Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका देते हुए जौनसार-बावर क्षेत्र के कद्दावर नेता और मशहूर बॉलीवुड पार्श्वगायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने विधिवत रूप से कांग्रेस का दामन थाम लिया है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के 24 अकबर रोड मुख्यालय में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चकराता सीट से ताल ठोक चुके रामशरण नौटियाल की यह घर वापसी मानी जा रही है, क्योंकि उनका पुराना राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ ही परवान चढ़ा था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कांग्रेस की समावेशी विचारधारा, लोकतांत्रिक नीतियों और शीर्ष नेतृत्व के प्रति पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए पुनः पार्टी परिवार में लौटे हैं।

राजधानी दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मंच पर उपस्थित रहा। सदस्यता ग्रहण समारोह में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, कांग्रेस कार्यसमिति के वरिष्ठ सदस्य गुरदीप सप्पल तथा प्रदेश सह-प्रभारी मनोज यादव प्रमुख रूप से मौजूद रहे। पार्टी के इन तमाम दिग्गज नेताओं ने रामशरण नौटियाल को पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका गर्मजोशी से संगठन में स्वागत किया तथा इसे उत्तराखंड में कांग्रेस की मजबूती की दिशा में एक निर्णायक कदम करार दिया।
लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए लिया फैसला
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने रामशरण नौटियाल का पार्टी में खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में देश गंभीर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक मर्यादाओं, सामाजिक सौहार्द और आम जनमानस के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र मजबूत विकल्प के रूप में संघर्ष कर रही है। गणेश गोदियाल ने रेखांकित किया कि रामशरण नौटियाल जैसे अनुभवी, जनाधार वाले और वरिष्ठ नेता का कांग्रेस में आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य के प्रबुद्ध और जनसरोकारों से जुड़े लोग अब भारतीय जनता पार्टी की विभाजनकारी नीतियों से ऊब चुके हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नौटियाल के आने से न केवल देहरादून जनपद बल्कि समूचे पर्वतीय अंचल में पार्टी कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार होगा।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस अवसर पर वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की रीति-नीति और वैचारिक आधार देश के संविधान, समरसता, सामाजिक न्याय और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कुशल एवं संघर्षशील नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को सड़क से लेकर संसद और विधानसभा तक पूरी प्रखरता के साथ उठा रही है। आर्य ने कहा कि आज जब जनता बेरोजगारी, महंगाई, प्रशासनिक उपेक्षा और अलोकतांत्रिक फैसलों से त्रस्त है, तब रामशरण नौटियाल का कांग्रेस में शामिल होना जनआकांक्षाओं के साथ खड़े होने का एक साहसिक और स्वागतयोग्य फैसला है।
जौनसार-बावर में कांग्रेस संगठन को मिलेगी नई ऊर्जा
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य गुरदीप सप्पल ने इस राजनीतिक बदलाव को संगठनात्मक दृष्टि से अत्यंत फलदायी बताया। उन्होंने कहा कि रामशरण नौटियाल केवल एक चुनावी चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे दशकों से जमीनी स्तर पर जनता के सुख-दुख के साथी रहे हैं। देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष के रूप में उनके पूर्व के कार्यकाल और ग्रामीण विकास के प्रति उनके समर्पण को आज भी स्थानीय जनता याद करती है। सप्पल ने कहा कि जौनसार-बावर की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में नौटियाल के राजनीतिक अनुभव, स्थानीय पकड़ और सूझबूझ से कांग्रेस संगठन को अभूतपूर्व संबल प्राप्त होगा। उनकी उपस्थिति से सीमांत क्षेत्रों में पार्टी का ढांचा और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी बनेगा।
उत्तराखंड के सह-प्रभारी मनोज यादव ने पार्टी में नवागंतुकों के दायित्वों और अपेक्षाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचार और जनआंदोलन है। जो भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी में शामिल होता है, उससे यह अपेक्षा रहती है कि वह संगठन के सिद्धांतों, नीतियों और अनुशासन के प्रति निष्ठावान रहकर जनता के बीच कार्य करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि रामशरण नौटियाल अपने विस्तृत जनाधार और ऊर्जा का उपयोग कांग्रेस की जनकल्याणकारी नीतियों को गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक पहुंचाने में करेंगे। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के पक्ष में बन रहा यह वातावरण राज्य में सत्ता परिवर्तन की ठोस नींव तैयार कर रहा है।
रामशरण नौटियाल का राजनीतिक प्रभाव और चुनावी पृष्ठभूमि
रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति, विशेषकर जौनसार-बावर और पछवादून क्षेत्र का एक बेहद जाना-पहचाना नाम हैं। वह देहरादून के जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और अविभाजित उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड निर्माण के शुरुआती वर्षों में कांग्रेस के एक प्रमुख रणनीतिकार और संगठनकर्ता रहे हैं। साल 2014 के दौर में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन पर बड़ा दांव खेलते हुए चकराता विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था। हालांकि उस कड़े चुनावी मुकाबले में कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रीतम सिंह विजयी रहे थे, लेकिन रामशरण नौटियाल ने भारी मत हासिल कर दूसरे स्थान पर रहते हुए अपने व्यक्तिगत प्रभाव का सशक्त प्रदर्शन किया था।

बीते कुछ समय से नौटियाल का बीजेपी के भीतर मोहभंग साफ नजर आ रहा था। स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों की उपेक्षा, विकास कार्यों में समन्वय की कमी और आंतरिक गुटबाजी के चलते उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया था। आखिरकार अपने हजारों समर्थकों की राय और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने भाजपा से त्यागपत्र देकर अपनी पुरानी राजनीतिक कर्मभूमि कांग्रेस में वापसी का मार्ग चुना। उनके इस फैसले से चकराता, विकासनगर, सहसपुर और कालसी जैसे महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों में भारी फेरबदल होना तय माना जा रहा है।
गायक जुबिन नौटियाल की लोकप्रियता और सामाजिक जुड़ाव
रामशरण नौटियाल के राजनीतिक रसूख के साथ-साथ उनके परिवार का सांस्कृतिक कद भी उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रतिष्ठित है। उनके सुपुत्र जुबिन नौटियाल भारत के शीर्ष पार्श्वगायकों में गिने जाते हैं, जिनकी आवाज के करोड़ों प्रशंसक हैं। जुबिन नौटियाल ने न केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन किया है, बल्कि वे उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, आपदा राहत और सामाजिक कार्यों में भी लगातार सक्रिय रहते हैं। हालांकि जुबिन नौटियाल स्वयं सक्रिय दलीय राजनीति से हमेशा दूर रहे हैं, परंतु उनके परिवार का सामाजिक दायरा, लोकप्रियता और युवा वर्ग के बीच व्यापक प्रभाव किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और सामाजिक लाभ सिद्ध होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में आने से पार्टी को देहरादून के ग्रामीण और जनजातीय बेल्ट में एक मजबूत सामाजिक समर्थन मिलेगा। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के स्थापित चेहरों का छिटकना जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करता है। कांग्रेस अब नौटियाल के अनुभव और सामाजिक प्रतिष्ठा का उपयोग देहरादून जिले की ग्रामीण सीटों पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए करेगी।
राज्य की सियासत पर दूरगामी प्रभाव और भविष्य की दिशा
उत्तराखंड की राजनीति हमेशा से दो प्रमुख दलों—कांग्रेस और भाजपा—के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले नेताओं का पाला बदलना महज एक व्यक्तिगत फैसला नहीं होता, बल्कि यह जमीनी हवा के रुख का भी परिचायक माना जाता है। कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा ने इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता का भरोसा अब मौजूदा शासन से उठ चुका है। बेरोजगारी, अंकिता भंडारी प्रकरण, भर्ती घोटाले और राज्य में बढ़ती आर्थिक विषमता जैसे मुद्दों को लेकर जनमानस में गहरा रोष है। शैलजा ने कहा कि रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी लोकतंत्र को बचाने की व्यापक लड़ाई का हिस्सा है।
रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस मुख्यालय में उपस्थित नेताओं और मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका यह कदम केवल सत्ता की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के मान-सम्मान, जनजातीय अंचल के अधिकारों और जनहित की लड़ाई को मजबूती देने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी पूर्व शर्त के एक साधारण सिपाही की तरह कांग्रेस के लिए काम करेंगे और पार्टी जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौंपेगी, उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।
यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में उत्तराखंड कांग्रेस रामशरण नौटियाल के कद और अनुभव का किस रूप में उपयोग करती है। क्या उन्हें चकराता या पछवादून की किसी अन्य सीट से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा, या फिर उन्हें पूरे गढ़वाल मंडल में संगठन को साधने का दायित्व मिलेगा, यह फैसला आने वाले समय में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। फिलहाल, उनके इस कदम ने उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में एक नई गर्माहट ला दी है और भाजपा खेमे को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए विवश कर दिया है।
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