Dehradun News In Hindi: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थाना कैंट क्षेत्र के अंतर्गत सुप्रसिद्ध संतला देवी मंदिर के समीप बहने वाली नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। मूसलाधार बारिश के चलते नदी के बीच बने एक टापू पर 7 स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु फंस गए थे, जिनका स्वयं बाहर निकल पाना पूरी तरह असंभव था। सूचना मिलते ही सहस्त्रधारा पोस्ट से उप निरीक्षक राजबर राणा के नेतृत्व में पहुंची राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की जांबाज टीम ने सिविल पुलिस के साथ मिलकर एक अत्यंत जोखिमपूर्ण और सुनियोजित ऑपरेशन चलाकर सभी 7 जिंदगियों को सुरक्षित बचा लिया। जानिए देवभूमि के इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू अभियान की पूरी जमीनी खेल रिपोर्ट।

संतला देवी मंदिर के समीप नदी का बढ़ा रौद्र रूप
पहाड़ों और मैदानी इलाकों में मानसूनी बादलों के उग्र प्रदर्शन के बीच देवभूमि उत्तराखंड से प्राकृतिक आपदाओं और अचानक बाढ़ (Flash Flood) आने की रोंगटे खड़े कर देने वाली खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में राजधानी देहरादून के कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक सिद्धपीठ संतला देवी मंदिर परिसर के समीप एक बेहद संवेदनशील और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। रविवार को क्षेत्र में अचानक हुई मूसलाधार और तीव्र बारिश के चलते मंदिर के पास से बहने वाली नदी का जलस्तर पलक झपकते ही अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया। पहाड़ों से आए पानी के मटमैले और तेज बहाव ने नदी को एक विशालकाय और रौद्र नाले में तब्दील कर दिया। इस अचानक आई बाढ़ की वजह से नदी किनारे विचर रहे और मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे 7 स्थानीय नागरिक व श्रद्धालु पानी के घिरे हुए चक्रव्यूह में फंस गए। वे किसी तरह जान बचाने के लिए नदी के ठीक बीचो-बीच स्थित एक ऊंचे कंक्रीट के टापू पर जा चढ़े। देखते ही देखते टापू के चारों ओर पानी का वेग इतना भयंकर हो गया कि सूखी जमीन का वह छोटा सा टुकड़ा उफनती लहरों के बीच एक छोटे से द्वीप की तरह नजर आने लगा।
सीसीआर देहरादून की सूचना पर हरकत में आई जांबाज SDRF की टीम
टापू पर फंसे लोगों ने जब देखा कि पानी लगातार उनके पैरों की तरफ बढ़ रहा है और बहाव की रफ्तार इतनी तेज है कि उसमें हाथी भी बह जाए, तो चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। तट पर मौजूद कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बिना एक पल गंवाए इस बेहद गंभीर आपातकालीन स्थिति की जानकारी देहरादून स्थित सिटी कंट्रोल रूम (CCR) को दी। सीसीआर के माध्यम से राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की वाहिनी को तुरंत वायरलेस सेट पर एक ‘रेड अलर्ट’ संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें बताया गया कि थाना कैंट क्षेत्र के तहत संतला देवी मार्ग पर 7 बेशकीमती जिंदगियां मौत और जिंदगी के बीच झूल रही हैं और उन्हें तत्काल हाई-टेक रेस्क्यू की आवश्यकता है।

जैसे ही यह संवेदनशील सूचना आपदा प्रबंधन के मुख्यालय पहुंची, सहस्त्रधारा स्थित एसडीआरएफ पोस्ट पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई। पोस्ट इंचार्ज और जांबाज उप निरीक्षक राजबर राणा के कुशल नेतृत्व में एक बेहद प्रशिक्षित, शारीरिक रूप से सुदृढ़ और आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों (Life Saving Equipment) से लैस रेस्क्यू टीम तुरंत सरकारी वाहनों से घटनास्थल के लिए रवाना हुई। आपदा के समय में समय प्रबंधन (Time Management) ही सबसे बड़ा हथियार होता है, और एसडीआरएफ के जवानों ने महज कुछ ही मिनटों में भयंकर ट्रैफिक और भारी बारिश के बीच रास्ता पार करते हुए संतला देवी नदी तट पर अपनी आमद दर्ज करा दी।
प्रतिकूल परिस्थितियां और उफनती धारा: जब जवाब दे गई इंसानी हिम्मत
जब उप निरीक्षक राजबर राणा की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो वहां की जमीनी हकीकत अत्यधिक भयावह और प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण थी। पहाड़ों के ऊपरी कैचमेंट एरिया में हो रही लगातार अतिवृष्टि के कारण नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका था और पानी की मटमैली लहरें बड़ी-बड़ी चट्टानों को अपने साथ बहाकर ला रही थीं। चारों ओर से उफनती और गर्जना करती धारा से घिरे सभी 7 व्यक्ति टापू पर पूरी तरह से असहाय और डरे-सहमे हुए खड़े थे। नदी के पत्थरों पर जमी काई और तेज कीचड़ के कारण पूरा तट फिसलनयुक्त हो चुका था, जहां एक भी गलत कदम सीधे नदी के भीतर मौत के मुंह में ले जा सकता था।
परिस्थितियों का तकनीकी मूल्यांकन करने के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया कि कोई भी व्यक्ति बिना आधुनिक सहायता के स्वयं तैरकर या पैदल चलकर सुरक्षित बाहर नहीं निकल सकता। समय बहुत तेजी से हाथ से निकल रहा था क्योंकि पहाड़ों में हो रही बारिश के कारण पानी का स्तर हर 10 मिनट में एक इंच ऊपर चढ़ रहा था। इस बेहद नाजुक और गंभीर घड़ी में परिस्थितियों की संवेदनशीलता को देखते हुए उप निरीक्षक राजबर राणा ने बिना एक सेकंड का विलंब किए मौके पर मौजूद सिविल पुलिस (स्थानीय कैंट थाना पुलिस) के अधिकारियों के साथ एक मजबूत रणनीतिक समन्वय (Coordination) स्थापित किया। दोनों विभागों ने मिलकर तुरंत संयुक्त रेस्क्यू अभियान की कमान अपने हाथों में ले ली।

जान हथेली पर रखकर जवानों ने किया ‘हाई-लाइन रोप फिक्सिंग’ का कमाल
नदी की चौड़ाई और उसके जानलेवा वेग को देखते हुए एसडीआरएफ के उच्च प्रशिक्षित जवानों ने अपनी अद्भुत पेशेवर दक्षता, सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देना शुरू किया। सामान्य रेस्क्यू तकनीक यहाँ पूरी तरह फेल साबित हो रही थी, इसलिए टीम ने ‘हाई-लाइन रोप फिक्सिंग’ (High-Line Rope Fixing) और रिवर क्रॉसिंग की विशेष विधा का उपयोग करने का निर्णय लिया। एक जांबाज जवान ने सुरक्षा हार्नेस पहनकर और लाइफ जैकेट के सहारे, अपने साथियों की मदद से उफनती लहरों को चीरते हुए किसी तरह नदी के उस पार टापू पर पहला लंगर (Anchor) गाड़ा।
एक बार जब मुख्य सेफ्टी रोप (मजबूत पर्वतारोहण रस्सी) दोनों छोरों पर पक्के कंक्रीट के पिलरों और पेड़ों के सहारे कस दी गई, तो हवा में एक सुरक्षित मानवीय पुल तैयार हो गया। इसके बाद, मूसलाधार बारिश, कड़ाके की ठंड और गिरते पत्थरों के बीच, जवानों ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों, कैराबिनर, पुली और रेस्क्यू सीट की सहायता से एक-एक कर टापू पर फंसे डरे हुए लोगों तक अपनी पहुंच बनाई। यह अभियान बेहद जोखिमपूर्ण था क्योंकि अगर रस्सी पर थोड़ा सा भी दबाव असंतुलित होता, तो रेस्क्यू कर रहा जवान और पीड़ित दोनों पानी के तेज बहाव की चपेट में आ सकते थे।

कुशल रणनीति से टली निश्चित जनहानि: सभी 7 जिंदगियां सुरक्षित बाहर
इस सुनियोजित, वैज्ञानिक और अत्यधिक साहसिक अभियान के दौरान एसडीआरएफ के जवानों ने धैर्य और अनुशासन का बेजोड़ उदाहरण पेश किया। टापू पर फंसे बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों को ढांढस बंधाया गया, उन्हें सुरक्षा जैकेट पहनाई गईं और फिर एक-एक करके, बेहद सावधानी और कुशलता के साथ उफनती नदी के ऊपर से हवा के रास्ते खींचते हुए सुरक्षित किनारे पर लाया गया। जैसे ही आखिरी व्यक्ति ने सुरक्षित जमीन पर अपने पैर रखे, तट पर सांसें थामकर खड़े सैकड़ों स्थानीय नागरिकों और पुलिसकर्मियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन जांबाज सैनिकों का स्वागत किया और ‘एसडीआरएफ जिंदाबाद’ के नारों से पूरा कैंट इलाका गूंज उठा।
एसडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response), उत्कृष्ट अंतर-विभागीय समन्वय और बेजोड़ मानवीय रेस्क्यू क्षमता के परिणामस्वरूप एक बहुत बड़ी और निश्चित मानी जा रही जनहानि को समय रहते पूरी तरह से टाल दिया गया। सुरक्षित बचाए गए सभी 7 व्यक्तियों को तुरंत प्राथमिक उपचार देने के बाद सिविल पुलिस की गाड़ियों से उनके गंतव्य और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर एसडीआरएफ पहुंचने में आधा घंटा भी लेट हो जाती, तो पानी टापू के ऊपर से बहने लगता और एक बड़ा त्रासद हादसा हो सकता था। सुशासन, तत्परता और शून्य-हताहत (Zero Casualty) की सोच पर आधारित यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन वास्तव में देवभूमि के आपदा प्रबंधन तंत्र की एक और ऐतिहासिक और गौरवशाली सफलता है।
रेस्क्यू किए गए व्यक्तियों के नाम निम्नवत हैं
- मुकेश पुत्र श्री महादेव, निवासी बल्लीवाला, उम्र 35 वर्ष।
- सुशील पुत्र श्री इंद्रदेव, निवासी सीमा द्वार, उम्र 36 वर्ष।
- प्रेम कुमार पुत्र श्री महेंद्र, निवासी सीमा द्वार, उम्र 27 वर्ष।
- रोशन गुप्ता पुत्र श्री जनार्दन गुप्ता, निवासी सीमा द्वार, उम्र 32 वर्ष।
- राजीव पुत्र श्री महेंद्र सिंह, निवासी सीमा द्वार, उम्र 30 वर्ष।
- पवन सिंह पुत्र श्री इंद्रदेव, निवासी सीमा द्वार, उम्र 25 वर्ष।
- सूरज साहनी पुत्र श्री सिताराम साहनी, निवासी सीमा द्वार, उम्र 30 वर्ष।









