Congress Protest: देश की सियासत में जब भी आम आदमी की बुनियादी जरूरतों पर आंच आती है, उसका असर सीधे सड़क से लेकर संसद तक दिखाई देने लगता है। आज देश के भीतर एक ऐसी ही स्थिति जन्म ले चुकी है, जहां एक तरफ रसोई में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी गाड़ियों में भरवाए जा रहे ईंधन को लेकर जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। केंद्र सरकार की मौजूदा इथेनॉल सम्मिश्रण नीति और उसके अप्रत्यक्ष आर्थिक दुष्प्रभावों के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। राजधानी देहरादून के ईसी रोड स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर हुआ जोरदार प्रदर्शन इसी जनआक्रोश का एक खुला प्रमाण बनकर सामने आया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला। पेट्रोल पंप परिसर में एकत्र कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस तीखे और व्यंग्यात्मक नारे की रही, जिसमें कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा—”वाह रे मोदी तेरा खेल, खा गया चीनी पी गया तेल।” यह नारा महज राजनीतिक विरोध का हिस्सा नहीं है, बल्कि उस जमीनी सच्चाई को बयां करता है जिससे आज देश का हर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार जूझ रहा है।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सूर्यकांत धस्माना ने मौजूदा संकट की परतें खोलीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार के संरक्षण में जिस तरह से बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे और तकनीकी तैयारियों के इथेनॉल ब्लेंडिंग को थोपा जा रहा है, उसका सीधा नुकसान देश के वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है। आज पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल के नाम पर जो ईंधन दिया जा रहा है, उसमें इथेनॉल की अत्यधिक मात्रा मिलाई जा रही है। इसका सीधा असर दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों के इंजनों पर पड़ रहा है। वाहन चालकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं कि उनकी गाड़ियों के इंजन सीज हो रहे हैं, माइलेज तेजी से घट रहा है और बार-बार मेंटेनेंस का भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
इस नीति का दूसरा और कहीं अधिक खतरनाक पहलू देश के चीनी उद्योग और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इथेनॉल का मुख्य स्रोत गन्ना और उससे निकलने वाला शीरा है। सरकार द्वारा इथेनॉल उत्पादन को दी जा रही अंधाधुंध प्राथमिकताओं के चलते अधिकांश गन्ने को मिलों द्वारा सीधे इथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि चीनी मिलों में सामान्य चीनी के उत्पादन के लिए कच्चे माल की भारी कमी हो गई है। नतीजतन, बाजार में चीनी की आवक घट गई है और कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया गया है। महज पिछले एक पखवाड़े के भीतर देश के खुदरा बाजार में चीनी के दामों में बीस रुपये प्रति किलोग्राम तक की भारी वृद्धि देखी गई है।
सूर्यकांत धस्माना ने इस आर्थिक विसंगति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से देश में महंगाई की मार लगातार जनता की कमर तोड़ रही है। रसोई गैस, दालें, खाद्य तेल और हरी सब्जियां पहले ही आम आदमी के बजट से बाहर हो चुकी थीं। सरकार ने पहले गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से पौष्टिक भोजन छीनने का काम किया और अब उनकी सुबह की चाय की मिठास भी छीन ली गई है। गरीब के घर में एक कप मीठी चाय भी अब विलासिता बनती जा रही है।

सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब कोई भी नीति जनहित के बजाय कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, तो उसके परिणाम ऐसे ही विनाशकारी होते हैं। इथेनॉल उत्पादन इकाइयों को मुनाफा पहुंचाने की होड़ में न तो देश की खाद्य सुरक्षा का ख्याल रखा गया और न ही करोड़ों वाहन मालिकों के हितों की रक्षा की गई। आज स्थिति यह हो चुकी है कि शहर से लेकर गांव तक, हर पेट्रोल उपभोक्ता और हर चीनी उपभोक्ता खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
देहरादून के ईसी रोड पर हुए इस प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। हालांकि, कार्यकर्ताओं का आक्रोश शांतिपूर्ण किंतु बेहद आक्रामक था। धस्माना ने यह साफ कर दिया कि यह प्रदर्शन केवल एक दिन या एक पेट्रोल पंप तक सीमित रहने वाला नहीं है। उन्होंने मंच से औपचारिक ऐलान किया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में बहुत जल्द पूरे उत्तराखंड में एक व्यापक और निर्णायक जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
यह आंदोलन राज्य के हर जिले, हर शहर, हर ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को बताएंगे कि कैसे सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के कारण उनका वाहन खराब हो रहा है और उनकी रसोई का बजट बिगड़ रहा है। जब तक सरकार इस मनमानी इथेनॉल नीति की समीक्षा नहीं करती, पेट्रोल में अनियंत्रित मिलावट पर रोक नहीं लगाती और चीनी की बढ़ी हुई कीमतों को वापस सामान्य स्तर पर नहीं लाती, तब तक यह सड़क से संसद तक का संघर्ष जारी रहेगा। जनहित के मुद्दों पर उपजा यह आक्रोश आने वाले दिनों में राज्य और देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति के कारण मिलावट वाला पेट्रोल और आसमान छूती चीनी की कीमतों के खिलाफ आज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एआईसीसी सदस्य व उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में ईसी रोड स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर जबरदस्त प्रदर्शन किया।इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “वाह रे मोदी तेरा खेल, खा गया चीनी पी गया तेल” के नारे लगाते हुए काफी देर तक पेट्रोल पंप के सामने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए धस्माना ने कहा कि केंद्र सरकार के संरक्षण में बनी एथेनॉल नीति के कारण जनता को एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल अपनी गाड़ियों में भरवाना पड़ रहा है, जिसके कारण दो पहिया, तीन पहिया व चार पहिया पेट्रोल वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं। वहीं, क्योंकि एथेनॉल गन्ने से बनता है और इसके कारण गन्ने की कमी शुगर फैक्ट्रियों में हो गई है, जिससे चीनी का उत्पादन घट गया है और देश में चीनी पिछले एक पखवाड़े में 20 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हो गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से देश भर में महंगाई लगातार बढ़ रही है, किंतु जिस प्रकार से केंद्र सरकार की एथेनॉल नीति से पेट्रोल उपभोक्ता और चीनी का उपयोग करने वाला हर व्यक्ति आज त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है, वह अत्यंत चिंताजनक है। मोदी सरकार ने पहले हर नागरिक की थाली से भोजन छीन लिया और अब तो गरीब की प्याली से चाय की मिठास भी छीन ली है।
Uttarakhand News: मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक में दिए निर्देश
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