Uttarakhand Abhivyanjana 5.0 News: उत्तराखंड की हसीन वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर ऐतिहासिक नगर कालाढूंगी में शनिवार को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजनों में से एक ‘अभिव्यंजना 5.0’ का भव्य आगाज हो गया। ललित फाउंडेशन के इस पांचवें तीन दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का औपचारिक उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर किया। तहसील कालाढूंगी के धनपुर धमोला स्थित प्रसिद्ध ‘नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट’ में आयोजित हो रहे इस महाकुंभ में भाग लेने के लिए देश के कोने-कोने से प्रख्यात रचनाकार, ओजस्वी कवि, व्यंग्यकार और विचारक देवभूमि पहुंचे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने उपस्थित जनसमुदाय और साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह भव्य आयोजन केवल एक पारंपरिक कवि सम्मेलन मात्र नहीं है, बल्कि यह देश की शीर्ष बौद्धिक चेतना के विचारों, मानवीय भावनाओं और रचनात्मक सृजनशीलता को महसूस करने का एक अभूतपूर्व अवसर है। उन्होंने देवभूमि के समृद्ध इतिहास को रेखांकित करते हुए सुमित्रानंदन पंत से लेकर गौरा पंत ‘शिवानी’ जैसी महान साहित्यिक विभूतियों का स्मरण किया और कहा कि उत्तराखंड की धरती हमेशा से सृजन और संस्कृति की भूमि रही है।
‘अभिव्यंजना 5.0’: मुख्यमंत्री का रामनगर आगमन और भव्य स्वागत
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का हेलीकॉप्टर रामनगर के आईआरबी बेलपडाव हेलीपैड पर उतरा। मुख्यमंत्री के देवभूमि आगमन पर क्षेत्रीय विधायक व वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत के नेतृत्व में जनप्रतिधियों और अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, उपाध्यक्ष गणेश रावत और दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित जिले के तमाम शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे।

नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट पहुंचे दिग्गज कवि
साहित्यिक महाकुंभ के आयोजन स्थल ‘नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट’ धनपुर धमोला में सुबह से ही कवियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका था। देश के प्रख्यात गीतकार डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार अशोक चक्रधर और ओज के शिखर कवि डॉ. हरिओम पंवार जैसे शीर्ष रचनाकार आयोजन स्थल पर पहुंचे। रिज़ॉर्ट प्रबंधन और ललित फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर और शॉल ओढ़ाकर सभी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया।
मुख्यमंत्री धामी का आयोजन स्थल पर आगमन और दीप प्रज्वलन
रामनगर के कार्यक्रमों को निपटाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर ढाई बजे कालाढूंगी के नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने देवभूमि की परंपरा का निर्वहन करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए सभी साहित्यकारों का हाथ जोड़कर और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद मुख्य मंच पर दीप प्रज्वलित कर ‘अभिव्यंजना 5.0’ के पांचवें सत्र का विधिवत उद्घाटन किया गया। हॉल में मौजूद सैकड़ों साहित्य प्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मुख्यमंत्री और कवियों का अभिवादन किया।
मुख्यमंत्री का ओजस्वी संबोधन और उत्तराखंड के साहित्यकारों को नमन
मुख्यमंत्री ने मंच से अपने संबोधन में कविता और समाज के अंतर्संबंधों पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को असली धार हमारे कवियों की लेखनी से ही मिली थी। आज जब समाज आधुनिकता के भंवर में फंसकर अपनी जड़ों को भूल रहा है, तब कुमार विश्वास, अशोक चक्रधर और हरिओम पंवार जैसे मनीषी युवाओं को पुनः अपनी भाषा और साहित्य की ओर आकर्षित करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत की प्रकृति-साधना, चंद्रकुंवर बर्त्वाल की काव्य चेतना, गिर्दा के जन-सरोकार और शैलेश मटियानी के लोक जीवन के चित्रण का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को देश के लिए मार्गदर्शक बताया।
उत्कृष्ट साहित्यकारों का सम्मान और पुरस्कार वितरण
साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय व अनुकरणीय कार्य कर रहे देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा और वरिष्ठ कवियों, कवयित्रियों तथा विचारकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से सम्मानित किया। उन्हें स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन रचनाकारों की वाणी में जहाँ एक ओर राष्ट्रभक्ति का विद्रोह है, वहीं दूसरी ओर जीवन का हास्य और प्रेम भी है, जो जनमानस में सकारात्मक बदलाव लाने का सामर्थ्य रखता है।
मुख्य सत्र का समापन और अनौपचारिक संवाद
मुख्यमंत्री के विदा होने के बाद शाम को रिज़ॉर्ट के खुले लॉन में कवियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों के बीच एक अनौपचारिक संवाद सत्र का आयोजन किया गया। डॉ. कुमार विश्वास और अशोक चक्रधर ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने के लिए स्थानीय युवाओं के साथ चर्चा की। इस दौरान कुमार विश्वास ने उत्तराखंड में ‘पंत साहित्य निवास’ जैसी सांस्कृतिक धरोहरों को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री धामी के संबोधन के मुख्य अंश
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कवियों को समाज का मार्गदर्शक बताते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- समाज का दर्पण: कवि केवल शब्दों का जाल बुनने वाले निर्माता नहीं होते, बल्कि वे समाज के सजग चिंतक और मार्गदर्शक होते हैं। जब भी समाज वैचारिक उलझनों से घिरता है, कविता उसे नई दिशा दिखाती है।
- विविधता का समुच्चय: आज इस मंच पर देश की वह बौद्धिक संपदा बैठी है जिनकी वाणी में विरह भी है तो अगाध प्रेम भी, सामाजिक विसंगतियों पर करारा व्यंग्य है तो राष्ट्रभक्ति की ओजस्वी ज्वाला भी।
- विकल्प रहित संकल्प: मुख्यमंत्री ने सभी साहित्यकारों और युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी रचनात्मक ऊर्जा का उपयोग देश को सशक्त बनाने में करें और उत्तराखंड सरकार के “विकल्प रहित संकल्प” के तहत राज्य को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में अपनी लेखनी के माध्यम से योगदान दें।
“देवभूमि उत्तराखंड की यह पवित्र धरती हमेशा से ही ऋषियों, मनीषियों और साहित्यकारों की तपोभूमि रही है। हिमालय की शांत वादियों में जो सृजनशीलता पनपती है, वह पूरे विश्व को शांति और चेतना का संदेश देती है। आज के इस आयोजन से जो वैचारिक ऊर्जा निकलेगी, वह हमारी युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध जड़ों से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगी।” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
इस भव्य उद्घाटन सत्र के बाद अब अगले दो दिनों तक ललित फाउंडेशन के इस मंच पर कविता, कहानी, संवाद और विचार-मंथन के कई और सत्र आयोजित किए जाएंगे। कालाढूंगी में सजे इस साहित्यिक मंच ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देवभूमि केवल धार्मिक पर्यटन का ही केंद्र नहीं है, बल्कि देश की भाषाई और सांस्कृतिक चेतना का भी एक बेहद मजबूत स्तंभ है।







