Uttarakhand Assembly Special Session News In Hindi: उत्तराखंड की राजनीति में आज का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। प्रदेश की मातृशक्ति को राजनीति के मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी दिलाने के संकल्प के साथ आहूत किया गया विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र भारी शोर-शराबे और तीखी नोकझोंक की भेंट चढ़ गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और उसकी नीयत को लेकर चली लंबी बहस के बाद अंततः विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
सत्र का उद्देश्य और शुरुआत
विशेष सत्र की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संबोधन के साथ हुई। सदन के पटल पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“इस विशेष सत्र का एकमात्र उद्देश्य हमारी मातृशक्ति को वह सम्मान और अधिकार दिलाना है, जिसकी वे हकदार हैं। 33 फीसदी आरक्षण मिलने के बाद हमारी माताएं-बहनें राजनीति के क्षेत्र में पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर चलेंगी और नीति निर्धारण में अपनी भूमिका निभाएंगी।”
हालांकि, उन्होंने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करते हुए यह भी जोड़ा कि आरक्षण प्रदान करने का मूल अधिकार केंद्र सरकार के पास ही निहित है।
विपक्ष का रुख और तीखे तेवर
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस के अन्य विधायकों ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी। विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति गंभीर है, तो इसे केवल केंद्र के पाले में डालने के बजाय स्थानीय स्तर पर और आगामी चुनावों में तत्काल प्रभाव से लागू करने की स्पष्ट रूपरेखा क्यों नहीं पेश की जा रही है?
विपक्ष के सदस्यों ने मांग उठाई कि विधानसभा सीटों के परिसीमन और जनगणना की प्रतीक्षा किए बिना ही महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाए। कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि यह सत्र केवल एक ‘पॉलिटिकल स्टंट’ है और सरकार की मंशा धरातल पर आरक्षण लागू करने की नहीं है।
भोजन अवकाश के बाद बिगड़े हालात
सदन की मर्यादा उस समय तार-तार होती दिखी जब लंच ब्रेक के बाद दोबारा कार्यवाही शुरू हुई। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा जब सदन को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान कांग्रेस विधायकों ने सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
- वेल में पहुंचे विधायक: देखते ही देखते कांग्रेस के विधायक सदन के बीचों-बीच (वेल) में आ गए।
- नारेबाजी का दौर: करीब 20 मिनट तक सदन में भारी शोर-शराबा होता रहा। जहां विपक्ष “महिला विरोधी यह सरकार, नहीं चलेगी-नहीं चलेगी” के नारे लगा रहा था, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से भी पलटवार करते हुए “महिला विरोधी कांग्रेस” के नारे गूंजने लगे।
- स्थगन: बढ़ते हंगामे और दोनों पक्षों के बीच मर्यादा की सीमाएं लांघती बहस को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने शाम 6 बजे तक के लिए कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
देर शाम का घटनाक्रम और अनिश्चितकाल के लिए स्थगन
शाम 6 बजे जब सदन दोबारा बैठा, तो उम्मीद थी कि चर्चा सुचारू रूप से चलेगी। लेकिन कटुता इस कदर बढ़ चुकी थी कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर से जुबानी जंग शुरू हो गई।
विपक्ष का तर्क: विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के मुद्दों पर केवल दिखावा कर रही है। उन्होंने अंकित भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दों को सांकेतिक रूप से उठाते हुए सरकार की घेराबंदी की।
सत्ता पक्ष का जवाब: भाजपा विधायकों और मंत्रियों ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण बिल को ठंडे बस्ते में डाल कर रखा और आज जब इसे अमली जामा पहनाया जा रहा है, तो वे केवल बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
अंततः, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी और कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं जान पड़ी, तो विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने भारी मन से सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

मातृशक्ति के नाम पर राजनीति?
उत्तराखंड विधानसभा का यह विशेष सत्र जिस उद्देश्य से बुलाया गया था, वह कहीं न कहीं शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया। हालांकि सरकार ने अपना संदेश स्पष्ट कर दिया है कि वह केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार है, लेकिन विपक्ष के तीखे सवालों ने भविष्य की चुनावी जंग की रूपरेखा जरूर तैयार कर दी है।
अब प्रदेश की जनता और विशेषकर मातृशक्ति इस बात का इंतजार कर रही है कि यह 33 फीसदी आरक्षण कब और कैसे उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लेकर आएगा। आज की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘महिला आरक्षण’ आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनने वाला है।
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