किया जा सकेगा और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने में मदद मिलेगी।

केंद्र से मिली पहली किश्त: ढाल स्थिरीकरण और ड्रेनेज का काम तेज

बैठक में उत्तराखंड शासन का पक्ष रखते हुए सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने केंद्रीय दल को अब तक हुए कार्यों की पूरी प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने एक सकारात्मक जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा ‘ज्योतिर्मठ पुनरुत्थान परियोजना’ (Jyotirmath Reconstruction Project) के लिए स्वीकृत किए गए कुल बजट में से पहली किश्त की धनराशि राज्य सरकार को प्राप्त हो चुकी है। इस मिली हुई वित्तीय सहायता के तहत धरातल पर सुरक्षा से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण सिविल कार्य अत्यंत तीव्र गति से संचालित किए जा रहे हैं। सचिव ने बताया कि पहाड़ों को खिसकने से रोकने के लिए ढाल स्थिरीकरण (Slope Stabilization), नदी जनित कटाव को रोकने के लिए अलकनंदा के तटों पर टो प्रोटेक्शन (Toe Protection) की मजबूत दीवारें बनाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही, पूरे शहर के भीतर पानी के रिसाव को पूरी तरह से बंद करने के लिए एक अत्याधुनिक सीवर और वैज्ञानिक ड्रेनेज (निकासी) सिस्टम के निर्माण कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य में भूधंसाव के मुख्य कारणों को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

चमोली में 55 असुरक्षित भवनों के ध्वस्तीकरण की कड़ा कदम

समीक्षा बैठक के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े चमोली जिला प्रशासन और स्थानीय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक और बड़ा प्रशासनिक अपडेट दिया। चमोली प्रशासन ने बताया कि तकनीकी टीमों और भूवैज्ञानिकों के विस्तृत सर्वे के बाद जिन 55 भवनों को इंसानी बसावट के लिए पूरी तरह से असुरक्षित और खतरनाक घोषित किया जा चुका था, उन्हें विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सुरक्षित तरीके से ध्वस्त करने (Demolition) की बड़ी कार्रवाई धरातल पर शुरू कर दी गई है। यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि ये जर्जर भवन किसी बड़े भूकंप या भारी बारिश के दौरान अचानक गिरकर आस-पास की अन्य संपत्तियों या सड़कों से गुजरने वाले नागरिकों के लिए जानलेवा साबित न हों। इसके साथ ही, बैठक में उपस्थित सभी नीति-निर्माताओं ने आपदा पुनर्निर्माण के लिए केंद्र और राज्य द्वारा स्वीकृत की गई भारी-भरकम धनराशि के शत-प्रतिशत प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग पर एक बार फिर से कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि वित्तीय संसाधनों का कोई भी दुरुपयोग या काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि देवभूमि के इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार को एक बार फिर से पूरी तरह से सुरक्षित और खुशहाल बनाया जा सके।

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