Lionel Messi father Jorge Messi dies at 68 News: फुटबॉल की दुनिया को अपनी जादुई प्रतिभा से चमकाने वाले और आठ बार के बैलोन डी’ओर विजेता लियोनेल मेस्सी इस समय अपनी ज़िंदगी के सबसे गहरे और कठिन व्यक्तिगत दुख से गुज़र रहे हैं। मैदान पर बड़ी से बड़ी रक्षापंक्तियों को ध्वस्त करने वाले और मुश्किल से मुश्किल मैचों में जीत की पटकथा लिखने वाले इस महान खिलाड़ी का दिल अपने पिता के जाने से पूरी तरह टूट गया है। हाल ही में लंबी बीमारी के बाद उनके पिता जॉर्ज मेस्सी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिता के इस तरह अचानक चले जाने से स्तब्ध मेस्सी ने सोशल मीडिया के ज़रिए एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाला संदेश साझा किया है।
पिता जॉर्ज के निधन से टूटे लियोनेल मेस्सी
इस पोस्ट में न केवल अपने पिता के प्रति उनका अगाध प्रेम और खालीपन छलका है, बल्कि उन्होंने यह चिंता भी जताई है कि वह अब आगे खेल जारी रख पाएंगे या नहीं। जॉर्ज मेस्सी केवल लियोनेल के पिता ही नहीं थे, बल्कि जब मेस्सी महज़ 14 साल के थे, तब से वह उनके एजेंट के रूप में भी काम कर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे को एक दुबले-पतले लड़के से दुनिया का सबसे सर्वकालिक महानतम फुटबॉल खिलाड़ी बनते देखा था। मैदान के बाहर और भीतर हर कदम पर मार्गदर्शन देने वाले पिता का साया उठ जाने के बाद, मेस्सी ने स्वीकार किया है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वह अपने जीवन और करियर को किस दिशा में ले जाएँ। उनके इस बयान ने दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों को न केवल दुखी किया है, बल्कि हर किसी के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फुटबॉल जगत अब इस महान सितारे को दोबारा एक्शन में देख पाएगा।

एक पिता, एक मार्गदर्शक और सफलता की नींव का अंत लियोनेल मेस्सी और उनके पिता जॉर्ज का रिश्ता महज़ एक खिलाड़ी और एजेंट का नहीं था, बल्कि यह एक अटूट विश्वास और साझेदारी की कहानी थी। जब मेस्सी बचपन में ग्रोथ हार्मोन की कमी की समस्या से जूझ रहे थे, तब जॉर्ज ही थे जिन्होंने हार नहीं मानी और अपने बेटे के सपनों को पंख देने के लिए कठिन फैसले लिए। रोसारियो से स्पेन के बार्सिलोना तक का सफर तय करने में जॉर्ज की भूमिका सबसे अहम रही थी। उन्होंने अपने बेटे के करियर के हर छोटे-बड़े व्यावसायिक और खेल से जुड़े फैसलों को संभाला ताकि मेस्सी बिना किसी तनाव के केवल फुटबॉल पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें। जॉर्ज मेस्सी का निधन उनके गृहनगर अर्जेंटीना के रोसारियो शहर स्थित एक अस्पताल में हुआ, जहाँ वह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे।
पिता के निधन की खबर मिलते ही मेस्सी अपने क्लब और तमाम प्रतिबद्धताओं को छोड़कर तुरंत अपने परिवार के पास रोसारियो लौट आए। अंतिम संस्कार का कार्यक्रम बेहद निजी और सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया। रोसारियो के बाहरी इलाके में स्थित पेरेज़ कस्बे के एक शांत कब्रिस्तान में जॉर्ज को अंतिम विदाई दी गई, जहाँ केवल परिवार के बेहद करीबी सदस्य और प्रियजन ही मौजूद थे। “मुझे नहीं पता कि तुम्हारे बिना क्या करूंगा”: मेस्सी का छलका दर्द पिता को हमेशा के लिए खो देने का ग़म मेस्सी के शब्दों में साफ़ झलक रहा है।

भावुक पोस्ट में दिए संन्यास के संकेत
सोशल मीडिया पर अपने दिल की बात साझा करते हुए मेस्सी ने लिखा कि उन्हें अभी भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने पिता के बिना आगे कैसे बढ़ें। मेस्सी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह जीवन भर केवल फुटबॉल खेलना जानते थे, लेकिन अब जब उनके पिता उनके साथ नहीं हैं, तो उन्हें वास्तव में यकीन नहीं है कि वह इसे और ज्यादा समय तक जारी रख पाएंगे या नहीं। मेस्सी ने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि वह एकदम शुरुआत से उनके साथ थे और जब वे दोनों अपने करियर के और ज़िंदगी के अंत के बहुत करीब पहुँच चुके थे, तब उनके पिता उनका साथ छोड़ गए। मेस्सी ने एक बेबस बेटे की तरह सवाल उठाया कि उनके पिता थोड़ा सा समय और रुक कर इस सफर को एक साथ पूरा क्यों नहीं कर सके। एक बेटे का अपने पिता के प्रति यह दर्द दर्शाता है कि सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने के बाद भी एक इंसान के लिए उसके परिवार का साथ कितना अनमोल होता है। मानसिक संताप और विश्व कप 2026 के दौरान की परिस्थितियां मेस्सी ने अपने संदेश में उस कठिन दौर का भी ज़िक्र किया जिससे वह हाल के महीनों में गुज़र रहे थे।
2026 के विश्व कप के दौरान, जब पूरी दुनिया की नज़रें मैदान पर मेस्सी के जादुई खेल पर थीं, तब वह अंदर ही अंदर एक भयानक मानसिक लड़ाई लड़ रहे थे। अल्जीरिया के खिलाफ अर्जेंटीना की 3-0 से हुई जीत के दौरान जब मेस्सी ने पहला गोल दागा था, तब मैदान पर ही उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े थे। उस समय कई लोगों को लगा कि यह जीत की खुशी के आँसू हैं, लेकिन बाद में मेस्सी ने स्पष्ट किया था कि उन आँसुओं का फुटबॉल से कोई लेना-देना नहीं था। टूर्नामेंट की शुरुआत से ठीक पहले जॉर्ज की तबियत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी। यह पहला मौका था जब उनके पिता किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेस्सी का हौसला बढ़ाने के लिए स्टेडियम में मौजूद नहीं थे।
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मेस्सी ने बताया कि उनकी माँ लगातार उन्हें ढांढस बंधाती रहीं कि पिताजी ठीक हो जाएँगे और मैच देखने के लिए यात्रा कर सकेंगे। मेस्सी भी हर मैच के बाद अपने फोन पर पिता के संदेश का इंतज़ार करते थे, लेकिन जब संदेश आना बंद हो गए, तब उन्हें एहसास हुआ कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। शारीरिक सीमाओं को लांघने की कोशिश और फाइनल की निराशा पिता की बीमारी के बावजूद मेस्सी ने अपनी राष्ट्रीय टीम अर्जेंटीना की कप्तानी करते हुए विश्व कप में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान कुल आठ मैच खेले, जिसमें उन्होंने आठ शानदार गोल दागे और चार गोल में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए असिस्ट दर्ज किए। उन्होंने इस टूर्नामेंट में अपना छठा विश्व कप मैच खेलते हुए इतिहास भी रचा। लेकिन मैदान पर उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी।
मेस्सी ने स्वीकार किया कि वह किसी भी तरह अपनी टीम को फाइनल तक ले जाना चाहते थे ताकि उनके पिता उन्हें खेलते हुए देख सकें और वह अपने पिता के लिए एक और ट्रॉफी जीत सकें। लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। स्पेन के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना को 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। मेस्सी ने लिखा कि वह अपने पिता को एक नई ट्रॉफी दिखाना चाहते थे, लेकिन फाइनल मैच के दौरान उनके पैरों में बिल्कुल भी ताकत नहीं बची थी। उन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं से आगे जाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन वह खुद को कभी भी पूरी तरह ठीक महसूस नहीं कर सके। फुटबॉल करियर के भविष्य पर छाए अनिश्चितता के बादल विश्व कप के बाद अपने अमेरिकी क्लब इंटर मियामी लौटने और फिर पिता के निधन की इस दुखद घटना के बाद, मेस्सी के खेल करियर पर एक बड़ा अनिश्चितता का बादल मंडराने लगा है।
2022 में अर्जेंटीना को अपनी कप्तानी में विश्व कप जिताने वाले और खेल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार मेस्सी के लिए अब मैदान पर उतरना पहले जैसा नहीं रहेगा। पिता के बिना फुटबॉल खेलना उनके लिए एक ऐसी चुनौती बन गया है जिसके लिए वह फिलहाल तैयार नज़र नहीं आ रहे हैं। उनके भावुक शब्दों से संकेत मिलता है कि वह शायद अब खेल से ब्रेक ले सकते हैं या फिर संन्यास जैसा कोई कठोर निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, फैंस और फुटबॉल जगत केवल यही उम्मीद कर रहा है कि मेस्सी को इस गहरे दुख से उबरने की शक्ति मिले। भले ही वह आगे खेलें या न खेलें, फुटबॉल के इतिहास में अपने पिता जॉर्ज के साथ मिलकर उन्होंने जो अध्याय लिखा है, वह हमेशा अमर रहेगा।












