Uttarakhand Ambulance Service News: उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान चार अत्याधुनिक एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भौगोलिक रूप से विषम परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में समय पर बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये हाई-टेक एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार मरीजों और घायलों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने में बेहद मददगार साबित होंगी, जिससे कई बहुमूल्य जानों को समय रहते बचाया जा सकेगा।

पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक संरचना को ध्यान में रखते हुए इन सभी एम्बुलेंस को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है और इनमें विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि राज्य सरकार जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग के अनूठे मॉडल के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को लगातार सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस अनूठी पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आगामी तीन वर्षों तक इन सभी चारों एम्बुलेंस में चौबीसों घंटे योग्य चिकित्सक (डॉक्टर), प्रशिक्षित नर्स, मेडिकल अटेंडेंट और कुशल चालकों की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी। इससे मरीजों को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर प्राथमिक और जीवन रक्षक उपचार मिलना संभव हो सकेगा।

इन अत्याधुनिक एम्बुलेंस वाहनों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंस्ट्रेंटर, मॉनिटर, डिफाइब्रिलेटर और अन्य आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा उपकरण स्थापित किए गए हैं। प्रारंभिक चरण में इन चारों मोबाइल मेडिकल यूनिट्स को राज्य के चार प्रमुख पर्वतीय जिलों चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग के स्वास्थ्य केंद्रों को सौंपा गया है। ये वे जिले हैं जहां अक्सर भूस्खलन, भारी बर्फबारी या अन्य प्राकृतिक बाधाओं के कारण मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में काफी समय लग जाता है। सरकार की योजना है कि भविष्य में चारधाम यात्रा, विभिन्न प्रमुख धार्मिक मेलों, स्थानीय सांस्कृतिक उत्सवों और किसी भी अप्रत्याशित आपदा प्रबंधन के कार्यों में भी इन हाई-टेक एम्बुलेंस सेवाओं का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में त्वरित रिस्पांस टाइम सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी मैदानी क्षेत्रों की तरह ही त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि दूरस्थ गांवों से मुख्य जिला अस्पताल तक आते-आते मरीजों की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, लेकिन अब इन सर्वसुविधायुक्त चलती-फिरती एम्बुलेंस के माध्यम से इलाज की प्रक्रिया रास्ते में ही शुरू हो जाएगी। इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों से स्वास्थ्य संबंधी कारणों से होने वाले पलायन पर भी काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। राज्य सरकार आने वाले समय में इस तरह की आधुनिक चिकित्सा एम्बुलेंस की संख्या को और बढ़ाने पर विचार कर रही है ताकि उत्तराखंड का कोई भी सुदूरवर्ती क्षेत्र मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।










